बिहार की सियासत में बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। दिल्ली में नीतीश कुमार अपनी पार्टी के सांसदों से मिल रहे हैं तो बिहार में सीएम सम्राट बीजेपी के कोटे के मंत्रियों के साथ सीक्रेट मीटिंग कर रहे हैं। दरअसल, पटना सीएम हाउस में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सिर्फ भाजपा कोटे के मंत्रियों की अहम बैठक हुई। वो भी कैबिनेट बैठक खत्म होने के तुरंत बाद। अब सवाल उठ रहा है कि सिर्फ भाजपा कोटे के मंत्रियों की बैठक क्यों बुलाई गई? क्या बिहार की राजनीति में अंदरखाने कोई बड़ा सियासी समीकरण बन रहा है? या फिर सरकार और संगठन के स्तर पर किसी बड़े फैसले की तैयारी है?
सीएम आवास पर सीक्रेट मीटिंग
बिहार की राजनीति में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब कैबिनेट बैठक समाप्त होते ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बीजेपी कोटे के सभी मंत्रियों को मुख्यमंत्री आवास पर विशेष बैठक के लिए आमंत्रित किया। बंद कमरे में आयोजित इस बैठक को लेकर सियासी हलकों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। बैठक खत्म होते ही कई मंत्री मीडिया से बचते हुए पिछले दरवाजे से निकल गए। एनडीए गठबंधन में केवल एक दल के मंत्रियों के साथ हुई इस सीक्रेट मीटिंग ने राज्य के राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है। हालांकि, बैठक का आधिकारिक एजेंडा अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।
सम्राट के साथ बंद कमरे में चर्चा
कैबिनेट मीटिंग के ठीक बाद मुख्यमंत्री आवास पर बीजेपी कोटे के मंत्रियों का जमावड़ा शुरू हुआ। यह बैठक बेहद गोपनीय तरीके से आयोजित की गई, जिसमें केवल बीजेपी के मंत्री ही शामिल हुए। बैठक समाप्त होने के बाद मंत्रियों की गोपनीय रवानगी ने इस बैठक से जुड़ी चर्चाओं को और गहरा कर दिया है।
- कैबिनेट बैठक खत्म होते ही बीजेपी कोटे के मंत्रियों को सीएम आवास बुलाया गया
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंत्रियों के विभागीय कामकाज का जायजा लिया
बैठक समाप्त होने के बाद मंत्री केदार गुप्ता ने आगामी समीक्षा बैठकों की जानकारी दी
मीडिया के सवालों से बचते हुए कई मंत्री आवास के पिछले दरवाजे से रवाना हुए।
केवल बीजेपी मंत्रियों की मौजूदगी पर उठे सवाल
एनडीए में शामिल अन्य सहयोगी दलों के नेताओं को इस बैठक से बाहर रखे जाने पर कई सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक गलियारों में ये चर्चा तेज है कि आखिर एनडीए की साझा सरकार में केवल बीजेपी नेताओं के साथ ही यह विशेष चर्चा क्यों आयोजित की गई। बिहार एनडीए में बीजेपी और जेडीयू के अलावा तीन और छोटी पार्टियां शामिल हैं।
भावी रणनीति और फैसलों पर टिकी नजरें
इस गुप्त बैठक को आगामी राजनीतिक रणनीति, विभागीय सुधारों और संगठनात्मक तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। आधिकारिक जानकारी के अभाव में बिहार के तमाम राजनीतिक दलों की नजरें इस बैठक के संभावित फैसलों और इसके आने वाले राजनीतिक असर पर टिकी हुई हैं। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव हारने और प्रशांत किशोर के उदय के बाद बीजेपी अंदर से बेचैन दिख रही है।





