भगवान की भक्ति से मिलेगी संतुष्टि श्रीराम कथा का चौथा दिन

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PATNA GARDANI BAGH ME DEVKI NANDAN MAHARAJ KA PARWACHAN

विश्व शांति सेवा चेरिटेबल ट्रस्ट और विश्व शांति सेवा समिति के तत्वाधान में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के चौथे दिन शनिवार को भी बड़ी संख्या में भक्तगण कथा श्रवण करने पहुंचे। संजय गांधी स्टेडियम में आयोजित राम कथा में कथा वाचक देवकीनंदन ठाकुर ने कथा कि शुरुआत करते हुए कहा कि आज लोग भगवान को पाना तो चाहते है, लेकिन उनका कपट दूर नहीं होता। जब मंदिर, तीर्थ और कथा पंडालों में जाते हैं तो भक्त बन जाते हैं, लेकिन जैसे ही घर वापस जाते हैं पुन:कपट प्रारम्भ हो जाता है। जो ना करने योग्य कार्य हैं वहीं करने में हम व्यस्त हो जाते हैं। यह भूल जाते हैं कि भगवान अंतर्यामी हैं, उनसे कुछ भी परदा नहीं है। कई लोग धर्म के नाम पर बड़ी-बड़ी बाते करते हैं, लेकिन उनके मन में कुछ नहीं होता है। यह कपट है, दुनिया शायद ना पहचाने लेकिन ठाकुर जरुर पहचानता है।उन्होंने कहा कि जो भी विषय धर्म से जुडा हुआ हो उस पर झूठ मत बोलो। जैसे हो वैसे ही जाओ। अगर हम झूठ बोलकर करेंगे तो ये पाप हमारा कई गुना ज्यादा हो जाएगा और ये भोगना ही पड़ेगा। उन्होंने कहा दुनिया में किए हुए पाप धर्म की शरण में आने पर समाप्त हो जाते हैं, लेकिन जो धर्म में किए गए हों पाप वो कहा मिटेंगे, वो तो भुगतने ही पडें़गे। इसलिए भगवान की भक्ति, भगवान का जप, धार्मिक कार्य कपट त्याग कर करने चाहिए। भोगों से कभी पेट नहीं भरता है, कितने भी सुख तुम्हें मिल जाए, कितनी भी वस्तुए तुम्हें मिल जाएं, कभी भी तृप्ति होने वाली नहीं है। संसार के किसी भी सुख को भोग लो संतुष्टि नहीं मिलेगी, लेकिन जब भगवान की भक्ति करोगे तो निश्चित तौर पर संतुष्टि मिलेगी।

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महाराज मनु ने कहा है वो जीवन व्यर्थ है जिस जीवन में भक्ति ना की गई हो। महाराज जी ने कहा कि जो भी व्यक्ति माता पिता की बात ना माने, धर्म का पालन ना करे, संतों की सेवा करने के बजाए उनसे सेवा करवाने की अपेक्षा रखे वह किसी राक्षस से कम नहीं है। महाराज जी ने कहा कि हमारी अगली पीढ़ी तब ही सुधरेगी जब हम उनको कुछ अच्छा देकर जाएंगे। हमारे बुजुगोर्ं ने जो हमें दिया है वो हम उन्हें देकर जाएं। लेकिन बजुगोर्ं की दी गई वस्तुओं को हम बर्बाद करते जा रहे हैं। हमारे बुजुगोर्ं ने हमे गंगा दी, संस्कृति दी, संतो की सेवा दी, भारत को संपन्न करने के लिए संस्कार रुपी सम्पत्ति दी थी, जिसका हम नाश करते जा रहे हैं। जिस व्यक्ति के पास संस्कार नहीं होते उससे बड़ा दरिद्र इस संसार में कोई नहीं है। उन्होंने कहा हम सबको अपनी जिम्मेदारी सिखनी पड़ेगी तब ये देश आगे बढ़ेगा। जिसका जैसा नजरिया होता है उसके वैसे नजारे होते हैं। नजरिया बदलो आपको यहां भी नजारे नजर आने लग जाएंगे। 
संजय गांधी स्टेडियम में कथा वाचन करते देवकीनंदन ठाकुर।

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