श्रम कानून में बदलाव पर विपक्ष ने घेरा सरकार को

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कोरोना संकट के दौरान बिहार की आर्थिक स्थिति को बेहतर करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए श्रम कानून में बदलाव करने का फैसला किया है. उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की तर्ज पर बिहार सरकार श्रम कानून में तीन महीने के लिए बदलाव करने जा रही है.

श्रम कानून में बदलाव किए जाने पर विपक्ष ने सरकार को घेरा है. आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता भाई वीरेंद्र ने कहा है कि मालिकों के दबाव में सरकार कानून में बदलाव कर रही है. काम के घंटे बढ़ने से ज्यादा फायदा मालिकों को होगा. इसमें सरकार श्रमिकों के लिए कुछ नहीं कर रही है. उन्हें तो उनके हाल पर छोड़ दिया है. जो कानून बनता है, उसे भी जमीन पर लागू नहीं करती है.

वहीं, कांग्रेस नेता प्रेमचंद मिश्रा ने काम के घंटे बढ़ाने का विरोध किया है. उन्होंने कहा है कि पूंजीपतियों के दबाव में सरकार ऐसा कदम उठा रही है. ये सरकार पूरी तरह से श्रमिकों की विरोधी है. कौन श्रमिक 12 घंटे काम कर पाएगा, ये तो खून चूसने जैसी स्थिति बनाई जा रही है.

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हालांकि, इस पर बिहार सरकार में मंत्री विनोद नारायण झा ने इसे श्रमिकों का फायदा पहुंचाने वाला फैसला बताया है. साथ ही उन्होंने कहा कि आरजेडी विकास विरोधी है, उसे समझ मे नहीं आता है. आरजेडी के नेता कुछ भी बयान देते रहते हैं. प्रवासी श्रमिकों के हुनर को सम्मान देने का काम सरकार कर रही है.

वहीं, जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा है कि दुनियाभर में कोरोना के कारण हालात बिगड़े हैं. बिगड़े हालात को ठीक करने के लिए प्रयास हो रहे हैं. अगर श्रम कानून में बदलाव से स्थिति बदली तो स्वागत करना चाहिए. विपक्ष को हमेशा विरोध ही नहीं, कभी आम लोगों के सवाल पर समर्थन भी करना चाहिए.

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