जननायक कर्पूरी ठाकुर की जयंती कल: सभी दल मनायेंगे कर्पूरी की जयंती

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कल 24 जनवरी को जननायक कर्पूरी ठाकुर की 96 वीं जयंती है. इसको लेकर सूबे में जोर-शोर से तैयारी की जा रही है.  कर्पूरी ठाकुर की जयंती समारोह में शिरकत करने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार  शुक्रवार को समस्तीपुर जायेगे . वही चुनावी साल में अतिपिछड़े वोटरों को लुभाने को इस बार राजनीतिक दलों में जननायक कर्पूरी ठाकुर की जयंती मनाने की होड़ है.  शुक्रवार को  उनकी जयंती पर सभी दलों ने बड़ा राजनीतिक जलसा आयोजित किया है.
सीएम बुधवार को कर्पूरी ठाकुर के पैतृक गांव पिताउंझिया स्थित स्मृति भवन में आयोजित सर्व धर्म सभा में शामिल होंगे. उसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गोखुल कर्पूरी फुलेश्वरी महाविद्यालय करपुरीग्राम स्थित त्रिमूर्ति भवन में जननायक कर्पूरी ठाकुर के मूर्ति पर माल्यार्पण करेंगे. वहीं, मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर जिला प्रशासन की तरफ से तैयारी आखिरी चरण में है. इसके साथ ही सीएम के कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम भी किए गए हैं.

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जदयू जहां पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में बड़ा कार्यक्रम करेगा. वहीं, भाजपा अपने प्रदेश मुख्यालय में इसे मनाने की तैयारी में है.  दूसरी तरफ, राजद ने प्रदेश मुख्यालय में कार्यक्रम का निर्णय लिया है, तो हम इसका आयोजन आइएमए सभागार में करेगी. बिहार में कर्पूरी ठाकुर की पहचान अतिपिछड़ों के बड़े नेता के रूप में रही है.

यहां छोटी-छोटी आबादी वाली विभिन्न जातियों के समूह अतिपिछड़ों में करीब 105 जातियां शामिल हैं. मतदाताओं के लिहाज से इनकी हिस्सेदारी करीब 35 फीसदी है.पिछले तीन चुनावों 2010 व 2015 के विधानसभा और साल 2019 के लोकसभा चुनाव में अतिपिछड़ों ने वोट की ताकत दिखायी. इसी ताकत के फायदे के लिए सभी राजनीतिक दल अतिपिछड़ा समुदाय को लुभाना चाहते हैं.

माने जाते थे. 1995 के बाद के दिनों में राजद से अतिपिछड़े  अलग होते गये और उनका झुकाव समाजवादी परिवेश वाले जदयू की ओर होने लगा छोटे-छोटे समूहों में  बंटी इन जातियों ने बाद के चुनावों में भी अपनी ताकत दिखायी.  जदयू को अतिपिछड़ों का समर्थन बहुतायत में होने  की वजह से ही प्रदेश में सरकार बनने की बड़ी भूमिका निभायी . अतिपिछड़ों को लुभाने की भाजपा ने भी रणनीति बदली है. अब पार्टी के राज्य संगठन में अतिपिछड़ों की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है.

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कई जातियों  के समूह में अतिपिछड़ों में करीब 105 जातियां शामिल हैं

राज्य में 2015 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन ने 243 सीटों में 26 सीटों पर अतिपिछड़ी जाति के उम्मीदवारों उतारा था. उस समय में महागठबंधन में जदयू, राजद और कांग्रेस शामिल थे. वहीं, एनडीए ने 19 सीटों पर अतिपिछड़ों को टिकट दिया था. उस समय एनडीए में भाजपा, लोजपा, हम व रालोसपा शामिल थे. दोनों गठबंधनों में अतिपिछड़ा उम्मीदवारों की जीत का प्रतिशत अधिक रहा.

चुनावों में अतिपिछड़ों ने निभायी महत्वपूर्ण भूमिका

पिछले चुनावों में अतिपिछड़ों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है. इनके ज्यादातर उम्मीदवारों को जीत हासिल हुई. 2010 के विधानसभा चुनाव में पिछले चुनावों से अधिक अतिपिछड़े जीते थे. जदयू-भाजपा गठबंधन को 200 से अधिक सीटें मिली थी़ं   इनमें 17 अतिपिछड़ा शामिल थे. इनमें भाजपा के सात और जदयू के 10 विधायक थे़  वहीं, राजद को कुल 22 सीटों पर जीत हासिल हुई थी.

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