इस वजह से महाराष्‍ट्र में लग सकता है राष्ट्रपति शासन, जानिए प्रमुख बातें…

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महाराष्‍ट्र में सरकार गठन को लेकर राजनीतिक कवायद तेज चल रही है. सियासी समीकरणों के तहत शिवसेना को समर्थन देने के मुद्दे पर आज कांग्रेस कोर ग्रुप की सुबह 10 बजे दिल्‍ली में बैठक होगी. सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस के तीन सीनियर नेता अहमद पटेल, मल्लिकार्जुन खड़गे और केके वेणुगोपाल आज मुंबई जाकर एनसीपी नेता शरद पवार से मुलाकात करेंगे और इस सरकार में कांग्रेस और एनसीपी की क्या भूमिका होगी, इस बारे में वहीं अंतिम फैसला होगा.

इससे पहले एनसीपी नेता अजीत रात ने कल देर रात कहा कि मुझे पता चला है कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शरद पवार को फोन किया था और बताया कि गवर्नर ने सरकार बनाने के लिए उनको अतिरिक्‍त समय देने से इनकार कर दिया. अब एनसीपी और कांग्रेस के नेता शिवसेना को समर्थन देने के मुद्दे पर आज बैठक करेंगे.

– एनसीपी (NCP) को आज रात 8.30 बजे का समय राज्यपाल की तरफ से दिया गया है. हो सकता है कि एनसीपी को समर्थन में कांग्रेस पार्टी आगे आए.

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-कांग्रेस पार्टी को बड़े नेता आज नेताओं से बात करने के लिए मुंबई आ रहे हैं.

-अगर एनसीपी ने सरकार बनाने के लिए जरूरी नंबर नहीं जुटाए तो हो सकता है कि राज्यपाल कांग्रेस पार्टी को भी आज ही बुला लें और सरकार बनाने के लिए कहें.

-अगर कोई पार्टी जरूरी नंबर नही जुटा पाती तो हो सकता है कि राज्यपाल राज्य मे राष्ट्रपति शासन भी लगा सकते हैं.

-फिलहाल आज का दिन राजनीतिक गहमागहमी का होगा. एनसीपी- कांग्रेस और शिवसेना की तरफ से बैठकों का दौर जारी रहेगा और उसमे कुछ नतीजे भी बाहर आ सकते हैं.

क्यों लगता है राष्ट्रपति शासन, क्या है पूरी प्रक्रिया?

महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर गतिरोध जारी है. शिवसेना मुख्यमंत्री पद को लेकर शुक्रवार को भी अड़ी रही और उसने भाजपा से राज्य की सत्ता में बने रहने के लिए ‘कार्यवाहक’ सरकार के प्रावधान का दुरुपयोग नहीं करने को कहा. आपको बता दें कि महाराष्ट्र में विधानसभा का कार्यकाल 9 नवंबर यानी कल ख़त्म हो रहा है, लेकिन अब तक सरकार बनाने के लिए किसी एक दल या गठबंधन ने दावेदारी नहीं की है. ऐसे में महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन के हालात बनते दिख रहे हैं. दरअसल, किसी भी राज्य में जब राज्यपाल को लगता है कि कोई भी पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है तो वह राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करते हैं. इसके अलावा यदि राज्य सरकार केंद्र सरकार द्वारा दिये गये संवैधानिक निर्देशों का पालन नहीं करती है तो उस हालत में भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है.

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दोनों सदनों की मंजूरी जरूरी
राष्ट्रपति शासन से जुड़े प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 356 और 365 में हैं. राष्ट्रपति शासन लगने के बाद राज्य सीधे केंद्र के नियंत्रण में आ जाता है. किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के दो महीनों के अंदर संसद के दोनों सदनों से इसका अनुमोदन किया जाना जरूरी है. किसी भी राज्य में एक बार में अधिकतम 6 महीने के लिए ही राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है. वहीं, किसी भी राज्य में अधिकतम तीन साल के लिए ही राष्ट्रपति शासन लगाने की व्यवस्था है. इसके लिए भी हर 6 महीने में दोनों सदनों से अनुमोदन जरूरी है.

बहुमत मिला तो हट सकता है राष्ट्रपति शासन
किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने के बाद अगर कोई राजनीतिक दल सरकार बनाने के लिए जरूरी सीटें हासिल कर लेता है (बहुमत प्राप्त करने की स्थिति में आ जाता है) तो राष्ट्रपति शासन हटाया भी जा सकता है. महाराष्ट्र की बात करें तो राज्य में 21 अक्टूबर को हुए चुनावों में 105 सीटें जीत कर सबसे बड़े दल के तौर पर उभरी भाजपा और 56 सीटें जीतने वाली उसकी सहयोगी पार्टी शिवसेना ने अब तक साथ-साथ या अलग-अलग, सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया है.‘महायुती’ के बैनर तले चुनाव लड़ने वाले ये दोनों दल चुनाव नतीजे आने के बाद से मुख्यमंत्री पद साझा किए जाने को लेकर उलझे हुए हैं.

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