पटना, 6 जून 2026। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पटना मैनेजमेंट एसोसिएशन (पीएमए) ने बिहार राज्य उत्पादकता परिषद के सहयोग से ऑक्सफोर्ड बिजनेस कॉलेज, पटना में “जलवायु के लिए प्रकृति से प्रेरित; हमारे भविष्य के लिए” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया।
संगोष्ठी का स्वागत भाषण कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नीलेश नारायण ने दिया। मुख्य वक्ता एवं पीएमए के अध्यक्ष बसंत कुमार सिन्हा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व की आवश्यकता बन चुका है। बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा, जल संकट, वायु प्रदूषण और प्राकृतिक आपदाएँ इस बात का संकेत हैं कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाए बिना विकास संभव नहीं है।
पीएमए के संरक्षक डी. के. श्रीवास्तव ने विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के वैश्विक संदेश की विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि पृथ्वी निरंतर चेतावनी दे रही है। पिघलते ग्लेशियर, बढ़ता समुद्री स्तर, भीषण गर्मी और जंगलों में लगने वाली आग जलवायु परिवर्तन के गंभीर संकेत हैं। उन्होंने युवाओं को पर्यावरण संरक्षण का ‘फ्रंटलाइनर’ बताते हुए सुरक्षित भविष्य के लिए ‘ग्रीन ब्रांड एंबेसडर’ बनने का आह्वान किया।
आईसीएआर के डॉ. आशुतोष उपाध्याय, प्रबंधन सलाहकार आर. के. चंद्रा तथा सुधा डेयरी के महेश्वर प्रसाद ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने सौर एवं पवन ऊर्जा, जल संरक्षण, वृक्षारोपण तथा सतत विकास को जलवायु संकट से निपटने के प्रभावी उपाय बताया।
कार्यक्रम के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि स्वच्छ पर्यावरण ही स्वस्थ समाज, मजबूत अर्थव्यवस्था और सुरक्षित भविष्य की आधारशिला है। छात्रों के साथ संवाद सत्र का संचालन डॉ. ए. के. वर्मा ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन पीएमए के सचिव इंजीनियर एम. के. दास ने दिया। संगोष्ठी का निष्कर्ष यही रहा कि प्रकृति की रक्षा ही मानवता की रक्षा है और आज उठाया गया प्रत्येक हरित कदम आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित बनाएगा।
इस कार्यक्रम में निदेशक सुधांशु कुमार सहित कॉलेज के कई शिक्षकों एवं छात्रों ने भी भाग लिया । शिक्षक के रूप में ईशा शर्मा , संचिता देवी , रवि राज , रवि रंजन , ऋतु राज , अनीप श्रीवास्तव, रोशन, कविता वं रिज़वी ने हिस्सा लिया वहीँ रिया श्रीवास्तव , अंकित राज प्रीतम, विशाल सिंह, ख़ुशी वं अदिति बाला जैसे छात्र कार्यक्रम में मौजूद रहे ।

जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई का वैश्विक आह्वान
धरती बहस नहीं करती, समझौता नहीं करती। वह केवल संकेत देती है। बढ़ता समुद्र स्तर, भीषण गर्मी की लहरें, जंगलों में लगने वाली विनाशकारी आग, अनियमित वर्षा, सूखा, बाढ़ और तेजी से पिघलते ग्लेशियर—ये सभी संकेत हमें यह बता रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की नहीं, वर्तमान की वास्तविकता है। वर्षों पहले वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी थी कि यदि वैश्विक तापमान वृद्धि को औद्योगिक युग से पहले के स्तर की तुलना में 1.5 डिग्री सेल्सियस के भीतर सीमित नहीं रखा गया, तो इसके गंभीर परिणाम पूरी मानवता को भुगतने पड़ेंगे। आज दुनिया उस सीमा को पार करने के खतरे का सामना कर रही है।
दशकों से जलवायु परिवर्तन को लेकर सम्मेलन, समझौते और लक्ष्य निर्धारित किए जाते रहे हैं। लेकिन अक्सर इन प्रयासों की गति राजनीतिक मतभेदों, आर्थिक हितों और निर्णयों में देरी के कारण धीमी पड़ती रही। अब समय आ गया है कि चेतावनियों को केवल सुना ही नहीं जाए, बल्कि उन पर प्रभावी कार्रवाई भी की जाए। क्योंकि प्रकृति का प्रत्येक संकेत यह बता रहा है कि देरी की कीमत आने वाली पीढ़ियों को चुकानी पड़ेगी।
हालांकि चुनौतियों के बीच उम्मीद की किरण भी दिखाई दे रही है। दुनिया के अनेक देशों में स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने की गति बढ़ी है। घरों और संस्थानों की छतों पर सौर पैनल लगाए जा रहे हैं, विशाल पवन ऊर्जा परियोजनाएँ विकसित हो रही हैं, शहरों को अधिक हरित और मानव-केंद्रित बनाया जा रहा है तथा बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और वन पुनर्स्थापन के प्रयास किए जा रहे हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों, ऊर्जा दक्ष तकनीकों और टिकाऊ कृषि पद्धतियों का विस्तार यह दर्शाता है कि जलवायु संकट का समाधान संभव है, यदि इच्छाशक्ति और सामूहिक प्रयास मजबूत हों।
विश्व पर्यावरण दिवस 2026 का मुख्य फोकस जलवायु परिवर्तन और उसके समाधान हैं। इस वर्ष का संदेश स्पष्ट है कि पृथ्वी द्वारा भेजे जा रहे संकेतों को समझना और उनके अनुरूप अपने विकास मॉडल को बदलना अब अनिवार्य हो गया है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) का वैश्विक अभियान #NowForClimate दुनिया भर के नागरिकों, सरकारों, उद्योगों और संस्थाओं से तत्काल कार्रवाई का आह्वान करता है। अभियान का उद्देश्य केवल जागरूकता बढ़ाना नहीं, बल्कि जलवायु संरक्षण के लिए ठोस और मापनीय कदमों को गति देना है।
इस वर्ष अज़रबैजान विश्व पर्यावरण दिवस के वैश्विक आयोजन की मेजबानी कर रहा है। यह आयोजन इस बात का प्रतीक है कि जलवायु परिवर्तन किसी एक देश या क्षेत्र की समस्या नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता की साझा चुनौती है। इसके समाधान के लिए वैश्विक सहयोग, तकनीकी नवाचार और स्थानीय स्तर पर जनभागीदारी तीनों आवश्यक हैं।
भारत जैसे देशों के लिए यह विषय और भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां करोड़ों लोगों की आजीविका कृषि, जल संसाधनों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र पर निर्भर है। जलवायु परिवर्तन का प्रभाव किसानों, श्रमिकों, महिलाओं और बच्चों पर सबसे अधिक पड़ता है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण केवल प्रकृति बचाने का प्रयास नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, आर्थिक स्थिरता और मानव कल्याण का भी प्रश्न है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी भूमिका को समझे। ऊर्जा की बचत, जल संरक्षण, वृक्षारोपण, प्लास्टिक का कम उपयोग, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा और टिकाऊ जीवनशैली अपनाकर हम जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध वैश्विक अभियान का हिस्सा बन सकते हैं।
विश्व पर्यावरण दिवस 2026 का संदेश स्पष्ट है—भविष्य को सुरक्षित बनाने का समय कल नहीं, आज है। पृथ्वी संकेत दे रही है; अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम उन संकेतों को सुनें, समझें और कार्रवाई करें। #NowForClimate 🌍🌱







