CAA पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, 4 हफ्ते बाद होगी अब सुनवाई

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सुप्रीम कोर्ट में आज नागरिकता संशोधन कानून (CAA) से जुड़ी 143 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबड़े ने सीएए का मामला 5 जजों की बैंच को सौंपने का फैसला लिया है। इसके साथ ही केंद्र को 4 हफ्ते के भीतर जवाब देने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि वह फिलहाल सीएए पर रोक नहीं लगा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक केंद्र की दलीलें न सुन ली जाएं, तब तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि 99 फीसदी याचिकाएं मिलने के बाद ही इस मामले पर सुनवाई की जा सकती है।

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने CAA पर कुल 144 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ये फैसला सुनाया. इस मसले पर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत में बुधवार को क्या हुआ, पूरी सुनवाई समझें…

1. सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता संशोधन एक्ट के मसले को संविधान पीठ के हवाले करने के संकेत दिए हैं. अब चार हफ्ते के बाद इस मसले पर सुनवाई होगी, जिसमें पीठ का गठन किया जाएगा. चीफ जस्टिस एस. ए. बोबडे, जस्टिस अब्दुल नज़ीर और जस्टिस संजीव खन्ना ने बुधवार को इस मसले को सुना.

2. सर्वोच्च अदालत की ओर से असम, पूर्वोत्तर और उत्तर प्रदेश से जुड़ी याचिकाओं के लिए अलग कैटेगरी बना दी है. अदालत में विकास सिंह, इंदिरा जयसिंह की ओर से अपील की गई कि असम का मसला पूरी तरह से अलग है, ऐसे में उनको जल्द से जल्द सुना जाए.

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3. असम, पूर्वोत्तर, UP से जुड़े मामलों के लिए अलग पीठ बनाई जाएगी, जो सिर्फ इनसे जुड़ी याचिकाओं को सुनेगी. केंद्र सरकार को असम से जुड़ी याचिकाओं का जवाब देने के लिए 4 हफ्ते का वक्त दिया गया है.

4. वकील कपिल सिब्बल की ओर से अपील की गई थी कि इस मामले को संवैधानिक पीठ को सौंपा जाए. उत्तर प्रदेश में CAA की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, ऐसे में इस प्रक्रिया को तीन महीने के लिए टाल दिया जाए. अदालत ने ऐसा करने से इनकार कर दिया है.

5. सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी कि कोई हाई कोर्ट नागरिकता संशोधन एक्ट पर कोई सुनवाई ना करे. इसपर कोर्ट ने आदेश दिया है कि कोई भी हाई कोर्ट इस मसले पर सुनवाई नहीं करेगी.

6. वकीलों की ओर से अपील की गई थी कि कानून पर तुरंत रोक लगा दें, लेकिन चीफ जस्टिस ने कहा कि इसपर सिर्फ संवैधानिक पीठ ही फैसला ले सकती है. जो कि पांच जजों की होगी.

7. सुप्रीम कोर्ट में इस मसले पर कोई भी नई याचिका दायर की जा सकती है. केंद्र की ओर से कहा गया था कि नई याचिकाओं पर रोक लगा दी जाए.

8. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर तुरंत रोक लगाने से इनकार इसलिए किया है क्योंकि सभी याचिकाओं को सुना जाना है. अदालत ने कहा कि किसी एक याचिका को सुनकर तुरंत रोक नहीं लगाई जा सकती है.

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9. आगे इस मसले की सुनवाई की क्या प्रक्रिया होगी, इसपर चीफ जस्टिस के चेंबर में मामले को सुना जाएगा. चेंबर में होने वाली सुनवाई में एक केस के लिए एक ही वकील को मौका मिलेगा.

10. सुप्रीम कोर्ट में नागरिकता संशोधन एक्ट के खिलाफ कुल 141 याचिकाएं दायर की गई थीं. इसके अलावा एक याचिका इसके पक्ष में थी और एक याचिका केंद्र सरकार की ओर से दायर की गई थी.

इन सभी याचिकाओं में संसद से पास नए कानून को संविधान के खिलाफ बताया गया है. इनमें कहा गया है कि अनुच्छेद 14 के तहत हर व्यक्ति को कानून की नजर में समानता का मौलिक अधिकार हासिल है. सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट इसका हनन करता है. यह कानून भारत के पड़ोसी देशों से हिंदू, बौद्ध, ईसाई, पारसी, सिख, जैन जैसे समुदाय के सताए हुए लोगों को नागरिकता देने की बात करता है. लेकिन इसमें जानबूझकर मुसलमानों को शामिल नहीं किया गया है. इस तरह का भेदभाव करने की भारत का संविधान इजाजत नहीं देता. इन याचिकाओं में यह मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट तुरंत इस कानून के अमल पर रोक लगा दे.

कानून पर तुरंत रोक की मांग करते हुए इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने यूपी में 40 हज़ार गैर-मुस्लिम अप्रवासियों की पहचान किए जाने का हवाला दिया है. याचिका में कहा गया है कि इन लोगों को नागरिकता देने की तैयारी चल रही है. कोर्ट कानून की वैधता पर सुनवाई तक ऐसा किए जाने पर रोक लगाए.

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इसके अलावा कई याचिकाओं में NPR और NRC का भी मसला उठाया गया है. NRC पर पीएम और गृह मंत्री के बयानों में विरोधाभास होने की दलील देते हुए कोर्ट से सरकार से सफाई लेने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता चाहते हैं कि कोर्ट सरकार से पूछे कि NPR, NRC की तैयारी के लिए तो नहीं किया जा रहा है. याचिकाओं में सरकार को NRC लाने से रोकने की भी मांग की गई है.

नागरिकता संशोधन कानून( CAA) के विरोध में सुप्रीम कोर्ट के बाहर मंगलवार देर रात महिलाएं धरने पर बैठ गईं. महिलाओं के हाथ में CAA, एनआरसी के विरोध में पोस्टर्स भी थे. महिलाओं का प्रदर्शन बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में CAA को लेकर होनी वाली सुनवाई से ठीक पहले हुआ. प्रदर्शनकारी महिलाओं की संख्या 15 से 20 रही.  पुलिस के पूछने पर उनका कहना है कि कहीं भी प्रदर्शन करना उनका बुनियादी अधिकार है. हालांकि पुलिस के समझाने के बाद वह हट गईं. पुलिस ने एक शख्स को हिरासत में भी ले लिया.

29 जनवरी को भारत बंद

उधर, शाहीन बाग के प्रदर्शनकारी भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. प्रदर्शनकारियों ने 29 जनवरी को भारत बंद बुलाया है. दिल्ली के शाहीन बाग में एक महीने से भी ज्यादा समय से CAA के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा है. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि दुनिया की कोई भी ताकत उन्हें यहां से नहीं हटा सकती.

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