10-11 जून 2014 को इराक में अगवा 39 भारतीयों को ISIS के आतंकियों ने हत्‍या कर दी थी :विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज

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इराक में अगवा 39 भारतीय नागरिक मारे गए हैं. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इसकी पुष्टि की. उन्होंने बताया कि हत्या के बाद जमीन में दफनाए गए सभी शवों को डीप पेनिट्रेशन राडार के जरिए खोज लिया गया है. शवों को बाहर निकालकर उनका डीएनए टेस्ट भी किया गया है. बता दें कि जून 2014 में इराक के मोसुल शहर में आतंकी संगठन आईएसआईएस ने कम से कम 40 भारतीयों का अपहरण किया था. इनमें से एक व्यक्ति खुद को बांग्लादेश से आया मुस्लिम बता कर बच निकला. बाकी 39 भारतीयों को बदूश ले जा कर मार डाला गया. अगवा भारतीयों को बदूश शहर ले जाए जाने के बारे में जानकारी उस कंपनी से मिली, जहां ये भारतीय काम करते थे.

सुषमा ने बताया कि विदेश राज्य मंत्री वी के सिंह ने इराक में भारतीय राजदूत और इराक सरकार के एक अधिकारी के साथ बदूश शहर जा कर जब अगवा भारतीयों की खोज शुरू की, तब वहां के स्थानीय लोगों ने बताया कि आईएसआईएस आतंकियों ने कुछ शव दफनाए हैं.

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विदेश मंत्री ने बताया कि ‘डीप पेनिट्रेशन राडारों’ की मदद से पता लगाया गया कि जिस गड्ढे में शवों को दफनाए जाने की बात कही जा रही है, उसमें सचमुच क्या है. रडारों से जांच करने पर पता चला कि गड्ढे में शव हैं.

सुषमा ने राज्यसभा सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा, “शवों के अवशेष को बगदाद भेजा गया, जहां उनके डीएनए सैंपल लिए गए और उन्हें पंजाब, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल और बिहार में मौजूद उनके रिश्तेदारों के पास भेजा गया. कल हमें जानकारी मिली कि 38 शवों के डीएनए मैच कर गए हैं और 39वें व्यक्ति का डीएनए 70 फीसदी मैच किया है.” विदेश मंत्री ने बताया कि बगदाद में मार्टायर्स फाउंडेशन से इन शवों की डीएनए जांच करने का अनुरोध किया गया था.

सुषमा ने बताया कि शवों के अवशेष वापस लाने के लिए जनरल वीके सिंह इराक जाएंगे. शवों के अवशेष लाने वाला विमान पहले अमृतसर, फिर पटना और कोलकाता जाएगा.

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सबूत न मिलने तक मौत की घोषणा नहीं 
सुषमा ने कहा, “27 जुलाई को राज्यसभा में चर्चा के दौरान मैंने कहा था कि जब तक कोई भी सबूत नहीं मिल जाता, मैं उनकी हत्‍या या मौत की घोषणा नहीं करूंगी. लेकिन अाज वह समय आ गया है. हरजीत मसी की कहानी सच्ची नहीं थी.”

स्‍वराज ने यह भी बताया कि एक शख्‍स हरजीत मसीह किसी तरह बच निकलने में कामयाब रहा था. जब वह इराक के इरबिल में था तो उससे बात भी हुई थी लेकिन ताजा जानकारी के संदर्भ में उसके द्वारा दी गई जानकारी झूठी थी. सुषमा स्‍वराज ने बताया कि दरअसल हरजीत खुद को मुस्लिम बताकर बच निकला था. ऐसे में आइए जानते हैं कि हरजीत कौन है? जब वह बच निकला था तो उसने कौन सी जानकारी सार्वजनिक की थी?

हरजीत मसीह
27 साल का हरजीत मसीह पंजाब के गुरदासपुर जिले का रहने वाला है. वह 2015 में भारत लौटा. उस दौरान उसने मीडिया को बताया था कि 10-11 जून, 2014 को 40 भारतीयों को आईएस ने पकड़ लिया था. उनको बंधक बनाने के चार-पांच दिन बाद एक पहाड़ी पर ले जाया गया. उनको एक कतार में खड़ा कर दिया गया और पीछे से गोली मार दी गई. मसीह के मुताबिक उसको दाएं पैर में गोली लगी. वह गिर गया और मरने का नाटक किया. थोड़ी देर बाद जब आतंकी वहां से चले गए तो वह वहां से भाग निकला. मसीह के मुसाबिक बाकी किसी के बचने की वहां कोई संभावना नहीं दिखी थी. उसने बताया कि उसके बाद कुछ दिन तक वह बांग्‍लादेशी युवाओं के साथ रहा. उसके बाद इरबिल में अपनी कंस्‍ट्रक्‍शन कंपनी में संपर्क साधा. उन्‍होंने भारतीय दूतावास को मुझे सौंप दिया. उसके बाद मुझे भारत लाया गया.

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