राजकीय सम्मान के साथ होगा अजीत सिंह का अंतिम संस्कार

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूर्व राज्य मंत्री अजीत कुमार सिंह उर्फ मोहन बाबू के निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा है कि अजीत कुमार सिंह अपने क्षेत्र में काफी लोकप्रिय थे और समाजसेवा में उनकी गहरी अभिरुचि थी। उनके निधन से राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है। अजीत कुमार सिंह उर्फ मोहन बाबू का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ होगा। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की चिर शान्ति तथा उनके परिजनों को दु:ख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईर से प्रार्थना की है।

राज्यपाल फागू चौहान ने पूर्व मंत्री अजीत कुमार सिंह के निधन पर गहरा शोक जताया है। राज्यपाल ने कहा कि अजीत बाबू एक निष्ठावान सामाजिक राजनीतिक व्यक्ति थे। इनके निधन से राज्य को अपूरणीय क्षति हुई है। राज्यपाल ने दिवंगत नेता की आत्मा को चिरशांति और उनके शोक संतप्त परिजनों को धैर्य धारण की क्षमता प्रदान करने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूर्व राज्यमंत्री अजीत कुमार सिंह उर्फ मोहन बाबू के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त की है। उन्हाेंने कहा कि मोहन बाबू अपने क्षेत्र में काफी लोकप्रिय थे और समाजसेवा में उनकी गहरी दिलचस्पी थी। उनके निधन से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र को अपूरणीय क्षति हुई है। उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ होगा।

1980 में सीवान के गोरेयाकोठी विधान सभा सीट से कांग्रेस की टिकट पर पहली विधायक बने थे. अजीत कुमार सिंह 1990 में जनता दल से भी गोरेयाकोठी के विधायक बने और फिर 1990 से 1995 तक सूबे के श्रम नियोजन मंत्री के पद पर भी रहे. राजनीति के बदलते समीकरण के शिकार अजीत कुमार सिंह अब प्रदेश के बजाये गवंई राजनीति करने को मजबूर हैं. ये अलग बात है कि 1995 से लेकर अब तक वे लगातार गोरेयाकोठी पंचायत से मुखिया का चुनाव जीतते आ रहे हैं.गांव की राजनीति में जीत हासिल कर मोहन बाबू जहां खुश हैं वहीं उनकी पत्नी शंकुतला सिंह भी इसे राजनीति के उतार-चढ़ाव की बात कहकर अपने पति की ख़ुशी अपनी ख़ुशी भी जताती है. दरअसल,1971 में सबसे पहले अपने गांव से पंचायत चुनाव में जीत हासिल कर राजनीतिक जीवन शुरू करने वाले अजीत कुमार सिंह उर्फ़ मोहन बाबू स्वतंत्र विचारधारा और विकास के प्रति उन्मुख रहे जिस कारण उन्हें अपने ही दलों में कोई खास जगह और सम्मान नहीं मिला.
टिकट की चाह में 1995 में राजद में भी शामिल हुए लेकिन टिकट नहीं मिलने से वापस पटना से अपने घर गोरेयाकोठी लौट आये और फिर से पंचायत का चुनाव लड़ गोरेयाकोठी पंचायत के मुखिया बन गए. अजीत कुमार सिंह ने इस बार के पंचायत चुनाव में भी 217 मतों से जीत हासिल कर गोरेयाकोठी के मुखिया पद पर अपना कब्जा बरक़रार रखा है. गौरतलब है कि बिहार की राजनीति में अपनी ही पार्टी की उपेक्षा के शिकार होने वाले अजीत कुमार सिंह पहले और इकलौते व्यक्ति नहीं है. लेकिन अपने दल से उपेक्षित होकर गवईं राजनीति में सफलता प्राप्त करने वालों में इन्होने वाकई में एक मिसाल कायम किया है.

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