मुबारक हो रामलला, तुम्हारी जीत हो गयी ,आपको भी तो पांच एकड़ जमीन दे दी गयी

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यह फैसले से ठीक पहले की घड़ी थी। चिंतामग राम अल्लाह से मुलाकात के लिए जा रहे थे, उनके मन में अनेकानेक विचार आ रहे थे। अल्लाह के द्वार राम के लिए हमेशा खुले रहते थे, उनकी भाषाएं भले न मिलती हों पर उनके दिल मिले थे। ओजपूर्ण, द्रुतिमान एवं धवल-दीर्घ दाढ़ीमय मुखमंडल वाले अल्लाह ने सौम्य, धीर, समित राम को अपनी ओर आते देखा तो वह उनकी ओर बढ़ आये। उन्होंने स्नेह से राम के कंधे पर हाथ रखा और पूछा, ‘‘कुछ चिंतित लग रहे हो राम, सब खैरियत तो है?’

राम ने अल्लाह को करबद्ध पण्राम किया और बोले, ‘‘आप सब जान रहे हैं, आपकी मुद्रा बता रही है कि आप भी फैसले का ही इंतजार कर रहे हैं।’ अल्लाह मुस्कुराए, उन्होंने राम को स्नेह से देखा और बोले, ‘‘मैं समझ रहा हूं। तुम भी फैसले को लेकर ही चिंतित हो। इसीलिए यहां मेरे पास आये हो।’ राम बोले, ‘‘आपके अलावा और कहां जाता? अपनी चिंताएं किसे सुनाता? आपका स्नेह पाकर मैं धन्य हो जाता हूं। आपके सौजन्य से ही आज के इस जटिल समय में स्वयं को समझा पाता हूं।

देखिए, मेरे और आपके घर का फैसला इंसान कर रहे हैं और इधर हम बेचैन टहल रहे हैं।’ अल्लाह थोड़ा मुस्कुराए, ‘‘अजीब तो लगता है मगर क्या किया जाये। वे जैसा समझते हैं वैसा हमें चलाते हैं, उनके आगे हम खुद को हमेशा मजबूर पाते हैं। न मैंने कभी किसी के मन में नफरत जगाई न तुमने किसी को नफरत का पाठ पढ़ाया है, हमने तो हमेशा प्यार और मोहब्बत का पैगाम ही इंसानों तक पहुंचाया है। मगर इंसानी फितरत का क्या किया जाये, समझ नहीं आता इसको कैसे सही रास्ते पर लाया जाये?’

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राम बोले, ‘‘आप ठीक कहते हैं बुजुर्गवार, पता नहीं फैसला क्या आएगा, पता नहीं इंसानी दिमाग इस पर क्या करतब दिखाएगा।’ अल्लाह ने फिर राम के कंधे पर हाथ रखा और बोले, ‘‘परेशान मत हो राम, सरकार ने सारी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद कर रखी हैं। दोनों पक्षों के धर्मगुरुओं और मौलानाओं ने शांति की अपीलें जारी कर रखी हैं, भरोसा रखो जो होगा अच्छा होगा, बुरे की जिम्मेदारी मैं नहीं लूंगा अगर अच्छा हुआ तो मेरी मर्जी से होगा।’ राम इस कूटवाक्य पर मुस्कुराए और बोले, ‘‘फैसले की घड़ी आ गयी है, चलिए, चलकर सुना जाये।’

दोनों साथ बैठकर फैसला सुनने लगे, फैसला सुनते हुए उनके चेहरे कभी मुरझाने तो कभी खिलने लगे। अल्लाह बोले, ‘‘देखो राम, फैसले में सब कुछ आया लेकिन हमने-तुमने इंसान को आपसी मोहब्बत के जो पाठ पढ़ाए हैं उनका कोई जिक्र तक नहीं आया। इन्होंने सारा झगड़ा जमीन तक सीमित कर दिया है। इनमें से कोई इनसे यह नहीं पूछता कि मैंने इंसानी मोहब्बत का जो सबक इन्हें सिखाया है उसका इन्होंने क्या किया है।’

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राम ने गहरी सांस ली, ‘‘यही बात मेरे भक्तों पर भी लागू होती है, मैं चाहकर भी कुछ नहीं कर सकता। मेरे नाम पर वे जमीन के लिए तो झगड़ते हैं पर मेरे आदर्श पर अमल नहीं करते हैं।’ तभी पांच न्यायाधीशों की पीठ का फैसला पूरा हुआ और फैसले के अनुसार पूरी विवादित जगह रामलला को दे दी गयी और अल्लाह के बंदों के लिए पांच एकड़ जमीन की व्यवस्था अलग से कर दी गयी।

राम ने अल्लाह की ओर देखा तो वे मुस्कुरा कर बोले, ‘‘मुबारक हो रामलला, तुम्हारी जीत हो गयी, तुम्हारे भक्तों की लड़ाई कामयाब हो गयी।’ राम ने मुस्कुरा कर उत्तर दिया, ‘‘आपको भी तो पांच एकड़ जमीन दे दी गयी है। अब आपके बंदे वहां आपका नया घर बनाएंगे, देख लीजिएगा इसे पहले से भी ज्यादा चमकाएंगे।’ इस बार अल्लाह के पुरनूर चेहरे पर मुस्कुराहट नहीं आयी। वे बोले, ‘‘मुझे नहीं मालूम कि मेरे बंदे कहां जमीन पाएंगे और उस पर क्या तामील कराएंगे। पर मैं चाहता हूं कि उनके दिलोदिमाग में शांति और सुकून रहे, उनके आसपास अमन-चैन रहे और जो इंसान है वह सच्चा इंसान बना रहे।’

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राम बोले, ‘‘चाहता तो मैं भी यही हूं पर हम क्या करें। इंसानी फितरत हमेशा अपनी पर अड़ जाती है, हमारी सारी सिखाई-पढ़ाई इसके आगे कम पड़ जाती है।’ अल्लाह बोले, ‘‘बस, हम चाहते हैं कि जो भी फैसला आया है उसका सब इस्तकबाल करें। सारे गिले-शिकवे भूलकर नये सिरे से शुरुआत करें’। राम ने फिर लंबी सांस ली और मुस्कुराते हुए बोले, ‘‘अच्छा-बुरा जो भी होगा सिर्फ आपकी मर्जी से ही होगा। अब आप मर्जी बताइए और इंसानों को मोहब्बत से साथ रहने का रास्ता दिखाइए।’

अल्लाह मुस्कुराए, बोले, ‘‘तुम ऐसा करो राम यहीं मेरे पास आ जाओ, साथ में रहेंगे, इंसानों के दिलों में प्यार-मोहब्बत कैसे जगाई जाये इस पर मिलकर विचार करेंगे।’ राम के चेहरे पर फिर मुस्कुराहट आ गयी, बोले, ‘‘आपका खयाल तो अच्छा है मगर यह सोचिए, आप अपने बंदों को कैसे समझाएंगे और मेरे भक्त भी इसे कैसे सहन कर पाएंगे? मैंने और आपने अपने साथ रहने की यह बात उन तक पहुंचाई तो वे आपस में ही लड़-मर जाएंगे और एक नया मुकदमा फिर अदालत ले जाएंगे।?’ इतना कहकर राम उठ लिये, उन्होंने अल्लाह को नमन किया अपने घर की ओर चल दिये।

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