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मोदी सरकार के बिल में क्या है चिंता की बात?

UB India News by UB India News
August 3, 2023
in Lokshbha2024, ब्लॉग
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लंदन में दिए राहुल गांधी के बयान पर संसद में संग्राम ,कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित
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मणिपुर मुद्दे पर हंगामे के बीच केंद्र सरकार ने 28 जुलाई को लोकसभा में भारतीय प्रबंध संस्थानों (आईआईएम) संशोधन बिल पेश किया है. जिसके अनुसार राष्ट्रपति आईआईएम के विजिटर होंगे और उन्हें उनके कामकाज का ऑडिट करने का अधिकार होगा.

इसके अलावा इस बिल में आईआईएम के डायरेक्टर की नियुक्ति करने और उन्हें पद से हटाने को लेकर सरकार को ज्यादा अधिकार दिए गए हैं, जिससे इस प्रतिष्ठित संस्थान की ‘स्वायत्तता’ को लेकर बहस शुरू हो गई है.

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कांग्रेस ने की आलोचना

कांग्रेस महासचिव और सांसद जयराम रमेश ने केंद्र सरकार और इस बिल की आलोचना करते हुए उन पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा, ‘आईआईएम को साल 2017 में अधिक स्वायत्तता दी गई थी और इस कानून को संसद में भारी समर्थन मिला भी था.

लेकिन 6 साल पहले मोदी सरकार ने खुद जो बिल पेश किया था अब उससे उलट रही है. इससे यह स्पष्ट है कि केंद्र सरकार इन प्रतिष्ठित संस्थाओं की आजादी छीनना चाहती है.’

वहीं आईआईएम की चिंता इस बात को लेकर हैं कि कहीं यह संशोधित विधेयक जवाबदेही तय करने के नाम पर उनकी स्वायत्तता को छीन न लें.

इन संस्थानों को नेहरू कहते थे आधुनिक भारत मंदिर

साल 1947 में देश की आजादी के बाद प्रधानमंत्री बने नेहरू ने अपने 1964 में अपने निधन तक कई संस्थाओं की शुरुआत की थी. इन संस्थाओं को वे आधुनिक भारत का मंदिर कहते थे.

उन्होंने भारत के युवाओं को विश्व स्तरीय शिक्षा प्रदान करवाने के लिए 1950 में आईआईटी, 1961 में आईआईएम और 1956 में एम्स की शुरुआत की थी. उन्होंने 1961 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन बनाया भी बनवाया था.

क्यों लाया गया संशोधन बिल, क्या है मकसद

केंद्र सरकार आईआईएम संशोधन बिल के जरिए आईआईएम एक्ट 2017 में कुछ बदलाव करना चाहती है. दरअसल इस एक्ट के तहत आने वाले देश के कुल 20 संस्थानों को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया गया है.

इन 20 संस्थानों को मैनेजमेंट से लेकर रिसर्च और नॉलेज से लेकर ग्लोबल एक्सीलेंस तक, हर मामले में बेहतरीन और सशक्त बनाया गया है.

एक्ट 2017 के तहत आईआईएम के डायरेक्टर की नियुक्ति में सरकार के पास सीमित अधिकार होते हैं. फिलहाल डायरेक्टर की नियुक्ति बोर्ड ऑफ गवर्नर्स करते हैं,जबकि 28 जुलाई को लोकसभा में जो संशोधन बिल प्रस्तावित किया गया है.

उसमें इस नियुक्ति की प्रक्रिया में बदलाव लाने की कोशिश की गई है और आईआईएम डायरेक्टर की नियुक्ति में सरकार को अहम भूमिका देने की बात की गई है.

राष्ट्रपति सभी संस्थानों में करेंगे विजिट

संशोधन के लिए प्रस्तावित बिल की धारा 5 में बताया गया है कि प्रिंसिपल एक्ट के सेक्शन 10 के बाद और भी धाराए जोड़ी जाएगी. जैसे धारा 10A(1), जिसके अनुसार भारत के राष्ट्रपति आईआईएम एक्ट के तहत आने वाले सभी संस्थानों के विजिटर होंगे.

बिल के अनुसार राष्ट्रपति की तीन भूमिकाएं भी निर्धारित करता है. जिसमें निदेशक की नियुक्ती करना, संस्थानों के कामकाज का ऑडिट करना और जांच करना शामिल है.

वर्तमान में कैसे की जाती है डायरेक्टर की नियुक्ति

आईआईएम एक्ट 2017 की धारा 16(2) के अनुसार आईआईएम के डायरेक्टर की नियुक्ति कुछ नियम और शर्तें निर्धारित के साथ बोर्ड के जरिए की जाती है.

धारा 16(1) के अनुसार आईआईएम संस्थान का मुख्य कार्यकारी अधिकारी डायरेक्टर ही होगा और वो ही संस्थान का अगुवाई भी करेगा. इसके अलावा बोर्ड अगर कोई फैसले लेता है तो डायरेक्टर ही उसे लागू करने के लिए जिम्मेदार बनाया हैं.

धारा 16(3) के अनुसार डायरेक्टर की नियुक्त करने से पहले बोर्ड सर्च-कम-सलेक्शन कमेटी का गठन करेगा. इस कमेटी के जरिए सिफारिश किए गए नामों के पैनल में ही डायरेक्टर के नाम की नियुक्ति की जाएगी.

बोर्ड के अध्यक्ष सर्च-कम-सलेक्शन समिति की अगुवाई करेंगे और इस बोर्ड के मेंबर के रूप में 3 सदस्य होंगे. जिन्हें प्रशासक, उद्योगपतियों, शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, टेक्नोक्रेट और मैनेजमेंट विशेषज्ञों द्वारा चुना जाएगा.

संशोधित बिल के बाद कैसे खत्म हो जाएगी इन संस्थानों की स्वायत्तता

नए संशोधित बिल के अनुसार आईआईएम डायरेक्ट की नियुक्ति से पहले अब बोर्ड को राष्ट्रपति की मंजूरी लेने की जरूरत पड़ेगी और राष्ट्रपति केंद्रीय कैबिनेट की सलाह पर काम करते हैं, जिसका मतलब है कि शिक्षा मंत्रालय डायरेक्टर के लिए बोर्ड की पसंद को चाहे तो वीटो कर सकते है.

इसके अलावा संशोधित बिल में चयन प्रोसेस के शुरुआती चरण में भी सरकार को भूमिका देने का प्रावधान है. इसके अलावा 16(3) में सर्च-कम-सलेक्शन कमेटी के 4 सदस्यों के होने के बारे में बताया गया है.

इसमें बोर्ड के 3 अध्यक्ष तो होंगे ही लेकिन इसके अलावा भी एक सदस्य को विजिटर नामित करने की बाद कही गई है. प्रस्ताविक बिल के अनुसार डायरेक्टर को पद से हटाना भी है तो बोर्ड को विजिटर से पहले मंजूरी लेनी होगी.

पद से हटाने को लेकर 2017 एक्ट में क्या था

आईआईएम के 2017 एक्ट की धारा 16(7) कहता है कि बोर्ड डायरेक्टर को पद से हटा सकता है. इसके अलावा संशोधित बिल की धारा (16) की उप-धारा (9) के बाद निम्नलिखित उप-धाराएं जोड़ी गई. इस उप-धारा (10) के मुताबिक डायरेक्टर की सेवाओं को विजिटर खत्म कर सकता है, ऐसे तरीके से जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है.

 

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