पर्यावरण की सुरक्षा के साथ–साथ कृषि और औद्योगिक विकास के लिए जल की पर्याप्त उपलब्धता जरूरी है : मंत्री

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जल संसाधन विभाग के मंत्री संजय कुमार झा ने विधान परिषद में कहा कि फल्गू नदी में अब दो फीट ऊपर पानी हमेशा रहेगा। इसके लिए राज्य सरकार पूरी व्यवस्था कर रही है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा के साथ–साथ कृषि और औद्योगिक विकास के लिए भी जल की पर्याप्त उपलब्धता जरूरी है। श्री झा विधान परिषद में वर्ष २०२०–२१ के जल संसाधन विभाग के बजट पर सदन में हुई चर्चा का जवाब दे रहे थे। ॥ उन्होंने कहा कि बिहार के संदर्भ में जल के दूरदर्शितापूर्ण प्रबंधन‚ संरक्षण तथा सदुपयोग की महत्ता और भी बढ़ जाती है। ऐसा इसलिए कि असामान्य वर्षा एवं जलवायु परिवर्तन के चलते हर साल राज्य के किसी हिस्से को भीषण बाढ़‚ तो किसी हिस्से को सुखाड़़ की त्रासदी झेलनी पड़़ती है। वर्ष २००१ में प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता १५९४ क्यूबिक मीटर थी‚ जो घटकर वर्ष २०२५ में १००६ क्यूबिक मीटर और वर्ष २०५० में ६३५ मीटर रह जाएगी। श्री झा ने कहा कि वर्ष २००५–०६ में नीतीश कुमार के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद से राज्य में जल संसाधन तथा सिंचाई से जुड़़ी योजनाओं को काफी अहमियत मिली है। ॥ पिछले १५ वर्षों में यानी २००५–०६ से २०१९–२० तक विभाग का कुल योजनागत व्यय २२०५५.५८ करोड़़ रुपये रहा है। जबकि‚ इससे पहले के १५ वर्षों में यानी कि १९९०–९१ से २००५–०६ तक विभाग का कुल योजनागत व्यय सिर्फ ३४१५.२८ करोड़़ रुपया रहा था। इस तरह नीतीश कुमार के १५ वर्षों के शासन में विभाग के लिए पहले से ७ गुणा राशि खर्च हुई है। २००५–०६ से २०१९–२० तक के पंद्रह वर्षों में ४.०६ लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता का सृजन किया जा चुका है। चर्चा में प्रेमचन्द्र मिश्रा‚ सुबोध कुमार‚खालिद अनवर‚ रजनीश कुमार व दिलीप जायसवाल समेत कई सदस्यों ने भाग लिया। श्री झा ने कहा कि जल संकट से जूझ रहे राजगीर‚ गया और बोधगया के प्रत्येक व्यक्ति को सालोभर हर दिन १३५ लीटर गंगाजल उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की है। उन्होंने विधान परिषद में वित्त वर्ष २०२०–२१ के लिए जल संसाधन विभाग की बजटीय मांग पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि जल अभाव से जूझ रहे इन इलाकों में लगभग नौ लाख की आबादी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए गंगाजल की उपलब्धता का आकलन किया गया है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के तहत वर्ष २०५१ तक आबादी के १३ लाख पर पहुंचने के आकलन को भी ध्यान रखा गया है ताकि भविष्य में लोगों को कोई परेशानी न हो।
मंत्री ने कहा कि घोसवरी‚ सरमेरा‚ बिहारशरीफ के न्यू बाईपास‚ गिरियक और मानपुर होकर १४८.६ किलोमीटर में गया तक गंगाजल को पहुंचाया जायेगा। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान अधिशेष गंगाजल को घोड़़ाकटोरा झील‚ पंचाने नदी और तेतर पंचायत में प्रस्तावित जलाशय में एकत्र किया जायेगा। राजगीर‚ गया और बोधगया के प्रत्येक व्यक्ति को सालोभर हर दिन उपलब्ध कराया जायेगा १३५ लीटर गंगाजल

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