बिहार: चुनावी साल में लॉकडाउन, अब सोशल मीडिया के जरिये सियासत

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कोरोना वायरस संक्रमण से उबरने के लिए देश में लागू लॉकडाउन के बावजूद बिहार में राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. इन दलों के नेता भले ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के कारण लोगों से दूरी बनाए हुए हैं, लेकिन इन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से एक-दूसरे पर निशाना साधना जारी रखा है.

हालांकि यह तय है कि बिहार में इस साल के अंत में होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारी रूक सी गई है. ये नेता अब ना तो अपनी ‘सियासी यात्रा’ को फिर से शुरू कर पा रहे हैं और न ही लोगों से मिल ही पा रहे हैं. ऐसे में जनता के बीच खुद को सबसे बड़ा शुभचिंतक बनाए रखने का एकमात्र साधन सोशल मीडिया ही है. यही कारण है कि कोई भी दल इस लॉकडाउन में फेसबुक और ट्विटर पर पिछड़ना नहीं चाह रहा है.

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राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव तथा उनके भाई पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव ट्विटर पर इन दिनों काफी सक्रिय हैं. तेजस्वी जहां ट्वीट कर केंद्र और राज्य सरकार पर लगातार निशाना साध रहे हैं वहीं कई मामलों में सरकार के साथ भी खड़े भी नजर आ रहे हैं.

तेजस्वी सुबह से ट्विटर पर सक्रिय हो जाते हैं. इधर, तेजप्रताप भी अपने अंदाज पर सरकार पर निशाना साध रहे हैं. आरजेडी के अध्यक्ष लालू प्रसाद भले ही चारा घोटाले के कई मामले में सजा काट रहे हैं, लेकिन उनके ट्विटर हैंडल से भी ट्वीट के माध्यम से सरकार को उसकी कमियां गिनाई जा रही हैं.

इधर, भाजपा के नेता भी डिजिटली अपना काम कर रहे हैं. सत्ता में होने के कारण पार्टी के कार्यकर्ता कोरोना में फंसे लोगों को राहत पहुंचा रहे हैं. खुद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल एक-दो दिन बीच लगा कर ऑडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यकर्ताओं को आवश्यक निर्देश दे रहे हैं.

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उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी भी पार्टी कार्यकर्ताओं को निर्देश दे रहे हैं. केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ट्विटर व फेसबुक पर सरकार की ओर से दी जा रही सुविधाओं की जानकारी साझा कर रहे हैं. पार्टी के सभी नेता लोगों के लिए किए जा रहे सहायता सेवा को सोशल मीडिया पर अपडेट कर रहे हैं.

इस बीच सुशील मोदी विपक्षी दलों के सियासी हमलों का जवाब देने से भी नहीं चुकते हैं. मोदी पूरे दिन में दो से तीन ट्वीट जरूर कर रहे हैं.

वहीं कांग्रेस भी अब डिजिटल माध्यमों पर जोर दे रही है. वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए बिहार के राज्यस्तर से लेकर जिला स्तर के कांग्रेसी सीधे नई दिल्ली के कांग्रेस दफ्तर से जुड़े हैं.

कोरोना के संक्रमण से बचाव का एकमात्र साधन सोशल डिस्टेंसिंग बताया जा रहा है. इस स्थिति में राजनीतिक दलों के नेताओं के सामने जनता तक पहुंचने के साधन भी सिमट गए हैं.

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