कल रवि योग में मनेगी अक्षय नवमी

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कार्तिक शुक्ल नवमी दिन बुधवार को अक्षय नवमी या आंवला नवमी का पर्व मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस पर्व पर पूर्ण श्रद्धा और विास के साथ आंवले के वृक्ष के नीचे भोजन करने से मनचाही इच्छा पूरी होती है। इस बार अक्षय नवमी पर धनिष्ठा नक्षत्र व वृद्धि योग के साथ रवि योग का विशेष फलदायी संयोग बन रहा है। आंवला नवमी पर आंवले के वृक्ष के पूजन का विशेष महत्व होता है। साथ ही पुत्र रत्न की प्राप्ति हेतु इस नवमी पूजन का विशेष महत्व है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा-अर्चना कर दान-पुण्य करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। अन्य दिनों की तुलना में नवमी पर किया गया दान-पुण्य कई गुना अधिक लाभ दिलाता है।पंडित राकेश झा शास्त्री ने बताया कि कार्तिक शुक्ल अष्टमी तिथि दो दिन हो जाने के कारण नवमी तिथि बुधवार को है। मंगलवार अष्टमी तिथि प्रात: 06 : 38 बजे तक ही है, लेकिन उदया तिथि अष्टमी होने के कारण अक्षय नवमी का पर्व बुधवार को मनाया जाएगा। वहीं मंगलवार को नवमी तिथि प्रात:काल 08.20 बजे तक है, लेकिन उदया तिथि की मान्यता से पूरे दिन बुधवार को इसका मान रहेगा। भगवान विष्णु का होता है वासपंडित झा के मुताबिक इस दिन दान, व्रत व भगवान विष्णु के स्वरूप आंवला के वृक्ष की पूजा की जाती है। आंवले के पेड़ में कई औषधीय गुण विद्यमान हैं। इसके महत्व को देखते हुए इसकी पूजा की जाती है। आंवला को आयु और आरोग्य वर्धक माना जाता है । अक्षय नवमी से कार्तिक पूर्णिमा तक भगवान विष्णु आंवला में वास करते हैं। कार्तिक मास में वैसे तो स्नान का अपना ही महत्व होता है, लेकिन इस दिन गंगा स्नान करने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन आंवले के वृक्ष को दूध चढ़ाना फलदायी माना जाता है। इससे सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मान्यता के अनुसार त्रेता युग का आरंभ इसी दिन हुआ था। सूर्य के दोष से मिलेगी मुक्ति विष्णु पुराण में आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु और शिव का वास बताया गया है। जिनकी कुंडली में सूर्य ग्रह पीड़ित है अथवा सूर्य कमजोर या सूर्य शत्रु राशि में रहता है उन जातकों को आंवले के पेड़ के नीचे दस दिन तक भगवान विष्णु को दीपक जलाना चाहिए। इससे दोषों से मुक्ति मिलती है। मनोकामना पूर्ति के लिए आंवला की पूजा अक्षय नवमी के दिन स्नान, पूजन, तर्पण, अन्न तथा वस्त्र दान करने से हर मनोकामना पूरी होती है। अक्षय नवमी के दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करने का नियम है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आंवले का वृक्ष भगवान विष्णु को अतिप्रिय है, क्योंकि इसमें लक्ष्मी का वास होता है। इस दिन व्रत करने से शादीशुदा औरतों की मनोकामनाएं पूरी होती है। आंवला वृक्ष पूजा का शुभ मुहूर्त आंवला या अक्षय नवमी पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 06.32 बजे से दोपहर 11.55 बजे है। वहीं अभिजित मुहूर्त दोपहर 11.11 बजे से 11.55 बजे और गुली मुहूर्त सुबह 10.10 बजे से 11.33 बजे तक है। जिन दंपतियों का वैवाहिक जीवन कष्ट पूर्ण चल रहा हो, वह इस दिन प्रभु श्री कृष्ण को माखन-मिश्री का भोग लगाएं। आर्थिक संकटों और कर्ज से मुक्ति पाने के लिए भगवान विष्णु को हलवे का भोग लगाना चाहिए।अक्षय नवमी पर ऐसे करें पूजाइस दिन गुप्त दान करना बेहद शुभ माना जाता है। आंवला के पेड़ के नीचे 10 दिनों तक भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। परिक्रमा कर उसमें रक्षासूत्र बांधकर एवं दीप जलाकर मनोकामना मांगी जाती है। इसी पेड़ के नीचे बैठकर व्रती खाना भी खाती हैं। यह तिथि बहुत ही शुभ होती है। इसलिए इस दिन से कई शुभ काम शुरू किए जाते हैं। नवमी के दिन जगद्धात्री पूजा होती है। इस दिन जल में आंवले का रस मिलाकर नहाने से जातक के ईर्द-गिर्द जितनी भी नकारात्मक ऊर्जा होगी वह स्वत: नष्ट हो जाती है। सकारात्मकता ऊर्जा और पवित्रता में वृद्धि होती है ।

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