पूरा देश आज आजादी का जश्न मना रहा है. स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर स्थित RSS मुख्यालय में तिरंगा फहराया. इस मौके पर उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान को याद किया और आजादी को बनाए रखने की जिम्मेदारी पर जोर दिया.
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि 1857 से लेकर आजादी मिलने तक करीब 90 सालों तक देश के लोगों ने अलग-अलग तरह से संघर्ष किया और बलिदान दिया तब जाकर यह स्वतंत्रता मिली है. उन्होंने कहा कि इतने त्याग बलिदान देकर जो स्वतंत्रता मिली है उस स्वतंत्रता को सुरक्षित और कायम रखना जरूरी है. ये हर नागरिक की जिम्मेदारी है.
‘भारत को अपने मूल विचारों और सिद्धांतों से जुड़े रहना होगा’
मोहन भागवत ने कहा कि सावरकर जी ने कहा था स्वतंत्रता के बाद जो उत्तम, महान, मधुर है वह सब कुछ हमारे देश में अवतीर्ण हो, इसकी आवश्यकता है और उसे पूर्ण करने का दायित्व भी हमारा है. उन्होंने कहा कि भारत आजाद हो चुका है और उसकी आजादी बनी रहेगी. हालांकि, देश को मजबूत, सुरक्षित और खुशहाल बनाने की जिम्मेदारी अभी पूरी नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि देश के सामने कई चुनौतियां हैं और इनका सामना करते हुए भारत को अपने मूल विचारों और सिद्धांतों से जुड़े रहना होगा.
भागवत ने समझाए तिरंगे के रंग के माएने
RSS प्रमुख ने कहा कि तिरंगे का केसरिया रंग कर्मशीलता, ज्ञान, त्याग, बलिदान का उदाहरण है. सफेद रंग शांति और शीतलता का उदाहरण है. हरा रंग समृद्धि का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि व्यक्ति के नाते हमारे विचार अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन यह विविधता एकता की अभिव्यक्ति है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज के केंद्र में जो चक्र है उसके बहुत सारे आरे ( तीलियां ) हैं लेकिन वे सभी एक ही केंद्र से निकल रही हैं, और उस चक्र को उसका भान है. अलग-अलग दिशा में निकलने वाले आरों को उसने एक मर्यादा में रखते हुए धर्म चक्र से बांध रखा है. इसलिए हमारे राष्ट्रीय ध्वज के केंद्र में हमने धर्म चक्र को लिया है.
‘हमें देश को सुखी संपन्न सुरक्षित बनाना है’
उन्होंने कहा कि हमारा देश स्वतंत्र है और हमेशा स्वतंत्र रहेगा लेकिन हमें देश को सुखी संपन्न सुरक्षित बनाना है तो हमारे मार्ग में अनेक अड़चन आएगी, और अड़चने निर्माण करने वाले लोग भी हैं. उन्होंने कहा कि
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि भारत को ऐसा देश बनना चाहिए जो दुनिया में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके. उन्होंने भारत को विश्वगुरु बनाने की बात भी कही. उन्होंने कहा कि भारत की भूमिका सिर्फ अपनी तरक्की तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि देश को पूरी मानवता के लिए उपयोगी योगदान देने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए. उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश की आजादी, उसकी सुरक्षा और भविष्य को लेकर लोगों से जिम्मेदारी के साथ काम करने का संदेश दिया.







