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सौभाग्य योग में आज खुल गये माता के पट , साथ ही माता के सातवें स्वरूप माता कालरात्रि की पूजा आज

UB India News by UB India News
October 3, 2022
in अध्यात्म, पटना
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शारदीय नवरात्र के नौ दिनों के अंतर्गत मां दुर्गा के अलग–अलग स्वरूपों की पूजा की जा रही है। शनिवार को षष्ठी तिथि के साथ ज्येष्ठा नक्षत्र और आयुष्मान योग में देवी के षष्ठम स्वरूप में माता कात्यायनी की पूजा हुई। आज रविवार‚ सप्तमी तिथि को मूल नक्षत्र और सौभाग्य योग में सभी पूजा पंडालों‚ मंदिरों एवं घरों में स्थापित माता जगत जननी की विधि–विधान से पूजा करने के बाद वेदोक्त मंत्रोच्चार के साथ माता का पट खोला जाने लगा है । साथ ही देवी के सातवें स्वरूप माता कालरात्रि की पूजा भी होगी। सप्तमी तिथि रविवार को शाम ०६.२२ बजे तक है। रविवार को शुभ मुहूर्त सुबह ०७.४२ बजे से दोपहर ११.३९ बजे तक‚ फिर ०१.०८ बजे ०२.३६ बजे तक है। इसी समय अंतराल में माता के पट खुलेंगे। पत्रिका प्रवेश की पूजा और मध्यरात्रि में अष्टमी तिथि हो जाने महानिशा पूजा भी की जायेगी ।

दुर्गा पूजा को लेकर पटना का माहौल हुआ भक्तिमय, हर इलाका हो गया जगमग

दुर्गा पूजा को लेकर शहर का माहौल भक्तिमय हो गया है. पूरे शहर में माता की प्रतिमा के साथ ही श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए भव्य पंडाल बनाये गये हैं. शनिवार को अधिकतर पंडाल बन कर तैयार हो गये हैं और इनकी सजावट से आसपास के इलाके जगमग कर रहे हैं. पंडालों के आसपास पूजा-पाठ से जुड़ी दुकानें भी सज गयी हैं. लोगों की चहल-पहल भी बढ़ गयी है. कदमकुआं व गोविंद मित्रा रोड में पंडाल की भव्य सजावट की गयी है. रामकृष्ण मिशन आश्रम में भव्य प्रतिमा की स्थापना की गयी है. लोगों की भीड़ शनिवार से ही जुटने लगी है.

पटना के गोलघर चौराहा पर हो रही है 1921 से मां दुर्गा की पूजा, देखें पंडाल

पटना के फ्रेंड्स एसोसिएशन दुर्गा पूजा समिति (गोलघर चौराहा) की ओर से मां दुर्गा पूजा 1921 से हो रही है. इस बार कोलकाता के गौड़ीय मठ मंदिर का प्रतिरूप बनाया गया है. इसके निर्माण में अहम भूमिका कोलकाता के कलाकार एसपाल की टीम कर रही है. श्रद्धालुओं को इस बार मां का रौद्र रूप देखने को मिलेगा. साथ ही भगवान गणेश, कार्तिकेय, मां लक्ष्मी और सरस्वती की प्रतिमा विराजमान है.

षष्ठी तिथि के दिन शनिवार को बंगाली अखाड़ा में मां दुर्गा के पट खोल दिये गये

षष्ठी तिथि के दिन शनिवार को लंगर टोली स्थित बंगाली अखाड़ा में शाम छह बजते ही या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: के मंत्र के बीच मां दुर्गा के पट खोल दिये गये. मां के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. बंगाली अखाड़ा लंगरटाेली, श्रीराम कृष्ण मिशन (नाला रोड) पटना कालीबाड़ी, छज्जूबाग, आर ब्लाॅक वाटर टावर, अदालत गंज, सैदपुर, कदमकुआं में पूरे भक्तिभाव से पूजा-अर्चना की गयी. इससे पहले शनिवार को पूरे विधि-विधान के साथ कलश की स्थापना की गयी. शेष पूजा समितियों में वाराणसी पंचांग के अनुसार मां दुर्गा की प्रतिमाओं के पट रविवार को खोले जायेंगे

पटना के ठाकुरबाड़ी में मां ने दिये दर्शन, परंपरानुसार षष्ठी तिथि को पट खुला

पटना के गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी में दुर्गा पूजा के अवसर पर परंपरानुसार विधिविधान से षष्ठी तिथि को संध्या सात बजे मां दुर्गा का पट खुला. इसके बाद आज से मां दुर्गा परिवार का दर्शन प्रारंभ हुआ. गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी प्रबंध न्यास समिति के अध्यक्ष पूर्व विधान पार्षद डॉ. रणबीर नंदन एवं उनकी पत्नी नम्रता ने दुर्गा दरबार पट दर्शकों के लिए खोला. इसके बाद माता की भव्य आरती की गयी. इसके बाद आम नागरिकों के दर्शनार्थ पट खोल दिया गया.

 

शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है। आज यानी 02 अक्टूबर को शारदीय नवरात्रि की सप्तमी तिथि है। नवरात्रि में सातवें दिन महासप्तमी पड़ती है। इस दिन मां दुर्गा की सातवीं स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जाती है। सदैव शुभ फल देने के कारण इनको शुभंकरी भी कहा जाता है। मां कालरात्रि दुष्टों का विनाश करने के लिए जानी जाती हैं, इसलिए इनका नाम कालरात्रि है। मां दुर्गा की सातवीं स्वरूप मां कालरात्रि तीन नेत्रों वाली देवी हैं। कहा जाता है जो भी भक्त नवरात्रि के सांतवें दिन विधि-विधान से मां कालरात्रि की पूजा करता है, उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। मां कालरात्रि की पूजा से भय और रोगों का नाश होता है। साथ ही भूत प्रेत, अकाल मृत्यु ,रोग, शोक आदि सभी प्रकार की परेशानियों से छुटकारा मिलता है। ऐसे में आइए जानते हैं मां कालरात्रि की पूजा पूजा की तिथि, शुभ मुहूर्त और मंत्र…
नवरात्रि का सांतवां दिन है मां कालरात्रि को समर्पित, सुख-सौभाग्य के लिए ऐसे करें पूजा
नवरात्रि का सांतवां दिन है मां कालरात्रि को समर्पित, सुख-सौभाग्य के लिए ऐसे करें पूजा –
मां कालरात्रि का स्वरूप 
कह जाता है कि मां दुर्गा को कालरात्रि का रूप शुम्भ, निशुम्भ और रक्तबीज को मारने के लिए लेना पड़ा था। देवी कालरात्रि का शरीर अंधकार की तरह काला है। इनके श्वास से आग निकलती है। मां के बाल बड़े और बिखरे हुए हैं। गले में पड़ी माला बिजली की तरह चमकती रहती है। मां के तीन नेत्र ब्रह्मांड की तरह विशाल व गोल हैं। मां के चार हाथ हैं, जिनमें एक हाथ में खडग अर्थात तलवार, दूसरे में लौह अस्त्र, तीसरे हाथ अभय मुद्रा में है और चौथा वरमुद्रा में है।
पूजा विधि
सप्तमी तिथि के दिन ब्रह्म मुहूर्त में प्रातः स्नान करने के बाद पूजा आरंभ करनी चाहिए। स्नान के बाद माता के सामने घी का दीपक जलाएं। उन्हें लाल रंग के फूल अर्पित करें। मां कालरात्रि की पूजा में मिष्ठान, पंच मेवा, पांच प्रकार के फल, अक्षत, धूप, गंध, पुष्प और गुड़ नैवेद्य आदि का अर्पण किया जाता है।
नवरात्रि का सांतवां दिन है मां कालरात्रि को समर्पित, सुख-सौभाग्य के लिए ऐसे करें पूजा
नवरात्रि का सांतवां दिन है मां कालरात्रि को समर्पित, सुख-सौभाग्य के लिए ऐसे करें पूजा –
इस दिन गुड़ का विशेष महत्व बताया गया है। मां कालरात्रि को गुड़ या उससे बने पकवान का भोग लगाएं। पूजा समाप्त होने के बाद माता के मंत्रों का जाप कर उनकी आरती करें। साथ ही दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
मंत्र

ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ऊं कालरात्रि दैव्ये नम: .
ॐ कालरात्र्यै नम:
ॐ फट् शत्रून साघय घातय ॐ
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं दुर्गति नाशिन्यै महामायायै स्वाहा।

ध्यान मंत्र
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता, लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।
वामपादोल्ल सल्लोहलता कण्टक भूषणा, वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥

शारदीय नवरात्र के नौ दिनों के अंतर्गत मां दुर्गा के अलग–अलग स्वरूपों की पूजा की जा रही है। शनिवार को षष्ठी तिथि के साथ ज्येष्ठा नक्षत्र और आयुष्मान योग में देवी के षष्ठम स्वरूप में माता कात्यायनी की पूजा हुई। आज रविवार‚ सप्तमी तिथि को मूल नक्षत्र और सौभाग्य योग में सभी पूजा पंडालों‚ मंदिरों एवं घरों में स्थापित माता जगत जननी की विधि–विधान से पूजा करने के बाद वेदोक्त मंत्रोच्चार के साथ माता का पट खोला जाने लगा है । साथ ही देवी के सातवें स्वरूप माता कालरात्रि की पूजा भी होगी। सप्तमी तिथि रविवार को शाम ०६.२२ बजे तक है। रविवार को शुभ मुहूर्त सुबह ०७.४२ बजे से दोपहर ११.३९ बजे तक‚ फिर ०१.०८ बजे ०२.३६ बजे तक है। इसी समय अंतराल में माता के पट खुलेंगे। पत्रिका प्रवेश की पूजा और मध्यरात्रि में अष्टमी तिथि हो जाने महानिशा पूजा भी की जायेगी ।

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दुर्गा पूजा को लेकर पटना का माहौल हुआ भक्तिमय, हर इलाका हो गया जगमग

दुर्गा पूजा को लेकर शहर का माहौल भक्तिमय हो गया है. पूरे शहर में माता की प्रतिमा के साथ ही श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए भव्य पंडाल बनाये गये हैं. शनिवार को अधिकतर पंडाल बन कर तैयार हो गये हैं और इनकी सजावट से आसपास के इलाके जगमग कर रहे हैं. पंडालों के आसपास पूजा-पाठ से जुड़ी दुकानें भी सज गयी हैं. लोगों की चहल-पहल भी बढ़ गयी है. कदमकुआं व गोविंद मित्रा रोड में पंडाल की भव्य सजावट की गयी है. रामकृष्ण मिशन आश्रम में भव्य प्रतिमा की स्थापना की गयी है. लोगों की भीड़ शनिवार से ही जुटने लगी है.

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पटना के फ्रेंड्स एसोसिएशन दुर्गा पूजा समिति (गोलघर चौराहा) की ओर से मां दुर्गा पूजा 1921 से हो रही है. इस बार कोलकाता के गौड़ीय मठ मंदिर का प्रतिरूप बनाया गया है. इसके निर्माण में अहम भूमिका कोलकाता के कलाकार एसपाल की टीम कर रही है. श्रद्धालुओं को इस बार मां का रौद्र रूप देखने को मिलेगा. साथ ही भगवान गणेश, कार्तिकेय, मां लक्ष्मी और सरस्वती की प्रतिमा विराजमान है.

षष्ठी तिथि के दिन शनिवार को बंगाली अखाड़ा में मां दुर्गा के पट खोल दिये गये

षष्ठी तिथि के दिन शनिवार को लंगर टोली स्थित बंगाली अखाड़ा में शाम छह बजते ही या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: के मंत्र के बीच मां दुर्गा के पट खोल दिये गये. मां के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. बंगाली अखाड़ा लंगरटाेली, श्रीराम कृष्ण मिशन (नाला रोड) पटना कालीबाड़ी, छज्जूबाग, आर ब्लाॅक वाटर टावर, अदालत गंज, सैदपुर, कदमकुआं में पूरे भक्तिभाव से पूजा-अर्चना की गयी. इससे पहले शनिवार को पूरे विधि-विधान के साथ कलश की स्थापना की गयी. शेष पूजा समितियों में वाराणसी पंचांग के अनुसार मां दुर्गा की प्रतिमाओं के पट रविवार को खोले जायेंगे

पटना के ठाकुरबाड़ी में मां ने दिये दर्शन, परंपरानुसार षष्ठी तिथि को पट खुला

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कह जाता है कि मां दुर्गा को कालरात्रि का रूप शुम्भ, निशुम्भ और रक्तबीज को मारने के लिए लेना पड़ा था। देवी कालरात्रि का शरीर अंधकार की तरह काला है। इनके श्वास से आग निकलती है। मां के बाल बड़े और बिखरे हुए हैं। गले में पड़ी माला बिजली की तरह चमकती रहती है। मां के तीन नेत्र ब्रह्मांड की तरह विशाल व गोल हैं। मां के चार हाथ हैं, जिनमें एक हाथ में खडग अर्थात तलवार, दूसरे में लौह अस्त्र, तीसरे हाथ अभय मुद्रा में है और चौथा वरमुद्रा में है।
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नवरात्रि का सांतवां दिन है मां कालरात्रि को समर्पित, सुख-सौभाग्य के लिए ऐसे करें पूजा –
इस दिन गुड़ का विशेष महत्व बताया गया है। मां कालरात्रि को गुड़ या उससे बने पकवान का भोग लगाएं। पूजा समाप्त होने के बाद माता के मंत्रों का जाप कर उनकी आरती करें। साथ ही दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
मंत्र

ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ऊं कालरात्रि दैव्ये नम: .
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ॐ फट् शत्रून साघय घातय ॐ
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं दुर्गति नाशिन्यै महामायायै स्वाहा।

ध्यान मंत्र
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता, लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।
वामपादोल्ल सल्लोहलता कण्टक भूषणा, वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥

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