फिर प्रगाढ़ होने लगी भाजपा-जदयू की दोस्ती

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कई उतार-चढ़ाव के बाद अब भाजपा व जदयू के बीच दोस्ती प्रगाढ़ होने लगी है। खासकर नागरिक संशोधन विधेयक पर जदयू के पुरजोर समर्थन के बाद दोनों की दोस्ती प्रगाढ़ होने का पुख्ता संदेश दिया गया है।नागरिक संशोधन विधेयक पर जदयू के अंदर ही विरोधी बयान मुखर होने लगे थे। पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर, विधान पार्षद गुलाम रसूल बलियावी ने पार्टी स्टैंड से इतर बयान दिया था। किंतु विरोधी बयानों को ताक पर रखते हुए जदयू ने राज्यसभा में भी अपने सहयोगी पार्टनर भाजपा का साथ दिया। राज्यसभा में तो जदयू के वरिष्ठ नेता रामचन्द्र प्रसाद सिंह ने तो नागरिक संशोधन विधेयक पर विरोधी दलों को धो डाला। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि कैब में ऐसा कुछ नहीं है जिससे यहां के अल्पसंख्यकों का हित बाधित हो। ज्ञात हो कि जम्मू कश्मीर में 370 धारा हटाने का मामला हो या तीन तलाक का मामला, संसद में जदयू ने भाजपा का साथ नहीं दिया था, किंतु नागरिक संशोधन विधेयक का समर्थन कर जदयू ने पुरजोर साथ दिया।समझा जाता है कि 19 जनवरी को पूरे प्रदेश में आयोजित होने वाली मानव श्रृंखला भाजपा व जदयू की दोस्ती की मिसाल बनेगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में 19 तारीख को मानव श्रृंखला के जरिए एनडीए शक्ति प्रदर्शन करने वाला है। मानव श्रृंखला का मकसद गैरराजनीतिक तो है पर इससे एनडीए अपनी ताकत भी दिखाएगा।दरअसल यह तय हो गया है कि अगले चुनाव में एनडीए एकजुट रहेगा और घटक दल एक साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे। भाजपा व जदयू की दोस्ती पर मुहर लग गई है। भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व पहले ही घोषणा कर चुका है कि अगला विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार की अगुवाई में ही लड़ा जाएगा। भाजपा व जदयू की दोस्ती को देखते हुए विरोधी दलों में बेचैनी है। महागठबंधन के नेता जानते हैं कि यदि भाजपा व जदयू में दरार पैदा हो जाएगा तो उनके लिए विधानसभा का चुनाव आसान हो जाएगा। हाल में लोकसभा समेत छह सीटों के लिए हुए उपचुनाव के परिणाम ने एनडीए को सजग कर दिया है। चार सीटों पर एनडीए को हार का सामना करना पड़ा था।ध्यान रहे कि हालिया उपचुनाव के पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भाजपा व जदयू की ‘‘अटल दोस्ती’ संबंधी बयान देकर बहुत हद तक डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की थी पर देरी हो चुकी थी। हालांकि उपचुनाव के बीच अमित शाह का बयान नहीं आता तो इसका असर समस्तीपुर लोकसभा के उपचुनाव पर भी पड़ सकता था । दूसरी ओर, पटना में जलजमाव के बाद राज्य सरकार की काफी किरकिरी हुई थी। इस जलजमाव के साये में छह क्षेत्रों में उपचुनाव हुआ। उपचुनाव का रिजल्ट साबित कर रहा है कि राजधानी की समस्या का असर उपचुनाव पर भी पड़ा था। ज्ञात हो कि केन्द्र में एनडीए की सरकर बनने के बाद से ही जदयू व भाजपा के बीच कई मुद्दों को लेकर अनबन बना रहा। केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने के मामले से लेकर जलजमाव मामले पर दोनों सहयोगी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप होता रहा। भाजपा के विधान पार्षद डा. संजय पासवान ने हाल ही में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को केन्द्र की राजनीति में जाने की सलाह दे दी थी। केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने जलजमाव के लिए राज्य सरकार में शामिल जदयू व भाजपा के शीर्ष नेता पर प्रहार किया था। प्रदेश में दोनों दलों के कार्यकर्ता उधेड़बुन में नजर आ रहे थे। भाजपा व जदयू दोनों को एहसास हो गया है कि संयुक्त टीम महागठबंधन पर हर समय कहर ढायेगी। दोनों एक-दूसरे को स्वाभाविक दोस्त भी मानते हैं। साथ ही एक साथ रहने पर दोनों को फायदा है। इसलिए अगले विधानसभा चुनाव तक दोनों चूक की गुंजाइश नहीं चाहते हैं। वर्ष 2014 में जब जदयू ने अकेले चुनाव लड़ा था तो उसे मात्र दो सीटें हाथ लगी थीं, किंतु वर्ष 2019 के चुनाव में भाजपा से हाथ मिलाने पर उसे 16 सीटें मिलीं।

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