सांसदों-विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के तेज निपटारे के लिए बनेंगे 12 स्पेशल कोर्ट

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बिहार विधानसभा में 143 एमएलए पर अापराधिक मामले हैं. यह बिहार विधानसभा के कुल विधायकों का 59 प्रतिशत है. इसमें 96 एमएलए ऐसे हैं जिनके खिलाफ हत्या एवं अपहरण सहित अन्य गंभीर आपराधिक मामले हैं.  

सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के तेज़ निपटारे के लिए 12 विशेष कोर्ट बनेंगे. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर ये बताया है. केंद्र ने कहा है कि इस काम के लिए 7.80 करोड़ रुपए आवंटित किए जा रहे हैं.

इस साल 1 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि उसके 10 मार्च 2014 के फैसले के पालन के लिए सरकार क्या कर रही है. तब कोर्ट ने ये आदेश दिया था कि जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मुकदमों का निपटारा एक साल के भीतर होना चाहिए.

पिछले महीने एक मामले की सुनवाई के दौरान जब सरकार ने सज़ायाफ्ता जनप्रतिनिधियों के चुनाव लड़ने पर आजीवन पाबंदी की मांग पर सहमति जताई, तब कोर्ट ने सरकार से पूछ लिया था कि अभी लंबित मुकदमों के तेज निपटारे के लिए उसकी क्या योजना है?

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चुनाव आयोग की तरफ से कोर्ट में रखे गए आंकड़े के मुताबिक 2014 में कुल 1581 सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित थे. इसमें लोकसभा के 184 और राज्यसभा के 44 सांसद थे. महाराष्ट्र के 160, यूपी के 143, बिहार के 141 और पश्चिम बंगाल के 107 विधायकों पर मुकदमे लंबित थे. सभी राज्यों के आंकड़े जोड़ने के बाद कुल संख्या 1581 थी.

देश में विभिन्न राज्यों में विधायकों के कुल 4120 सीट हैं और लोकसभा के 545 एवं राज्यसभा के 245 मिलाकर कुल 790 सांसद हैं. इस प्रकार कुल 4910 सांसद-विधायक हैं. पांच राज्याें में विधान परिषद सदस्य भी हैं.

मामले को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने कहा था कि किसी राज्य में अदालतों के गठन आमतौर पर राज्य सरकार करती है. लेकिन इस मामले में देरी से बचने के लिए केंद्र सरकार एक योजना बना कर विशेष कोर्ट का गठन करे.

अब सरकार ने बताया है कि वो लोकसभा सांसदों के मुकदमों के फ़ास्ट ट्रेक निपटारे के लिए 2 कोर्ट बनाना चाहती है. जिन राज्यों में लंबित आपराधिक मामलों वाले विधायकों की संख्या ज़्यादा है, वहां भी 1-1 कोर्ट का गठन किया जाएगा. फिलहाल इस तरह की 12 विशेष कोर्ट का गठन किया जाएगा.

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सरकार ने कोर्ट के गठन के लिए चुनाव आयोग के आंकड़ों को ही आधार बनाया है. उसने लंबित मुकदमों पर अपनी तरफ से कोई आंकड़ा नहीं दिया है. सरकार ने आंकड़े जुटाने के लिए समय की मांग की है. सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर इसी सप्ताह विचार करेगा.

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