मिल गया चंद्रयान-2 का विक्रम लैंडर, NASA ने ट्वीट की तस्वीर

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अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने इसरो के चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर की लैंडिंग साइट की तस्वीर ट्वीट की है। तस्वीर में नासा ने उस स्पॉट को दिखाया है जहां पर लैंडर की हार्ड लैंडिंग हुई थी। इस तस्वीर को नासा के लूनर लूनर रिकनैसैंस ऑर्बिटर के जरिए लिया गया है। तस्वीर में लैंडर के बिखरे टुकड़ों को दिखाया गया है। इसके साथ-साथ लैंडर की हार्ड लैंडिंग से चांद की मिट्टी पर इम्पैक्ट को भी दिखाया गया है। बता दें कि 6 सितंबर को इसरो ने चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण किया था लेकिन आखिरी वक्त में तकनीकी गड़बड़ी की वजह से ये कामयाब नहीं रहा था।

NASA के दावे के मुताबिक चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर का मलबा उसके क्रैश साइट से 750 मीटर दूर जाकर मिला. मलबे के तीन सबसे बड़े टुकड़े 2×2 पिक्सल के हैं. NASA ने सोमवार की रात करीब 1:30 बजे विक्रम लैंडर के इम्पैक्ट साइट की तस्वीर जारी की और बताया कि उसके ऑर्बिटर को विक्रम लैंडर के तीन टुकड़े द‍िखे हैं. (इस फोटो में द‍िखाया गया है क‍ि व‍िक्रम लैंडर के टकराने से पहले चांद की यह सतह ऐसी थी.

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नासा के मुताबिक, विक्रम लैंडर की तस्वीर एक किलोमीटर की दूरी से ली गई है. इस तस्वीर में चंद्रमा की म‍िट्टी पर प्रभाव भी देखा गया है, तस्वीर में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि चांद की सतह पर जहां विक्रम लैंडर गिरा,  वहां की मिट्टी को नुकसान भी हुआ है. भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने नासा से संपर्क साधा है और विक्रम लैंडर के इम्पैक्ट साइट की जानकारी मांगी है. जानकारी के मुताबिक, नासा इसरो को एक पूरी रिपोर्ट सौंपेगा जिसमें विक्रम लैंडर से संबंधित ज्यादा जानकारी मिल सकेगी. (इस फोटो में चांद की सतह पर व‍िक्रम लैंडर के टकराने के बाद चांद की सतह की म‍िट्टी में ड‍िस्टर्बेंस द‍िखाई दे रहा है.

इससे पहले अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने विक्रम के बारे में सूचना देने की उम्मीद जताई थी, क्योंकि उसका लूनर रिकनैसैंस ऑर्बिटर (एलआरओ) उसी स्थान के ऊपर से गुजरने वाला था, जिस स्थान पर भारतीय लैंडर विक्रम के गिरने की संभावना जताई गई थी. नासा  ने इससे पहले कहा था कि उसका एलआरओ 17 सितंबर को विक्रम की लैंडिंग साइट से गुजरा था और उस क्षेत्र की हाई रिजोल्यूशन तस्वीरें पाई थीं.

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पहले नासा के लूनर रिकनैसैंस ऑर्बिटर कैमरा (एलआरओसी) की टीम को लैंडर की स्थिति या तस्वीर नहीं मिल सकी थी. उस दौरान नासा ने कहा था क‍ि जब लैंडिंग क्षेत्र से हमारा ऑर्बिटर गुजरा तो वहां धुंधलका था और इसलिए छाया में अधिकांश भाग छिप गया. संभव है कि विक्रम लैंडर परछाई में छिपा हुआ है. एलआरओ जब अक्टूबर में वहां से गुजरेगा, तब वहां प्रकाश अनुकूल होगा और एक बार फिर लैंडर की स्थिति या तस्वीर लेने की कोशिश की जाएगी.

बीते अक्टूबर महीने की शुरुआत में विक्रम के उतरने के स्थान का नासा के अंतरिक्ष यान द्वारा उतारे गए चित्रों में लैंडर नहीं दिखाई दिया था. जिसके बाद यह कहा गया था कि नासा भी विक्रम लैंडर का पता नहीं लगा पाया. लेकिन सोमवार की रात नासा ने यह जानकारी दी कि उसे विक्रम लैंडर मिल गया है. (चांद की सतह पर उतरने से पहले व‍िक्रम लैंडर का संपर्क इस समय टूट गया था.

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भारत के भारी रॉकेट, जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लांच व्हीकल-मार्क 3 ने 22 जुलाई को 978 करोड़ रुपये लागत का एक टेक्स्ट बुक स्टाइल का चंद्रयान-2 अंतरिक्ष में लांच किया था. चंद्रयान-2 अंतरिक्ष यान में तीन हिस्से थे – ऑर्बिटर (2,379 किलोग्राम, आठ पेलोड), विक्रम लैंडर (1,471 किलोग्राम, चार पेलोड), और प्रज्ञान (27 किलोग्राम, दो पेलोड)

 

 

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