मां दुर्गा की सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती है। मां कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है, लेकिन ये सदैव शुभ फल ही देने वाली हैं। इसी कारण इनका एक नाम शुभंकरी भी है। दुर्गा पूजा के सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा और आराधना की जाती है। उनके साक्षात्कार से मिलने वाले पुण्य क ा वह भागी हो जाता है। मां कालरात्रि दुष्टों का नाश करने वाली हैं। दानव, दैत्य, राक्षस, भूत, प्रेत आदि इनके स्मरण मात्र से ही भयभीत होकर भाग जाते हैं। ये ग्रह-बाधाओं को भी दूर करने वाली हैं। नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की अराधना की जाती है। इस दिन साधक का मन सहस्त्रार चक्र में होता है। मां के इस स्वरूप को अपने हृदय में अवस्थित कर साधक को एकनिष्ठ भाव से उनकी अराधना करनी चाहिए।
बांग्ला विधि से पूजा होने वाले पंडालों और कालीबाड़ी में भक्तों के लिए मां का पट खोल दिया गया। दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने मां से सुख-समृद्धि और एश्वर्य का आशीर्वाद मांगा।
रविवार सुबह 9.41 बजे मां कात्यायनी की पूजा के बाद श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन किए। बंगाली अखाड़ा, गर्दनीबाग पटना कालीबाड़ी, न्यू रेलवे कॉलोनी(सीडीए बिल्डिंग के नजदीक) समेत कई जगहों पर सुबह में बोधन की रस्म निभाई गई। इसके लिए सभी दुर्गा पंडालों में गणेश वंदना हुई। लौंग-धूप से पूजा हुई और पंडालों में ढाकियों ने मां को प्रसन्न करने के लिए गीत गाए। पट खुलने के बाद जमकर ढाक बजाया गया और धनुची नृत्य के साथ मां की आरती की गई। इस मौके पर बड़ी संख्या में भक्त और श्रद्धालु भी ढाक की थाप पर मां की आरती में झूमते हुए शामिल हुए। शारदीय नवरात्र में मां को पुष्पांजलि कर सुख-समृद्धि, शांति व एश्वर्य का आशीर्वाद मांगा। सुबह बोधन की रस्म के बाद शाम में मां को आमंत्रण, अधिवास की पूजा की गई।
नवपत्रिका प्रवेश और प्राण प्रतिष्ठा :
बोधन, अधिवास के बाद प्रतिमा में प्राण प्रतिष्ठा की पूजा सोमवार को होगी। बंगाली अखाड़ा के सचिव जयदीप मुखर्जी ने बताया कि सोमवार की सुबह 8.41 बजे से नव- पत्रिका प्रवेश और सप्तमी पूजा का मुहूर्त है। नवपत्रिका प्रवेश पूजा में केला के थंब को गंगा स्नान के लिए ले जाया जाता है। स्नान से शुद्ध होने के बाद थंब को लाल पार की साड़ी पहनायी जाती है। बांग्ला में इस थंब को ‘कलाबोउ’ कहते हैं। इसका अर्थ होता है केला थंब के रूप में भगवान गणेश की पत्नी। इन्हें भगवान गणेश के साथ रखा जाता है। मां की प्राण प्रतिष्ठा के बाद महाआरती और पुष्पांजलि का कार्यक्रम होता है।
मां कात्यायनी की पूजा के लिए लगी रही भीड़:
वैष्णव पूजा पद्धति से शारदीय नवरात्र पूजा करने वाले मंदिरों, पूजा पंडालों और घरों में रविवार षष्ठी तिथि को मां कात्यायनी की पूजा, पाठ व आरती की गई। इसके बाद माता को बिल्व निमंत्रण(बेलनोती) दिया गया। बेल जोड़ा फल लगी डालियां पूजा स्थल पर रखकर पूजा के बाद सप्तमी तिथि(सोमवार) की सुबह मां कालरात्रि की पूजा के बाद मां का पट भक्तों व श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा। रविवार को मां कात्यायनी की पूजा के लिए शीतला माता मंदिर अगमकुआं, बड़ी व छोटी पटनदेवी पटनासिटी, अखंडवासिनी मंदिर गोलघर सहित अन्य माता मंदिरों में मां की पूजा करने के लिए सुबह से ही भक्तों की लंबी कतार देखने को मिली।
तख्त साहिब में चंडी पाठ
तख्त साहिब में जत्थेदार ज्ञानी बलदेव सिंह की देखरेख में चंडी पाठ किया गया। पूजा पंडालों में शप्तशती के श्लोक गूंज रहे हैं। सोमवार को सप्तमी पूजन के साथ ही माता के दर्शन को पट खोल दिए जाएंगे। इधर श्री श्री बड़ी देवीजी गुरहट्टा में धुनुची आरती की तैयारी की जा रही है। जहां ढाक की थाप के साथ बांग्ला परंपरा दिखेगी।
गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी में रविवार को आश्विन षष्ठी तिथि को बेल वृक्ष पर मां दुर्गा का आह्वान कर दुर्गा दरबार का पट खोला गया। इस संबंध में गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी प्रबंध न्यास समिति एवं बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अध्यक्ष प्रो.(डॉ.)रणबीर नंदन ने बताया कि आरती के बाद मां दुर्गा परिवार का पूजन, पुष्पांजलि एवं भोग प्रसाद अर्पण विधिवत प्रारंभ हो गया। उन्होंने कहा कि यहां स्थापित पंचमुखी हनुमान, शंकर भगवान, भगवान राम दरबार, चित्रगुप्त भगवान, माता दक्षिण काली की पूजा नवरात्र में संपन्न होगी। मौके पर नम्रता नंदन, गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी के पुजारी मुकेश रंजन झा, ऋषिकेश रंजन झा उर्फ रूना बाबा, सत्यप्रकाश पांडेय, वेद प्रकाश पांडेय, राकेश रंजन झा, अभिषेक सिन्हा, राजू चंद्रवंशी सहित बड़ी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।
षष्ठी तिथि पर रविवार को मां की आराधना, कल्पारंभ, देवी बोधन व आमंत्रण अधिवास का अनुष्ठान पूजा स्थलों पर किया गया। भक्तों ने मां कात्यायनी की उपासना की। सोमवार को भक्त देवी के सातवें स्वरूप कालरात्रि की उपासना करेंगे। रविवार को शक्तिपीठ बड़ी पटनदेवी, छोटी पटनदेवी, अगमकुआं शीतलामाता मंदिर में भक्तों की भीड़ रही। श्री बड़ीदेवीजी, मारुफगंज में रविवार को आमंत्रण अधिवास के अनुष्ठान के साथ भक्तों ने माता की आरती उतारी। सोमवार को नवपत्रिका प्रवेश अनुष्ठान होगा।







