उप संपादक अर्चना राय भट्ट की कलम से आज के विचार

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आज विक्रम संवत्- 2077, हिजरी सन्-1440 / 41 वैशाख मास के शुक्लपक्ष की द्वितीया तिथि दिन शनिवार के साथ रमज़ान का मुकद्दस महीना की शुरुआत हो रही है सभी रोजेदारों को इस पाक महीने की ढेरों शुभकामनाएं ।
आज विश्व मलेरिया दिवस है । अजीब इतेफाक है कि जिस बीमारी की याद को ताजा रखने और उससे सिख लेने के लिए ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ ने 2008 में आज के दिन को इसके लिए चुना , आज उसकी ही दवा सदी की सबसे बड़ी त्रासदी कोरोना में उमीद की एक किरण परिलक्षित हो रही है । जिस मलेरिया की दवा हाइड्रॉक्सी-क्लोरोक्वीन को पूरी दुनिया नकार चुकी थी उसी दवा के लिए सारी दुनिया भारत के तरफ उमीद भरी नजरों से देख रही है । मलेरिया का इससे बेहतर श्रद्धांजलि क्या होगा ।
सदी की सबसे बड़ी वैश्विक त्रासदी कोरोना कोविड-19 के मार से मरी जा रही है अब वह भारत मे भी पैर तेजी से फैला रहा है । इसके एकमात्र उपचार के रूप में सोशल डिस्टेंसिंग को अमल में लाने के लिए सरकार ने लौकडाउन कर रखा है । जिसके फायदे भी बहुत हुए है किन्तु अब भी कुछ ऐसे लोग है जो खुल कर सामने नही आ रहे है जिसके कारण इसका फैलाव हो रहा है । लोगो का खुद से सामने आकर इलाज करवाने में सबसे बड़ी एक समस्या समाजिक रूप में भी दिख रही है । जो बहुत दुखद बात भी है । जिस भी व्यक्ति को यह बीमारी लग जा रही उसे हमारा समाज चाहे डर से हो या फिर छुआ छूत की वास्तविक भावना से ग्रसित होके हो उसका और उसके परिवार का सामाजिक रूप बहिष्कार दिखने को मिल रहा है । कोविड-19 मरीज ठीक हो रहे हैं, यह बेहद खुशी की बात है । लेकिन, दुखद बात यह है कि ठीक होकर जा रहे लोगों के प्रति भी लोगों का रवैया शंका से भरा दिख रहा है। इस कारण जिसको बीमारी है वह निकल नही रह और इससे इसमे तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है और मरीजों की मृत्यु भी हो रही है। किसी को कोरोना वायरस का संक्रमण हो जाने पर समाज यह नहीं स्वीकारना चाहता है कि इलाज के बाद ठीक होने पर भी वह खतरे से मुक्त हो गया है । इस कारण समाज के लोग उससे और उसके परिवार के साथ पूरी तरह से कट जा रहे हैं । इसका नतीजा यह हो रहा है कि जिनमें कोविड-19 के लक्षण दिखते भी हैं तो वे तुरंत सामने आने से घबरा रहा हैं । वे अस्पताल अथवा स्वास्थ्य केंद्र पर नहीं जाना चाहते क्योंकि उन्हें लगता है कि पड़ोसियों को पता चल गया तो वे मुझे और मेरे परिवार से दूरी बना लेंगे और परेशान करेंगे । इसके साथ प्रशाशन के तरफ से उसका घर क्या पूरे मुहहले को तालाबंदी कर सैकड़ो लोगो को आइसोलेशन या क्वारंटाइन में भेजा जाता है । यह भी लोगो के मन मे डर हो सकता पर वह नही समझते कि इसके अलावा और कोई उपाय नही है । अगर इसे नजरअंदाज कर दिया गया तो फिर कोई और रास्ता न बचेगा बहुतायत संख्या में लोगो को बचाने का । इसलिए जरा भी अगर लगता आपको की इसका प्रभाव है तो लोक लाज को त्याग कर अपने साथ साथ अपने पूरे परिवार की जिंदगी के वास्ते सामने आये इसी में भलाई है ।

इस बीच गृह मंत्रालय ने आज से कोरोना के कारण जूझती जनता को कुछ राहत प्रदान की है । इसमे आवासीय कॉलोनियों के समीप बनी दुकानों और स्टैंड-अलोन दुकानों को खोलने की इजाजत दे दी है जो नगरपालिका निगमों और नगर पालिकाओं की सीमा के भीतर आती हों । इसके साथ शर्त भी है । सभी दुकानें संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के स्थापना अधिनियम के तहत पंजीकृत होनीं चाहिए । दुकानों में सिर्फ आधा स्टाफ ही काम कर सकेगा ।
सरकार हर तरह से हम सबके साथ है बस हमे भी सरकार के द्वारा निर्धारित सीमा रेखा के अंदर रह कर आगे बढ़ने की आवश्यकता है तभी हम इस कठिन लड़ाई को जीत पाएंगे ।

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भारत के महानतम गायकों व संगीतज्ञों में एक, 30 से 40 के दशक में हिंदुस्तानी संगीत के फलक पर सितारे की तरह चमकते , मखमली आवाज की खुशबू बिखेरते ,पद्म भूषण और संगीत नाटक अकादमी सम्मान से नवाजे गए उस्ताद बड़े ग़ुलाम अली ख़ाँ साहिब की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि ।

आज इतिहास के पन्नो में बहुत कुछ सिमटा है आज जब आप यह मैसेज पढ़ रहे होंगे या रंगीन कोई भी स्क्रीन देख रहे होंगे तो जेहन में आज के दिन का ख्याल आना जरूरी है क्योंकि भारत मे आज ही के दिन 1982 में रंगीन टेलीविजन / स्क्रीन की शुरुआत हुई । तब से लेकर अब तक अमूल परिवर्तन के साथ रंगीन स्क्रीन हामरी रँगीन दुनिया बन चुकी है ।

उमीद करते है जल्द से जल्द हम इस लड़ाई में विजय पताका लहरायेंगे । आप सभी को एक बार फिर आज के दिन की ढेरों शुभकामनाएं ।

मैं अर्चना राय भट्ट उप संपादक यूबी इंडिया न्यूज के रूप में नही बल्कि इस लेख मे लिखे विचार और भाव मेरे व्यक्तिगत है 

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