भाजपा एनआरआई मंच की ओर से आयोजित प्रथम ‘अप्रवासी बिहारी सम्मेलन’ में जुटे दिग्गज नेता

0
38

भाजपा एनआरआई मंच की ओर से ज्ञानभवन में आयोजित प्रथम ‘अप्रवासी बिहारी सम्मेलन’ को सम्बोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि दो जून की रोटी के लिए नहीं‚ मगर ज्यादा पैसे कमाने के लिए प्रदेश और देश से बाहर जाना पलायन नहीं और न ही इसमें कोई बुराई है। २०१८–१९ में बिहार से ३ लाख पासपोर्ट निर्गत हुए जिनमें सर्वाधिक सीवान से ४१‚७०० (१३ प्रतिशत)‚ गोपालगंज से ३४‚२०० (११ प्रतिशत) और औरंगाबाद से २५‚४०० (८ प्रतिशत) था।
श्री मोदी ने केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह‚ केन्द्रीय राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे‚ प्रदेश अध्यक्ष ड़ॉ. संजय जायसवाल‚ स्वास्थ्य विभाग के मंत्री मंगल पाण्डे़य‚ प्रदेश भाजपा के संगठन मंत्री नागेन्द्र जी की मौजूदगी में कहा कि बडी संख्या में पंजाब‚ गुजरात आदि विकसित राज्यों से भी लोग बेहतर कमाई के लिए इंग्लैंड‚ अमेरिका‚ कनाड़ा व अन्य देशों में जाते हैं। ग्लोबल माइग्रेशन के आंकडे के अनुसार दुनिया के दूसरे मुल्कों में काम करने वालों में प्रथम स्थान पर १.७५ करोड भारतीय‚ दूसरे स्थान पर १.१८ करोड मैक्सिकन व तीसरे स्थान पर १.७ करोड चीनी लोग हैं। आरबीआई सव के अनुसार २०१८ में अप्रवासी भारतीयों द्वारा ७८.६ बिलियन डॉलर देश में विदेशों से आया। २०१६–१७ में केरल की अर्थव्यवस्था में १९ प्रतिशत और महाराष्ट्र में १७ और बिहार में १.३ प्रतिशत राशि अप्रवासियों ने भेजी थी। बतौर मुख्य अतिथि सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि श्रीकृष्ण बाबू के १९६१ में निधन के बाद ४० वर्षों तक बिहार का विकास बाधित रहा। राजद के १५ वर्षों के कार्यकाल में बिहार की औसत विकास दर ५ प्रतिशत के करीब थी वहीं एनड़ीए सरकार के १५ वर्षों में १० प्रतिशत से ज्यादा है। विगत ३ वर्षों में विकास दर में बिहार का स्थान देश के प्रथम तीन राज्यों में है। आज पहचान छुपाने की नहीं बल्कि बिहारी कहने में गर्व महसूस होता है। देश–दुनिया से आए अप्रवासी बिहारी राज्य के विकास में अपना योगदान दें। अपने–अपने गांव में अपने पुरखों के नाम पर स्कूल‚ अस्पताल के लिए जमीन दान दें। बिहार सरकार द्वारा गठित ‘बिहार फाउंडेशन’ जो दुनिया के अधिकांश देशों में कार्यरत है‚ उससे जुडें व वेबसाइट पर ऑनलाइन निबंधन कराएं।
प्रदेश भाजपा के एनआरआई संयोजक अनिल दत्त शर्मा और सुजीत झा की इस कार्यक्रम के आयोजन में प्रमुख भूमिका रही। अप्रवासी बिहारियों ने नये भारत का नया बिहार बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में उपस्थित केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि विदेश का पैसा देश में आने वाले राज्यों में बिहार पांचवें स्थान पर शामिल है। उन्होंने बताया कि बिहार के सबसे ज्यादा पत्रकार‚ चिकित्सक और इंजीनयर देश–विदेश में अपनी सेवा दे रहे हैं। साथ ही‚ उन्होंने बिहार सरकार से एक फोन डायरी बनाकर बिहार से बाहर रह रहे अप्रवासी बिहारियों को संपर्क कर निरंतर बिहार की उपलब्धियों पर जानकारी देने की अपील की।
वहीं‚ अपने संबोधन में केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे ने कहा कि हमें अपने बिहारीपन के संकोच को छोडना होगा। उन्होंने कहा कि नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालय हमारे बिहार की ही देन हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा रामायण केंद्र की भी स्थापना देश के विभिन्न राज्यों में की जा रही है। सम्मेलन में आये अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रदेश संयोजक अनिल दत्त सिंह ने लोगों को बिहार की सभ्यता और संस्कृति से परिचित करवाया। कार्यक्रम के मध्य में शिक्षा‚ पर्यटन‚ कृषि और खाद्य प्रसंस्करण विषय पर अतिथियों द्वारा पैनल डिस्कशन किया गया जिसमें बिहार सरकार के श्रम संसाधन मंत्री विजय सिन्हा‚ विधायक संजीव चौरसिया‚ सहकारिता मंत्री राणा रणधीर सिंह और सांसद गोपाल जी ठाकुर क्रमशः बतौर पैनलिस्ट शामिल हुए।
विदित हो कि बिहार में निवेश और रोजगार को बढावा देने के उद्ेश्य से ४५ देशों व देश के विभिन्न हिस्सों से आये करीब ५०० लोगों ने इस सम्मेलन में हिस्सा लिया।

यह भी पढ़े  राज्यसभा में भी पास हुआ UAPA संशोधन बिल , पक्ष में 147 और विरोध में वोट पड़े 42

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here