बिहार में पहली बार 8.71 करोड़ गरीबों को तीन महीने तक 5-5 किलो अनाज

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उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि कोरोना संकट के समय भी केंद्र सरकार बिहार की मदद को आगे आया है। उसने खाद्यान्न व नकद के रूप में बिहार के गरीबों को 11744 करोड़ की मदद की है। इनमें 5719 करोड़ डीबीटी के जरिए सीधे उनके खाते में और 6024 करोड़ मूल्य के खाद्यान्न का वितरण किया गया है। राजद-कांग्रेस बताएं कि क्या उनके शासन काल में बाढ़ और सुखाड़ जैसी आपदाओं के समय भी बिहार के पीड़ितों को मदद की जाती थी? क्या लाखों पीड़ितों को बाढ़ खत्म होने के महीनों बाद तक कुछ किलो अनाज के लिए इंतजार नहीं करना पड़ता था?
मोदी ने कहा कि बिहार में पहली बार किसी सरकार ने 8.71 करोड़ गरीबों को 3 महीने तक प्रति महीने प्रति व्यक्ति 5-5 किलो यानी 15 किलो चावल जिसका बाजार मूल्य 28 से 30 रु. प्रति किलो है और 1.67 करोड़ परिवारों को प्रति परिवार 1-1 किलो यानी 3 किलो अरहर दाल जिसका बाजार मूल्य 120 रु. प्रति किलो है, का मुफ्त में वितरण किया है।

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वितरित चावल और दाल की कीमत करीब 6024 करोड़ रुपए है।  इसके साथ ही केन्द्र सरकार ने 86 लाख 40 हजार बिना राशनकार्ड वाले व प्रवासी श्रमिक बंधुओं को भी अगले दो महीने तक प्रति व्यक्ति 5-5 किलो की दर से 10 किलो अनाज देने का निर्णय लिया है। इस पर 325 करोड़ खर्च होंगे।

लाेकसभा चुनाव 2019 का सबक भूल गया है विपक्ष
उधर, सुशील मोदी ने ट्वीट किया- विपक्ष वर्ष 2010 के विधानसभा और 2019 के संसदीय चुनाव का सबक भूल गया है। चुनाव आने दीजिए जनादेश की आंधी में विपक्ष के झूठे आरोपों के पहाड़ फिर उड़ जाएंगे। कुशहा त्रासदी के वक्त 2008 में कोसी की विकराल बाढ़ के समय एनडीए सरकार जब आपदा प्रबंधन की मिसाल कायम करते हुए लाखों लोगों को बचा रही थी, तब भी राजद पीड़ितों की मदद करने की बजाय आंख मूंद कर सरकार की निंदा कर रहा था।

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