Budget 2020: कल आम बजट पेश करेंगी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण शनिवार को संसद में बजट पेश करेंगी। फाइनेंशियल ईयर 2015-16 के बाद यह पहला मौका होगा, जब आम बजट शनिवार के दिन पेश किया जाएगा।
पहले बजट फरवरी के आखिरी सप्ताह में पेश किया जाता था। बजट की तारीख को पहले करने को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार का तर्क था कि इससे पूरी प्रक्रिया 31 मार्च तक समाप्त हो सकेगी और 1 अप्रैल से यानी नए वित्त वर्ष से बजट का उपयोग शुरू किया जा सकेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को ठीक 11 बजे संसद में अपना बजट भाषण शुरू करेंगी।

पीएम नरेंद्र मोदी सरकार अपने पहले कार्यकाल से ही बजट को लेकर कई परंपराएं तोड़ती आ रही हैं. अब बतौर प्रधानमंत्री दूसरे कार्यकाल के पहले बजट में मोदी सरकार 2.0 ने एक और परंपरा को तिलांजलि दी थी. यह परंपरा थी ब्रीफकेस में बजट पेश करने की. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वित्त मंत्रालय के बाहर बजाय ब्रीफकेस के लाल कपड़े में लिपटे बजट के साथ हाजिर हुई थीं. इस तरह ब्रितानी हुकूमत की याद दिलाती एक और रीति मोदी सरकार ने त्याग दी. वित्त मंत्री ने अपनी भाषण में इसे ‘देश का बहीखाता’ का नाम दिया था. अब देखना है कि इस बार यानी 2020 के बजट को नाम को क्या नाम दिया जाएगा.

यूनियन बजट का नाम भी इस बार बदल गया है. सरकार का मानना है कि यह पाश्चात्य संस्कृति से बाहर आकर देश की पुरानी परंपराओं से जुड़ने का शुरुआत है. बैग का लाल रंग भारतीय परंपराओं के हिसाब से शगुन का प्रतीक है. लंबे अर्से से वित्त मंत्री ब्रीफकेस में ही बजट पेश करते आ रहे थे. सदन के बाहर ब्रीफकेस दिखाते हुए फोटो सेशन बजट प्रस्तुत करने के दिन की एक अलिखित परंपरा सी हो गई थी. लेकिन बतौर वित्त मंत्री अपना पहला बजट पेश करने जा रही निर्मला सीतारमण ‘बही-खाते’ के अंदाज में लाल कपड़े में बजट कॉपी लेकर सामने आई थीं. इसके पहले मोदी सरकार ने ही रेल बजट और आम बजट को एक साथ प्रस्तुत करने की परंपरा डाली थी. साथ ही शाम के बजाय सुबह बजट पेश करने की परंपरा का आगाज हुआ था.

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वित्‍त मंत्री के रूप में दूसरी बार निर्मला सीतारमण बजट पेश करने जा रही हैं. ऐसा करने वाली वो देश की दूसरी महिला होंगी. इससे पहले प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री इंदिरा गांधी भी बजट पेश कर चुकी हैं. उन्होंने 49 साल पहले 1970 में 28 फरवरी को बजट पेश किया था और बजट पेश करने वाली देश की पहली महिला बनी थीं. इसके बाद किसी महिला को दोबारा बजट पेश करने का मौका काफी सालों बाद मिल रहा है.

पिछली बार लोकसभा में बजट पेश करने के बाद प्रेस कांफ्रेंस में निर्मला सीतारमण ने कहा था कि 10 साल की दृष्‍टि के साथ बजट को पेश किया गया है. उन्‍होंने कहा था कि स्टार्टअप को कर लाभ का एक पूरा सेट दिया जा रहा है. अर्थव्यवस्था के समग्र विकास पर स्‍पष्‍ट फोकस था. हमने ग्रामीण पहलुओं को देखा, जो सभी ग्रामीण क्षेत्रों को निश्चित गति प्रदान करेंगे. इसी तरह हमने शहरी जीवन और बेहतर करने के उपायों के बारे में सोचा.

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बजट सत्र दो चरणों में आयोजित हो रहा है। पहले राउंड में 31 जनवरी से 11 फरवरी तक बजट सत्र होगा और फिर 2 मार्च से 3 अप्रैल तक बजट का दूसरा राउंड चलेगा।

बीते साल की शुरुआत तक दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक भारत की इकॉनमी इन दिनों सुस्ती की मार झेल रही है। मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 4.5 पर्सेंट से भी कम रही। ऐसी स्थिति में सरकार पर एक तरफ आम लोगों के लिए राहत वाला बजट पेश करने की चुनौती है तो दूसरी तरफ देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देना भी अजेंडे में होगा।

बजट 2020 से जुड़ी खास बाते
– बजट 2020 को लेकर लोग ये जरूर जानना चाहतें हैं कि इस बार वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के पिटारे से क्या निकलने वाला है। टैक्स को लेकर राहत भरी खबर आने की उम्मीद कम ही है।
– बजट 2020 ऐसे समय में आ रहा है जब अर्थव्यवस्था कमजोर स्थिति में है। कई क्षेत्रों में कमजोरी के बीच नौकरियों का नुकसान हुआ है। सरकार रोजगार को लेकर व्यापक रूपरेखा प्रस्तुत कर सकती है।
– मोदी सरकार ने 2024 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य रखा है। ऐसे में अर्थव्यवस्था को गति देना आसान नहीं होगा। अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए सरकार को कई तरह की चुनौतियों से निपटना होगा।
– केंद्र सरकार का बजट घाटा चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 3.8 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। आने वाले समय में सरकार के सामने लक्ष्यों की पूर्ती करना चुनौती भरा हो सकता है।
– 30 सितंबर को खत्म हुई तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि 6 साल के निचले स्तर 4.5 प्रतिशत तक पहुंच गई। कई अर्थशास्त्रियों और वित्तीय संस्थानों ने इसके लिए खराब मांग और खपत में गिरावट को जिम्मेदार बताया।
– मोदी सरकार ने हाल ही में कॉरपोरेट टैक्स में बड़ी कटौती का एलान किया था। साथ ही अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए बुनियादी ढांचे में 102 लाख करोड़ रुपए की परियोजना की घोषणा की थी।
– सांख्यिकी मंत्रालय ने इस हफ्ते राष्ट्रीय आय का पहला अग्रिम अनुमान जारी किया था। भारत की प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। सरकार के लिए इसे बरकरार रखना भी किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
– मोदी सरकार को उम्मीद है कि 2020 की पहली तिमाही तक देश की जीडीपी 5 फीसदी से ज्यादा का लक्ष्य हासिल कर लेगी। अगर ऐसा होता है तो यह 11 वर्षों में विकास की सबसे धीमी गति को चिह्नित करेगा।

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