कोरोना: भारत में संक्रमित मरीजों की संख्या 900 पार, कोरोना वायरस ने पकड़ी स्पीड, 13 दिन में ही सामने आए 1000 केस , 88 ठीक हुए, 24 लोगों की मौत

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भारत में कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है. देश में कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या बढ़कर 900 के पार चली गई है. अब तक इस वायरस से 24 लोगों की जान गई है. वहीं, महाराष्ट्र और केरल में तेजी से मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है.

देश में 15 मार्च तक करीब 100 मामले सामने आए थे, लेकिन इसके बाद कोरोना ने स्पीड पकड़नी शुरू कर दी और उसका ग्राफ हर गुजरते दिन के साथ बढ़ता गया. सरकार भी कोरोना की तेज गति का एहसास हो गया, जिसके मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एक दिन के जनता कर्फ्यू का आह्वान किया. 22 मार्च को देशवासियों ने घर में रहकर पीएम की अपील को सफल भी बनाया, लेकिन इतना नाकाफी रहा.

पीएम मोदी ने 24 मार्च की रात 8 बजे देश को संबोधित किया और पूरे देश में 21 दिनों के संपूर्ण लॉकडाउन का ऐलान कर दिया. देश में लॉकडाउन तो हो गया लेकिन इस बीच कोरोना मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ती रही. 15 मार्च तक कोरोना मरीजों का जो आंकड़ा 100 के आसपास घूम रहा था वो अगले 13 दिन में ही बढ़कर 900 के पार पहुंच गया. यानी कोरोना वायरस के अचानक तेजी पकड़ने की जो चिंता व्यक्त की गई थी, वो आंकड़ों में हर गुजरते दिन के साथ नजर भी आ रही है.

बात अगर राज्यों के अनुसार करें तो अबतक आंध्र प्रदेश से 14, बिहार से 9, चंडीगढ़ से 8, छत्तीसगढ़ से 6, दिल्ली से 39, गोवा से 3, गुजरात से 45, हरियाणा से 23, हिमाचल प्रदेश से 3, जम्मू-कश्मीर से 20, कर्नाटक से 55, केरल से 168, लद्दाख से 13, मध्य प्रदेश से 30, महाराष्ट्र से 180, पंजाब से 38, राजस्थान से 54, तमिलनाडु से 40, तेलंगाना से 56, उत्तराखंड से 5, उत्तर प्रदेश से 55 और पश्चिम बंगाल से 15 मामले सामने आए हैं।

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मजदूरों का पलायन बड़ी चुनौती

लॉकडाउन के बाद देशभर में मजदूरों का अपने-अपने घर के लिए पलायन एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है. दिल्ली एनसीआर का हाल बुरा है, जहां मजदूर, रिक्शाचालक और फैक्ट्री कर्मचारी अपने-अपने गांव की ओर लौटने के लिए हजारों की तादाद में निकल पड़े हैं. लेकिन सिर्फ दिल्ली-एनसीआर ही नहीं बल्कि देश के दूसरे छोटे-बड़े शहरों से भी लोगों का पलायन यूं ही जारी है.

मजदूरों का पलायन रोके राज्य सरकारः अमित शाह

लॉकडाउन के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात की और प्रवासी मजदूरों के पलायन को रोकने को कहा. साथ ही बेघरों, मजदूरों के रहने का इंतजाम करने, भोजन, दवा और कपड़ा मुहैया कराने को भी कहा गया है.

सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दाखिल

लॉकडाउन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाने का सिलसिला भी शुरू हो गया है. शनिवार को लॉकडाउन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दाखिल की गई. इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट से लॉकडाउन के दौरान जनता के आने-जाने के लिए गाइडलाइन या दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है. याचिका में कहा गया कि सरकार द्वारा जरूरी सामान खरीदने और इमरजेंसी सेवाओं के लिए बाहर निकलने की छूट दी गई है, लेकिन इसके बावजूद विभिन्न राज्यों की पुलिस सड़कों पर पाए जाने वाले लोगों पर लाठीचार्ज कर रही है.

सरकार ने शनिवार को उन आरोपों को सिरे से खारिज किया कि 21 दिनों के देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा बिना पूर्व योजना बनाये की और कहा कि कोविड-19 को लेकर भारत की प्रतिक्रिया एहतियात बरतने वाली, गंभीर और क्रमवार कदम उठाने की रही है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि सरकार विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा कोविड-19 को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित करने से काफी पहले ही व्यापक प्रतिक्रिया प्रणाली लागू कर चुकी है।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अंतरराष्ट्रीय चिंताओं के मद्देनजर 30 जनवरी को कोरोना वायरस को सार्वजनिक स्वस्थ्य आपात स्थिति घोषित किया था । इसमें कहा गया है कि संकट के मद्देनजर त्वरित प्रक्रिया के क्रम में शुरुआत से ही लोगों की जांच करना, अलग रखना और निगरानी की व्यापक और मजबूत व्यवस्था को लागू कर दिया था। इसके दायरे में कारोबार या पर्यटन के बाद लौटे भारतीय, छात्रों के साथ ही विदेशी नागरिक भी रखे गए।

गौरतलब है कि सरकार की इस बात को लेकर कुछ वर्गो द्वारा आलोचना की जा रही है कि उसने लॉकडाउन की घोषण बिना योजना बनाए की । यह आलोचना इन खबरों के बीच हो रही है कि देश के कई क्षेत्रों में प्रवासी मजदूर बिना संसाधन के फंसे हुए हैं । बयान में कहा गया है, ‘‘चीन और हॉन्ग कॉन्ग से आने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग 18 जनवरी से शुरू कर दी गई थी। हालांकि भारत में इसके कई दिन बाद 30 जनवरी, 2020 को कोरोना वायरस का पहला मामला सामने आया था।’’ मंत्रालय ने कहा, ‘‘कोविड-19 को लेकर भारत की प्रतिक्रिया एहतियात बरतने वाली, गंभीर और क्रमवार कदम उठाने की रही है।’’

बयान में इटली और स्पेन का उदाहरण देते हुए कहा गया कि इन देशों में पहला मामला सामने आने के क्रमशः 25 दिन और 39 दिनों के बाद यात्रियों की जांच शुरू की थी। जबकि भारत सरकार ने अनेकों सक्रिय कदम उठाये । मंत्रालय ने इस संबंध में सरकार की ओर से उठाये गए कदमों का सिलसिलेवार ब्यौरा भी दिया। सूचना प्रसारण मंत्रालय ने उन आरोपों को भी खारिज कर दिया कि संपन्न भारतीयों’ को बिना जांच के लिए वापस लौटने की अनुमति दी गई।

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सरकार ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के मद्देनजर त्वरित प्रक्रिया के क्रम में शुरुआत से ही जांच करने, अलग रखने और निगरानी की व्यापक और मजबूत व्यवस्था को लागू कर दिया गया था। इसके दायरे में कारोबार या पर्यटन के बाद लौटे भारतीय, छात्रों के साथ ही विदेशी नागरिक भी रखे गए। बयान में कहा गया है कि 30 हवाई अड्डों, 12 बड़े और छोटे बंदरगाहों और सीमा क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों की जांच शुरू की गई। 36 लाख से ज्यादा यात्रियों की जांच की गई। सरकार ने बताया कि राज्य सरकारों को नियमित रूप से निगरानी बनाए रखने या उसमें और सुधार करने के लिए अनुरोध किए गए, जिससे सुरक्षा घेरा पूर्ण हो जाए और इसमें कोई भी खामी नहीं रहे।

इसमें कहा गया है कि, ‘‘ एक सतर्क प्रणाली के लागू होने से राज्य ऐसे लोगों पर नजर रखने में सक्षम हुए, जिन्होंने निगरानी से बचने की कोशिश की या जिन्होंने क्वारंटाइन के निर्देशों का पालन नहीं किया।’’ सरकार की ओर से उठाये गए कदमों का ब्यौरा देते हुए मंत्रालय ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ सचिव ने राज्य सरकारों के साथ लगभग 20 वीडिया कॉन्फ्रेंस कीं और कैबिनेट सचिव ने राज्यों के प्रमुख सचिवों के साथ 6 समीक्षा बैठक कीं और कोराना की समस्या से निपटने की तैयारियों का जायजा लिया। इन वीडिया कॉन्फ्रेंस के दौरान विचार विमर्श के मुद्दों में एकीकृत रोगी निगरानी प्रणाली भी एक रहा। इस प्रणाली में अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की निगरानी भी शामिल है।

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