मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कल से जल-जीवन-हरियाली यात्रा पर

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर जनता के बीच जा रहे हैं। वर्ष 2005 में एनडीए सरकार बनने के बाद उन्होंने सबसे पहले न्याय यात्रा शुरू की थी। इसके बाद अबतक नीतीश कुमार 10 यात्राओं पर निकल चुके हैं। 3 दिसम्बर 2019 से पश्चिम चंपारण में शुरू होने वाली जल जीवन हरियाली यात्रा उनकी11 वीं यात्रा होगी। अपनी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री सूबे के जमीनी हालात का जायजा लेंगे। जनता की समस्याओं को सुनेंगे और चल रहीं विकास योजनाओं का आकलन भी करेंगे।प्रदेश में 8 महीने बाद विधानसभा चुनाव होना है। ऐसे में उनकी यात्रा खासा महत्व रखती है। प्रदेश की महत्वाकांक्षी जल जीवन हरियाली योजना के लिए 24500 करोड़ के बजट का प्रावधान है। यह राशि अगले तीन वर्षो में खर्च की जाएगी। मुख्यमंत्री की यात्रा का नाम भी जल जीवन हरियाली यात्रा रखा गया है। इस यात्रा से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2017 में ‘‘विकास समीक्षा यात्रा’ शुरू की थी।दरअसल अगले विधानसभा चुनाव के आलोक में राज्य सरकार के तमाम कायरे के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की यात्रा का खास महत्व है। जनता के बीच जमीन पर जाकर फिर से विकास कायरे की समीक्षा होगी। विकास कायरे से संबंधित पदाधिकारियों का मूल्यांकन होगा। काम में कोताही बरतने वालों को ऑन स्पॉट दंडित भी किया जा सकता है। पब्लिक भी सबकुछ सामने से देखेगी। गलत-सही का आकलन होगा। राज्य के तमाम विकास कायरे के बीच मुख्यमंत्री की पिछली सभी यात्राओं ने अलग पहचान बनायी है। पिछले 13-14 वर्षो में जनता के बीच जाने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद की पहल पर कोई न कोई यात्रा अवश्य शुरू की है और ये सभी यात्राएं चर्चित रही हैं। मुख्यमंत्री ने विशेष राज्य के दज्रे की मांग को लेकर अधिकार यात्रा शुरू की थी। अधिकार यात्रा से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सेवा यात्रा काफी चर्चित रही थी। सेवा यात्रा के पहले मुख्यमंत्री विकास यात्रा, न्याय यात्रा, प्रवास यात्रा, धन्यवाद यात्रा, फिर विास यात्रा व अधिकार यात्रा पर निकल चुके हैं। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि पिछली यात्राओं का नतीजा है कि नीतीश कुमार को जीत का सेहरा बंधता रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पिछली सभी यात्राओं का खास महत्व है। जमीन पर जाकर विकास कायरे का मुआयना हुआ। जनता के सामने कायरे की समीक्षा हुई। काम में कोताही बरतने वालों को ऑन स्पॉट दंडित किया गया। सूबे में चल रही योजनाओं की जमीनी हकीकत का पता चला। जमीन पर होमवर्क हुआ। सरकारी महकमे से योजनाओं के क्रियान्वयन में जहां- जहां चूक हुई है सब की रिपोर्ट आयी। खास है कि मई 2013 में शुरू सेवा यात्रा से पंचायतों के मुखिया भी सतर्क हुए थे। कई मौके पर मुखिया को जवाबदेह बनना पड़ा है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले सीएम ने सेवा यात्रा शुरू की थी। राज्य के तमाम विकास कायरे के बीच मुख्यमंत्री की सेवा यात्रा ने अलग पहचान बनायी थी। जनता के बीच जाने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद की पहल पर कोई न कोई यात्रा अवश्य शुरू की है और ये सभी यात्राएं चर्चित रही हैं। इस सेवा यात्रा से पहले मुख्यमंत्री ने विशेष राज्य के दज्रे की मांग को लेकर अधिकार यात्रा शुरू की थी। अधिकार यात्रा से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सेवा यात्रा काफी चर्चित रही थी। सेवा यात्रा के पहले मुख्यमंत्री विकास यात्रा, प्रवास यात्रा, धन्यवाद यात्रा,अधिकार यात्रा व न्याय यात्रा पर निकल चुके हैं। सेवा यात्रा दो बार हुई।
पटना। हालांकि विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री की सभी यात्राओं को निशाने पर लिया है। काफी आलोचना भी की है, किंतु यात्रा के दूरगामी परिणाम को देखते हुए विपक्षी दल के मुखिया भी सूबे की‘‘ यात्रा’ पर निकलने को बाध्य हुए थे। वर्ष 2013 में जब नीतीश कुमार ने सेवा यात्रा शुरू की तो राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने परिवर्तन यात्रा निकाली थी। उस समय कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे चौधरी महबूब अली कैसर ने पोल खोल यात्रा निकाली थी। उसी समय लोजपा मुखिया रामविलास पासवान बिहार बचाओ यात्रा पर निकले थे। उस समय पासवान की राह अलग थी। फिलहाल महबूब अली कैसर लोजपा में शामिल हैं।

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