वायु प्रदूषण कम करने को लेकर मुख्यमंत्री ने की उच्चस्तरीय बैठक, 15 साल पुराने व्यावसायिक गाड़ियों पर रोक

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मुख्यमंत्री ने बिहार में पन्द्रह वर्ष से ज्यादा पुराने व्यावसायिक वाहनों एवं सरकारी वाहनों पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया है। अब सड़कों पर 15 साल पुराने व्यावसायिक एवं सरकारी वाहन नहीं चलेंगे। राज्य सरकार ने वायु प्रदूषण कम करने के लिए ऐसे वाहनों को प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही 15 वर्ष से ज्यादा पुराने निजी वाहनों की फिटनेस जांच फिर से की जाएगी। इस पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी। यह निर्देश मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए आयोजित समीक्षा बैठक में दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के ईंट-भट्ठों, खासकर पटना के आसपास के इलाकों के ईंट-भट्ठों की भी जांच करवा ली जाए कि वे प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग कर रहे हैं या नहीं। इसके लिए सख्ती बरतने की आवश्यकता है। शहर में कचरा उठाने वाली गाड़ियां कचरे को ढंककर ही डंपिंग केंद्र पर ले जाएं। इसे हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। पटना नगर निगम को शहरों की सफाई एवं अन्य जरूरी संसाधनों की कमी नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के बाहर की तकनीक के अध्ययन की जरूरत है कि कैसे शहरों में धूल कण न रहे। पुराने डीजी सेट प्रतिबंधित किए गए हैं, इस पर पूर्णत: रोक लगाने के लिए सख्त कार्रवाई की जरूरत है। इसके अलावे 5 नवम्बर से पटना की मुख्य सड़कों और कंस्ट्रक्शन स्थल पर पानी का छिड़काव सुनिश्चित किया जाए। इलेक्ट्रिक एवं सीएनजी वाहनों के प्रयोग को बढ़ावा दें। उन्होंने कहा कि पुआल जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकना है। कम्बाइंड हाव्रेस्टर के माध्यम से फसलों की कटाई करने वाले लोगों को समझाना है कि पराली न जलायें। लोगों को इसके लिए जागरूक करना है। किसानों को यह जानकारी देनी होगी जो पराली जलायेंगे, उन्हें कृषि से संबंधित सब्सिडी नहीं दी जायेगी। पुआल के आर्थिक उपयोग के लिये भी किसानों को प्रेरित करना है। किसान सलाहकार एवं कृषि से जुड़े लोगों की ट्रेनिंग करवाकर गाव-गांव किसानों को पराली से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करें। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण कम करने और फसल अवशेष को जलाने से रोकने के लिए इसे जल-जीवन-हरियाली अभियान का हिस्सा बनाना होगा। वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियों एवं उसके नुकसान के बारे में लोगों को जानकारी देनी होगी और उनके बीच में इसे प्रचारित करते रहना होगा। प्रदूषण के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए जगह-जगह पर होर्डिंग लगाने की जरूरत है। शहरों में सड़कों के किनारे भी वृक्ष लगाने के उपाय करें। पटना में अलग-अलग जगहों पर मॉनिटरिंग मशीन लगाएं ताकि प्रदूषण के कारकों का आकलन हो सके। उन्होंने कहा कि कंस्ट्रक्शन, बिल्डिंग स्ट्रक्चर को ढंकने की व्यवस्था करायें ताकि धूल कण नहीं फैले। ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए रात में दस बजे के बाद लाउड स्पीकर पर रोक तो है ही सुबह में भी इसके समय को बढ़ाये जाने की जरूरत है। शहरों में तेज आवाज में हॉर्न बजाने पर नियंतण्रकरें। पटाखे नहीं जलाने के लिए लोगों को जागरूक करें। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि निर्माण सामग्री की ढुलाई ढंककर ही हो।बैठक में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रधान सचिव दीपक कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री के समक्ष इस संबंध में एक प्रस्तुति दी। मुख्यमंत्री को बिहार के वायु प्रदूषण की स्थिति की जानकारी दी गयी, जिसमें बताया गया कि पटना, गया और मुजफरपुर को देश के 102 ननअटेनमेंट सिटी के रूप में चिह्नित किया गया है। वायु प्रदूषण के भौगोलिक एवं मानव जनित कारकों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गयी। मेजरमेंट ऑफ एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) के तहत विभिन्न कारकों की जानकारी दी गयी। वर्ष 2016 से 2019 का एवरेज एयर क्वालिटी इंडेक्स के बारे में भी बताया गया। 1 अक्टूबर से 3 नवम्बर तक के पार्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5) की भी जानकारी दी गयी। मानव जनित कारकों में वाहनों से होने वाले प्रदूषण, धूल कण, कंस्ट्रक्शन एक्टिविटिज, कूड़ों का जलना, कंस्ट्रक्शन मेटेरियल का ट्रांसपोर्टेशन जैसे अन्य कारणों पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी गयी। यह भी जानकारी दी गयी कि पटना में प्रदूषण के कारकों में 32 प्रतिशत वाहन, 7 प्रतिशत उद्योग, 4 प्रतिशत ईंट-भट्ठा, 12 प्रतिशत धूल कण, 5 प्रतिशत डीजी सेट, 7 प्रतिशत अवशेष का जलाव, 10 प्रतिशत हिटिंग, 6 प्रतिशत कुक लाइट, बाहर एरिया (बाउंड्री) से 17 प्रतिशत शामिल हैं। साथ ही मुजफ्फरपुर एवं गया के मानवजनित कारकों की भी जानकारी दी गई। प्रस्तुतीकरण में तैयार किए गए कार्ययोजना के बारे में विस्तृत रूप से बताया गया। प्रदूषण के कारणों एवं उस पर नियंतण्रके लिये जिला के स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमिटी बनायी गयी है। राज्य के स्तर पर प्रधान सचिव पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन की अध्यक्षता में मॉनिटरिंग कमिटी बनी है और मुख्य सचिव के स्तर पर राज्यस्तरीय मॉनिटरिंग कमिटी की बैठक कर इसके लिये दिशा-निर्देश दिये जाते हैं, जिसे जिला स्तर पर कार्यान्वित किया जाता है। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदूषण की समस्या पूरे देश में बढ़ रही है। खासकर वायु प्रदूषण पिछले कुछ दिनों से हमलोगों के लिये चिन्ता का विषय बना हुआ है। बिहार में भी इसकी समस्या कुछ दिखने लगी है, वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिये विशेष रूप से हम सबको मिलकर काम करना होगा। वाहनों से होने वाले प्रदूषण एक मुख्य कारण बताया जा रहा है। खासकर शहरों में ऑटो रिक्शा, सिटी बसों में किरासन तेलों के उपयोग की भी शिकायत मिल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसकी जानकारी प्राप्त कर ली जाय कि किरासन तेल का दुरूपयोग वाहन के ईधन के रूप में तो नहीं हो रहा है। बैठक में उप मुख्यमंत्री सह पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री सुशील कुमार मोदी, मुख्य सचिव दीपक कुमार, प्रधान सचिव पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन दीपक कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, बिहार स्टेट पॉलूशन बोर्ड के अध्यक्ष एके घोष, सचिव नगर विकास एवं आवास आनंद किशोर, सचिव कृषि एन सरवन कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा, सचिव परिवहन संजय कुमार अग्रवाल, अध्यक्ष बिहार राज्य पुल निर्माण निगम जीतेन्द्र श्रीवास्तव, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, सदस्य सचिव बिहार स्टेट पॉलूशन कंट्रोल बोर्ड आलोक कुमार, अपर सचिव पथ निर्माण दिवेश सेहरा, अपर सचिव मुख्यमंत्री सचिवालय  चन्द्रशेखर सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह, जिलाधिकारी  कुमार रवि, आयुक्त पटना नगर निगम अमित कुमार पाण्डेय, वरीय पुलिस अधीक्षक श्रीमती गरिमा मलिक, भारतीय मौसम विज्ञान केन्द्र के प्रतिनिधि सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।

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