दुर्दांत अपराधियों के खिलाफ ‘गंगा स्नान’

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‘मैं विकास दुबे हूं कानपुर वाला’…पुलिस गिरफ्त में चिल्ला कर खुद बोलता है और 8 पुलिसकर्मियों को शहीद करनेवाला दुर्दांत अपराधी शुक्रवार अहले सुबह एनकाउंटर में मारा जाता है. गुरुवार से लेकर शुक्रवार की अहले सुबह तक गिरफ्तारी से लेकर एनकाउंटर तक, सबकुछ संपन्न. यानी अपराध की दुनिया के एक अध्याय का अंत. कहा भी गया है कि ऐसे दुर्दांत अपराधियों का अंजाम अक्सर ऐसा ही होता है. विकास दुबे का एनकाउंटर यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार की क्राइम के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति करार दिया जा रहा है और इसकी खूब तारीफ हो रही है. बता दें कि बिहार का अपराध जगत भी विकास दुबे जैसे अपराधियों के अंजाम की घटनाओं से भरा पड़ा पड़ा है. खास तौर पर लालू-राब़ड़ी शासन के बाद वर्ष 2005 से ऐसी अनेक कहानियां हमारे सामने हैं.

लालू-राबड़ी राज के बाद शुरू हुआ ‘गंगा स्नान’
दरअसल, साल 1990 से लेकर 2005 तक लालू एंड फैमिली का शासन रहा. इस दौरान राजनीति और अपराध में तालमेल था. रंगदारी व किडनैपिंग जैसे अपराध आम हो गए थे. ऐसे ही हालात को देख पटना हाईकोर्ट ने शासन को “जंगलराज’ कहा था. आरजेडी शासनकाल से त्रस्त बिहार की जनता ने 2005 में सत्ता की कमान सीएम नीतीश कुमार के हाथों में दे दी. नीतीश भी जनता की उम्मीदों पर खरे उतरे और शुरू हुआ दुर्दांत अपराधियों के खिलाफ ‘गंगा स्नान’.

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सीएम नीतीश ने अपराध के प्रति दिखाई थी सख्ती
सीएम नीतीश के पहले मुख्यमंत्रित्व काल के दूसरे साल यानी 2006 में बिहार पुलिस ने ऑपरेशन ‘गंगा स्नान’ चलाया था. बता दें कि ये एक गोपनीय अभियान था, जिसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं मिलेगा. इस ऑपरेशन के तहत दुर्दांत अपराधियों का सीधे एनकाउंटर किया जाता था. ऑपरेशन गोपनीय तरीके से अंजाम दिया जाता था. इसलिए उस दौरान कितने अपराधियों को खत्म किया गया, इसके आंकड़े नहीं दिए जा सकते. लेकिन, सार्वजनिक तथ्य है कि उस दौरान बिहार के बड़े अपराधी या तो ढेर कर दिए गए या फिर उन्होंने दूसरे राज्यों में शरण ले ली थी.

बिहार में एक के बाद एक निपटते चले गए बड़े अपराधी
नीतीश सरकार ने जिन बड़े अपराधियों का खत्मा किया इनमें गुड्डू शर्मा को बिहार पुलिस ने दिल्ली में मार गिराया तो हत्यारे अमरेश सिंह को खगड़िया जिले में मार गिराया गया था. इसके अलावा बिंदु सिंह को पकड़कर पुलिस ने जेल में डाला. बिहार का डॉन कहे जाने वाले आरजेडी नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन आज भी जेल की सलाखों के पीछे हैं. उस दौर में बबलू सिंह, अमरेश सिंह, गुड्डू शर्मा, अनंत सिंह समेत कई ऐसे नाम थे, जिनके नाम से पुलिस भी कांपती थी. अब इन सभी पर नकेल कसी गई और सभी को जेल की हवा खानी पड़ी.

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इसी USP के आसरे कायम है सीएम नीतीश का इकबाल
नीतीश सरकार का अपराधियों पर यह नकेल 2013 तक बदस्तूर जारी रहा, लेकिन 2013 में नीतीश के बीजेपी से अलग होने के बाद एक बार फिर अपराधियों का मनोबल बढ़ गया था. हालांकि एक बार फिर बिहार में 2017 से 2020 तक लगभग एक दर्जन अपराधियों को पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया. बता दें कि अपराध और अपराधियों के खिलाफ सख्ती सीएम नीतीश की यूएसपी है जिसको लेकर सीएम नीतीश की आज भी तारीफ होती है और इसी छवि की वजह से वे पिछले 15 वर्षों से सत्ता पर काबिज हैं.

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