उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर पीएम नरेंद्र मोदी का पहला रिएक्शन आ गया है. पीएम ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा है वह धनखड़ के उत्तम स्वास्थ्य की कामना कर रहते हैं. उन्होंने कई भूमिकाओं में देश की सेवा की है. धनखड़ ने सोमवार रात अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने की बात कही थी. राष्ट्रपति ने धनखड़ का इस्तीफा मंजूर कर लिया है. अब छह माह के भीतर अगले उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव करवाया जाएगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने पोस्ट में कहा, “जगदीप धनखड़ को भारत के उपराष्ट्रपति सहित कई भूमिकाओं में देश की सेवा करने का अवसर मिला है. मैं उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं.”
इससे पहले सोमवार देर शाम धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे अपने इस्तीफे में धनखड़ ने कहा कि वह स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने के लिए तत्काल प्रभाव से पद छोड़ रहे हैं.
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है. राज्यसभा में सभापति ने दी जानकारी. गृह मंत्रालय जल्द ही चुनाव का नोटिफिकेशन जारी करेगा.
-सूत्र ने बताया कि जगदीप धनकड़ अपने इस्तीफे पर पुनर्विचार नहीं करना चाहते हैं. उन्हें मनाने की कोशिश हुई है.
-जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि कारण उन्हें पता है. हमारा कोई लेना देना नहीं है. हमारा इससे कोई वास्ता नहीं है. उनकी इच्छा है और सरकार की इच्छा है कि क्या करना है.
-पप्पू यादव ने कहा कि उपराष्ट्रपति धनखड़ का स्वास्थ्य वजह एकदम नहीं है. वह एकदम सही थे. वे वह स्वस्थ थे. और अगर अस्वस्थ भी थे तो उनका इलाज उपराष्ट्रपति रहते हुए ज्यादा अच्छा होता. उपराष्ट्रपति जी को सबसे बड़ा धक्का तब लगा जब जेपी नड्डा ने सदन में कहा कि किसी का बोला हुआ रिकॉर्ड पर नहीं जाएगा. मेरा बोला हुआ रिकॉर्ड पर जाएगा. इससे उनको बहुत अपमान महसूस हुआ. इसके बाद बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में ना तो रिजिजू आए ना तो नड्डा आए. यह इतना अपमानजनक था कि उनको बर्दाश्त नहीं हुआ. वह किसान के बेटे हैं और जाट नेता हैं, उनका अपमान हुआ इसलिए उनको बर्दाश्त नहीं हुआ. इसके पीछे भाजपा के अंदरूनी लड़ाई है. आरएसएस का भी रोल इसमें है.
-कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद ने कहा, ‘देखिए कल शाम जब हम लोग मिले थे, तो मेरे साथ जयराम रमेश और प्रमोद तिवारी भी थे. स्वास्थ्य उनका एकदम ठीक था. स्वास्थ्य तो इस्तीफा की वजह नहीं लगती, वजह कुछ और है. ऐसा मुझे संदेह है कि किसी दूसरी वजह से उपराष्ट्रपति ने इस्तीफा दिया. मैं तो कहना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री हस्तक्षेप करें और प्रधानमंत्री उनसे कहें कि वह अपना इस्तीफा वापस लें. वह बहुत अच्छे सभापति थे, उनका संबंध हम सबसे बहुत अच्छा था. उनको वापस अपनी कुर्सी पर बैठना चाहिए.
– धनखड़ के इस्तीफे पर भाजपा नेता निशिकांत दुबे ने कहा कि फिल्म में कादर खान जी का रोल विपक्ष चरितार्थ कर रहा है. अभी उनको हटाने का प्रस्ताव लेकर आए थे, कम से कम व्यक्ति के स्वास्थ्य का तो ख़याल रखिए.
-जगदीप धनखड़ ने अपने इस्तीफे में स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है. कांग्रेस को इस पर यकीन नहीं हो रहा है.
-विपक्षी दलों ने सोमवार को जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से अचानक इस्तीफा देने पर सवाल उठाया. कांग्रेस ने कहा कि स्पष्ट रूप से उनके अप्रत्याशित इस्तीफे में जो दिख रहा है, उससे कहीं अधिक है. कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से धनखड़ को अपना मन बदलने के लिए मनाने का आग्रह किया.
अपने पोस्ट में क्या कहा?
जगदीप धनखड़ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस्तीफा पत्र पोस्ट करते हुए कहा, ‘आदरणीय राष्ट्रपति जी, स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिकता देने और चिकित्सीय सलाह का पालन करने के लिए मैं संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के अनुसार तत्काल प्रभाव से भारत के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देता हूं. मैं भारत की राष्ट्रपति के प्रति उनके अटूट समर्थन और मेरे कार्यकाल के दौरान हमारे बीच बने सुखद एवं अद्भुत कार्य संबंधों के लिए अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूं.’
उन्होंने आगे कहा कि मैं प्रधानमंत्री और सम्मानित मंत्रिपरिषद के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करता हूं. प्रधानमंत्री का सहयोग और समर्थन अमूल्य रहा है, और मैंने अपने कार्यकाल के दौरान बहुत कुछ सीखा है। संसद के सभी सदस्यों से मुझे जो गर्मजोशी, विश्वास और स्नेह मिला है, वह हमेशा मेरी स्मृति में रहेगा. मैं हमारे महान लोकतंत्र में उपराष्ट्रपति के रूप में प्राप्त अमूल्य अनुभवों और अंतर्दृष्टि के लिए तहे दिल से आभारी हूं.
विपक्ष के साथ रहा है टकराव
राज्यसभा के सभापति के रूप में अपने कार्यकाल में धनखड़ का विपक्ष के साथ कई बार टकराव हुआ, जिसने उन पर महाभियोग चलाने का प्रस्ताव भी पेश किया था. उन्हें हटाने का प्रस्ताव बाद में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने खारिज कर दिया था. यह प्रस्ताव स्वतंत्र भारत में किसी वर्तमान उपराष्ट्रपति को हटाने का पहला मामला था.
ऐसा करने वाले तीसरे राष्ट्रपति
वी वी गिरि और आर वेंकटरमन के बाद कार्यकाल के दौरान इस्तीफा देने वाले वह भारत के तीसरे उपराष्ट्रपति हैं. गिरि और वेंकटरमन ने राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था. धनखड़ का अचानक इस्तीफा राज्यसभा में सरकार के लिए एक आश्चर्यजनक घटनाक्रम के बाद आया है, क्योंकि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को हटाने के लिए विपक्ष द्वारा प्रायोजित एक प्रस्ताव उनके समक्ष प्रस्तुत किया गया था और उन्होंने सदन में इसका उल्लेख किया था.
एनडीए के लिए कैसे झटका?यह घटनाक्रम सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए एक झटका है, जिसने लोकसभा में इसी तरह का नोटिस प्रायोजित किया था और विपक्ष को भी इसमें शामिल किया था. जगदीप धनखड़ 2022 में उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उम्मीदवार थे. उन्होंने अपने त्यागपत्र में जगदीप धनखड़ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मंत्रिपरिषद और सभी सांसदों को उनके कार्यकाल के दौरान सहयोग देने के लिए धन्यवाद दिया.
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर पीएम नरेंद्र मोदी का पहला रिएक्शन आ गया है. पीएम ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा है वह धनखड़ के उत्तम स्वास्थ्य की कामना कर रहते हैं. उन्होंने कई भूमिकाओं में देश की सेवा की है. धनखड़ ने सोमवार रात अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने की बात कही थी. राष्ट्रपति ने धनखड़ का इस्तीफा मंजूर कर लिया है. अब छह माह के भीतर अगले उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव करवाया जाएगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने पोस्ट में कहा, “जगदीप धनखड़ को भारत के उपराष्ट्रपति सहित कई भूमिकाओं में देश की सेवा करने का अवसर मिला है. मैं उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं.”
इससे पहले सोमवार देर शाम धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे अपने इस्तीफे में धनखड़ ने कहा कि वह स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने के लिए तत्काल प्रभाव से पद छोड़ रहे हैं.
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है. राज्यसभा में सभापति ने दी जानकारी. गृह मंत्रालय जल्द ही चुनाव का नोटिफिकेशन जारी करेगा.
-सूत्र ने बताया कि जगदीप धनकड़ अपने इस्तीफे पर पुनर्विचार नहीं करना चाहते हैं. उन्हें मनाने की कोशिश हुई है.
-जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि कारण उन्हें पता है. हमारा कोई लेना देना नहीं है. हमारा इससे कोई वास्ता नहीं है. उनकी इच्छा है और सरकार की इच्छा है कि क्या करना है.
-पप्पू यादव ने कहा कि उपराष्ट्रपति धनखड़ का स्वास्थ्य वजह एकदम नहीं है. वह एकदम सही थे. वे वह स्वस्थ थे. और अगर अस्वस्थ भी थे तो उनका इलाज उपराष्ट्रपति रहते हुए ज्यादा अच्छा होता. उपराष्ट्रपति जी को सबसे बड़ा धक्का तब लगा जब जेपी नड्डा ने सदन में कहा कि किसी का बोला हुआ रिकॉर्ड पर नहीं जाएगा. मेरा बोला हुआ रिकॉर्ड पर जाएगा. इससे उनको बहुत अपमान महसूस हुआ. इसके बाद बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में ना तो रिजिजू आए ना तो नड्डा आए. यह इतना अपमानजनक था कि उनको बर्दाश्त नहीं हुआ. वह किसान के बेटे हैं और जाट नेता हैं, उनका अपमान हुआ इसलिए उनको बर्दाश्त नहीं हुआ. इसके पीछे भाजपा के अंदरूनी लड़ाई है. आरएसएस का भी रोल इसमें है.
-कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद ने कहा, ‘देखिए कल शाम जब हम लोग मिले थे, तो मेरे साथ जयराम रमेश और प्रमोद तिवारी भी थे. स्वास्थ्य उनका एकदम ठीक था. स्वास्थ्य तो इस्तीफा की वजह नहीं लगती, वजह कुछ और है. ऐसा मुझे संदेह है कि किसी दूसरी वजह से उपराष्ट्रपति ने इस्तीफा दिया. मैं तो कहना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री हस्तक्षेप करें और प्रधानमंत्री उनसे कहें कि वह अपना इस्तीफा वापस लें. वह बहुत अच्छे सभापति थे, उनका संबंध हम सबसे बहुत अच्छा था. उनको वापस अपनी कुर्सी पर बैठना चाहिए.
– धनखड़ के इस्तीफे पर भाजपा नेता निशिकांत दुबे ने कहा कि फिल्म में कादर खान जी का रोल विपक्ष चरितार्थ कर रहा है. अभी उनको हटाने का प्रस्ताव लेकर आए थे, कम से कम व्यक्ति के स्वास्थ्य का तो ख़याल रखिए.
-जगदीप धनखड़ ने अपने इस्तीफे में स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है. कांग्रेस को इस पर यकीन नहीं हो रहा है.
-विपक्षी दलों ने सोमवार को जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से अचानक इस्तीफा देने पर सवाल उठाया. कांग्रेस ने कहा कि स्पष्ट रूप से उनके अप्रत्याशित इस्तीफे में जो दिख रहा है, उससे कहीं अधिक है. कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से धनखड़ को अपना मन बदलने के लिए मनाने का आग्रह किया.
अपने पोस्ट में क्या कहा?
जगदीप धनखड़ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस्तीफा पत्र पोस्ट करते हुए कहा, ‘आदरणीय राष्ट्रपति जी, स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिकता देने और चिकित्सीय सलाह का पालन करने के लिए मैं संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के अनुसार तत्काल प्रभाव से भारत के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देता हूं. मैं भारत की राष्ट्रपति के प्रति उनके अटूट समर्थन और मेरे कार्यकाल के दौरान हमारे बीच बने सुखद एवं अद्भुत कार्य संबंधों के लिए अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूं.’
उन्होंने आगे कहा कि मैं प्रधानमंत्री और सम्मानित मंत्रिपरिषद के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करता हूं. प्रधानमंत्री का सहयोग और समर्थन अमूल्य रहा है, और मैंने अपने कार्यकाल के दौरान बहुत कुछ सीखा है। संसद के सभी सदस्यों से मुझे जो गर्मजोशी, विश्वास और स्नेह मिला है, वह हमेशा मेरी स्मृति में रहेगा. मैं हमारे महान लोकतंत्र में उपराष्ट्रपति के रूप में प्राप्त अमूल्य अनुभवों और अंतर्दृष्टि के लिए तहे दिल से आभारी हूं.
विपक्ष के साथ रहा है टकराव
राज्यसभा के सभापति के रूप में अपने कार्यकाल में धनखड़ का विपक्ष के साथ कई बार टकराव हुआ, जिसने उन पर महाभियोग चलाने का प्रस्ताव भी पेश किया था. उन्हें हटाने का प्रस्ताव बाद में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने खारिज कर दिया था. यह प्रस्ताव स्वतंत्र भारत में किसी वर्तमान उपराष्ट्रपति को हटाने का पहला मामला था.
ऐसा करने वाले तीसरे राष्ट्रपति
वी वी गिरि और आर वेंकटरमन के बाद कार्यकाल के दौरान इस्तीफा देने वाले वह भारत के तीसरे उपराष्ट्रपति हैं. गिरि और वेंकटरमन ने राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था. धनखड़ का अचानक इस्तीफा राज्यसभा में सरकार के लिए एक आश्चर्यजनक घटनाक्रम के बाद आया है, क्योंकि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को हटाने के लिए विपक्ष द्वारा प्रायोजित एक प्रस्ताव उनके समक्ष प्रस्तुत किया गया था और उन्होंने सदन में इसका उल्लेख किया था.
एनडीए के लिए कैसे झटका?यह घटनाक्रम सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए एक झटका है, जिसने लोकसभा में इसी तरह का नोटिस प्रायोजित किया था और विपक्ष को भी इसमें शामिल किया था. जगदीप धनखड़ 2022 में उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उम्मीदवार थे. उन्होंने अपने त्यागपत्र में जगदीप धनखड़ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मंत्रिपरिषद और सभी सांसदों को उनके कार्यकाल के दौरान सहयोग देने के लिए धन्यवाद दिया.