समस्याओं के समाधान का तरीका सिखाती है गीता

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PATNA ISKON MANDIR MEIN GEETA JAINTI SAMAROH

रविवार को महावीर मंदिर में पटना विविद्यालय के पूर्व संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. रामविलास चौधरी की अध्यक्षता में गीता जयंती समारोह आयोजित किया गया। समारोह का संचालन मंदिर के प्रकाशन प्रभारी पंडित भवनाथ झा ने किया। आरंभ में गीता के 11वें अध्याय का पाठ पंडित कन्हैया मिश्र ने किया। इस मौके पर आचार्य मार्कण्डेय शारदेय ने कहा कि गीता प्रत्येक मनुष्य का मार्गदर्शन करने वाली देववाणी है। यहां कर्म के आधार पर जाति का निर्धारण किया गया है न कि जन्म के आधार पर। यह प्रत्येक मानव के लिए पठनीय ग्रंथ है। अन्य सभी धर्मो के अपने-अपने धर्मग्रंथ है लेकिन गीता सबके लिए है। प्रो. रामविलास चौधरी ने कहा कि गीता में कर्म, भक्ति एवं ज्ञान इन तीनों के संबंध में कहा गया है। गीता मूल रूप से कहती है कि कोई व्यक्ति जो कुछ भी करता है, जो खाता है, जो पीता है वह मुझे अर्थात ईर को अर्पित करे। गीता सम्पूर्ण समर्पण सिखाती है। हम गीता के केवल इसी उपदेश को मान लें तो जीवन धन्य हो जाये। हम किसी फल के उद्देश्य से कोई कार्य न करें। गीता कर्म करना सिखाती है। गीता कहती है कि आपका जो भी कार्य है उसे ईर के कार्य के रूप में करें। गीता का थोड़ा-सा भी मनन-चिंतन कर लेने से हमारा जीवन उन्नति की ओर अग्रसर होता जायेगा। कार्यक्रम के संचालक पंडित भवनाथ झा ने कहा कि गीता का ज्ञान अत्यंत गंभीर है। इसके जितने भी व्याख्याकार हुए हैं, सबने अलग-अलग दिशा में अलग-अलग बातें लिखीं हैं। जिस आचार्य ने जिस दृष्टि से गीता को समझने का प्रयास किया वे उसे उसी प्रकार समझ सके। गीता की यह विशेषता है कि यदि इसकी एक भी बात हम मान लें, उसे अपने जीवन में उतार लें तो हमरा जीवन धन्य हो जायेगा। वह ऐसी गंगा के समान है जिसकी गहराई में उतरे विना भी हम किनारे बैठकर एक चुल्लू जल पीकर अपनी प्यास बुझा सकते हैं।
द पटना (एसएनबी)।बुद्ध मार्ग स्थित इस्कॉन मंदिर में गीता जयंती का भावपूर्ण आयोजन किया गया। गीता मर्मज्ञों द्वारा गीता के महत्व की अत्यंत तार्किक एवं सुलझी व्याख्या ने आत्मीयता के साथ मनन किया। इस्कॉन भक्तों द्वारा संपूर्ण गीता का सस्वर पाठ आकर्षण का केंद्र रहा। इस अवसर पर इस्कॉन पटना के अध्यक्ष श्री कृष्ण कृपा दास जी ने कहा कि प्रत्येक भारतीय चाहे वह आस्तिक हो या नास्तिक भगवदगीता का सम्मान करता है। वह जानता है कि समस्याओं का समाधान इससे प्राप्त हो सकता है। निष्ठापूर्ण गीता अध्ययन से मानवीय आवश्यकताएं भी पूर्ण हो सकती हैं। इस अवसर पर मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष एलएन पोद्दार ने कहा कि भगवान स्वयं वाराह पुराण में गीता की महिमा बताते हैं। इस मौके पर प्रवक्ता नंद गोपाल दास सहित अन्य भक्त मौजूद थे।

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