बिहार के लोगों ने किसी की कृपा पर नहीं बल्कि मेहनत के बूते दिल्ली में हैं : नीतीश कुमार

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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में जदयू की दिल्ली इकाई के कार्यकर्ताओं सम्मेलन में पार्टी अध्यक्ष नीतीश कुमार ने अवैध कॉलोनियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि वे इन्हें नियमित करने के लिए केंद्र तथा राज्य सरकार को पत्र लिखेंगे। उन्होंने कहा कि बिहार के लोगों ने किसी की कृपा पर नहीं, बल्कि अपनी मेहनत के बल पर दिल्ली में खुद को स्थापित किया है। बिहार-पूर्वांचल के लोग अब प्रवासी नहीं, यहां के स्थायी निवासी हैं। पार्टी के प्रदेश तथा राष्ट्रीय पदाधिकारियों द्वारा मंच से अवैध कॉलोनियों का मुद्दा उठाये जाने पर मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं से कहा कि दिल्ली की 1642 अवैध कॉलोनियों को नियमित किए जाने का मुद्दा वे पूरे जोर-शोर से उठाएं। अगले साल मार्च में पार्टी की रैली में इसी को मुद्दा बनाइये। पार्टी की तरफ से पूरा समर्थन मिलेगा। मैं स्वयं राज्य और केंद्र सरकार को भी लिखूंगा। इससे पहले जदयू के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष नरसिंह शाह और उपाध्यक्ष दयानंद राय ने बताया कि इन 1642 अनाधिकृत कॉलोनियों में करीब 30 लाख लोग रहते हैं। नीतीश ने आरोप लगाया कि पहले दिल्ली में जदयू के विस्तार की संभावनाओं की उपेक्षा की गई थी। दिल्ली में इतनी बड़ी संख्या में बिहार के लोग रहते हैं कि यहां पार्टी के विस्तार की काफी संभावनाएं हैं। 

 मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शराबबंदी को सामाजिक सद्भावना का प्रतीक बताते हुए इसे पूरे देश में लागू करने की वकालत की और कहा कि बिहार में एक साल के अंदर ही किडनी और लिवर के रोगियों की संख्या 39 प्रतिशत तथा न्यूरो संबंधी बीमारियों से ग्रस्त रोगियों की संख्या 44 प्रतिशत घटी है।जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने रविवार को दिल्ली के पार्टी कार्यकर्ताओं के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए बताया कि बिहार सरकार ने एक अध्ययन कराया है, जिसमें शराबबंदी से पहले और उसके बाद के एक साल के दौरान सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों की तुलना की गयी।

राज्य में 1 अप्रैल 2016 से शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था। उन्होंने बताया कि अध्ययन में पता चला कि सड़क दुर्घटनाओं एवं ट्रॉमा के मरीजों की संख्या में एक साल में 31 प्रतिशत की कमी आयी है। इसके अलावा किडनी तथा लिवर के रोगियों की संख्या 39 प्रतिशत, मानसिक बीमारियों के मरीजों की संख्या 33 प्रतिशत और तंत्रिका तंत्र (न्यूरो) संबंधी रोगों के मरीजों की संख्या 44 प्रतिशत कम हुई है।

जदयू अध्यक्ष ने कहा शराबबंदी को मुद्दा नहीं बनाने के लिए दूसरी पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि यह बिहार और गुजरात में लागू हो सकता है तो पूरे देश में क्यों नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कांग्रेस तथा वाम दल लंबे-चौड़े भाषण देते हैं, लेकिन इसकी बात नहीं करते और न ही इसके लिए कोई अभियान चलाते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ¨हदू, इस्लाम, सिख, बौद्ध और जैन, सभी धर्म शराब और नशे के खिलाफ हैं। सांप्रदयिक और सामाजिक सद्भावना का इससे बेहतर प्रतीक नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद चंद पढ़े-लिखे लोग इसे आजादी से जोड़कर शराबबंदी का विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने नशाबंदी लागू करने के साथ नशामुक्ति केंद्रों की भी स्थापना की थी। इन केंद्रों पर कराये गये त्वरित सव्रेक्षणों के अनुसार, शराबबंदी से अवसाद में 81 प्रतिशत और तनाव में 77 प्रतिशत की कमी दर्ज की गयी। इन केंद्रों में आने वाले मरीजों में 86 प्रतिशत स्वास्य में सुधार हुआ, 75 प्रतिशत की आमदनी बढ़ी, 83 प्रतिशत की बचत बढ़ी और 86 प्रतिशत की काम करने की क्षमता बढ़ी।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के हवाले से नीतीश ने बताया कि जनवरी 2015 से मार्च 2016 के मुकाबले अप्रैल 2016 से सितंबर 2017 की अवधि में बिहार में हत्या के मामलों में 14 प्रतिशत, डकैती के मामलों में 23 प्रतिशत, बैंकों में डकैती के मामलों में 21 प्रतिशत और सड़क दुर्घटना के मामलों में 10 प्रतिशत की गिरावट आयी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में प्रति लाख आबादी के लिए अपराध का राष्ट्रीय औसत 234.2 था जो वर्ष 2016 में मामूली गिरावट के साथ 233.6 रहा। इसी अवधि में बिहार में यह औसत 171.6 से घटकर 157.4 पर आ गया और पूरे देश में अपराध के मामले में वह 22वें स्थान पर रहा। 

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