संसद का मानसून सत्र खत्म होने के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने कहा कि मानसून सत्र आज खत्म हो गया. रिजिजू ने बताया कि मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा की कुल उत्पादकता 39 फीसदी रही. उन्होंने कहा कि राज्यसभा में विपक्षी दलों के सांसद हंगामा करते थे. कई बार वे सदन से बाहर भी चले जाते थे. उन्होंने कहा कि इसके बावजूद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के दूसरे ज्यादातर दलों के सांसद और कुछ विपक्षी दलों के सांसद बहस और चर्चा में शामिल हुए. रिजिजू ने बताया कि मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा की कुल उत्पादकता 39 फीसदी रही. वहीं, लोकसभा की उत्पादकता सिर्फ 19 फीसदी रही.
संसद का मानसून सत्र बुधवार, 13 अगस्त को आखिरकार खत्म हो गया. लोकसभा और राज्यसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया. सदन में यह ऐलान स्पीकर ओम बिरला ने वंदे मातरम् के बाद किया. दिलचस्प बात यह रही कि सत्र का आखिरी दिन भी हंगामे और विरोध की छाया से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाया. विपक्षी सांसदों ने कार्यवाही शुरू होने से पहले मकर द्वार पर प्रदर्शन किया. इसके बाद सदन में वंदे मातरम् हुआ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहे. गीत खत्म होते ही स्पीकर ने लोकसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी. यानी कई मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच चली खींचतान के बाद संसद का यह सत्र खत्म हो गया. हमारी नजर में इस सत्र की सबसे बड़ी तस्वीर यही रही कि कानून बनाने के साथ-साथ राजनीतिक टकराव भी लगातार सुर्खियों में रहा.
21 जुलाई से शुरू हुए मानसून सत्र में विपक्ष ने जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई, अयोध्या राम मंदिर दान विवाद समेत कई मुद्दों पर चर्चा की मांग की. 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह के बयान की भी मांग की थी. इन मांगों को लेकर दोनों सदनों में कई बार गतिरोध देखने को मिला. दूसरी तरफ सरकार ने अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाया और इस दौरान कम से कम 19 विधेयक संसद से पारित हुए. इनमें से सात विधेयक सिर्फ 36 मिनट में बिना चर्चा के पारित होने की बात सामने आई. ऐसे में सत्र के कामकाज और हंगामे, दोनों पर सवाल उठते रहे.
बुधवार सुबह लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्षी सांसदों ने मकर द्वार पर विरोध प्रदर्शन किया. इसके बाद सदन में स्पीकर ओम बिरला ने सदस्यों से राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के सम्मान में खड़े होने को कहा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सदन में मौजूद थे. वंदे मातरम् के पाठ के तुरंत बाद स्पीकर ने लोकसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी. इसके साथ ही मानसून सत्र का लोकसभा वाला हिस्सा औपचारिक रूप से समाप्त हो गया.
लोकसभा स्पीकर की चाय पार्टी के बायकॉट में भी विपक्ष दोफाड़, DMK ने दिया गच्चा
संसद के मॉनसून सत्र में पूरे वक्त हंगामा ही बरपा रहा. 18 दिनों के सत्र में कुल 18 दिन भी कामकाज नहीं हो सका. यही नहीं सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच रिश्ते इतने कमजोर हो गए कि आखिर दिन लोकसभा स्पीकर की ओर से दी गई चाय पार्टी में भी विपक्ष ने शिरकत नहीं की. कांग्रेस के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस ने भी चाय पार्टी का बहिष्कार कर दिया. लेकिन इस दौरान विपक्ष में दोफाड़ भी दिखी. तमिलनाडु की पार्टी डीएमके ने बहिष्कार की बात को नहीं माना और पार्टी नेता कनिमोझी ने इसमें हिस्सा लिया.
कांग्रेस ने तमिलनाडु में विजय की पार्टी टीवीके का समर्थन किया है और सरकार में शामिल है. तब से ही दोनों दलों के बीच रिश्ते सहज नहीं हैं. इस बीच चाय पार्टी में भी यह दिख गया. चर्चा यह भी है कि परिसीमन विधेयक पर भी डीएमके ने सरकार को समर्थन का वादा किया है. गुरुवार को संसद सत्र के आखिरी दिन लोकसभा में कामकाज नहीं हुआ. इस पर वंदे मातरम के बाद सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया. इसके बाद स्पीतर ओम बिरला के ऑफिस में चाय पार्टी का आयोजन था. लेकिन कांग्रेस की अगुवाई में इंडिया गठबंधन के नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष की चाय का बहिष्कार किया.
क्यों हो रही चाय पार्टी?
सत्र के समापन पर स्पीकर सभी दलों के सीनियर नेताओं को चाय पर आमंत्रित करते हैं. पूरे सत्र के दौरान जारी गतिरोध के मद्देनजर राहुल गांधी समेत इंडिया गठबंधन के नेताओं ने स्पीकर की टी पार्टी में नहीं शामिल होने का फैसला किया. सूत्रों के मुताबिक संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और वेणुगोपाल से स्पीकर की टी पार्टी में शामिल होने का आग्रह किया. लेकिन राहुल ने आग्रह स्वीकार नहीं किया और प्रियंका गांधी के साथ खरगे के दफ्तर में आ कर बैठ गए. कांग्रेस से कोई नहीं गया तो फिर समाजवादी पार्टी और टीएमसी के नेताओं ने भी चाय पार्टी में शिरकत नहीं की.
छात्र प्रदर्शन से लेकर कई मुद्दों पर टकराव
मानसून सत्र के दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच कई मुद्दों को लेकर लगातार खींचतान देखने को मिली. विपक्ष ने जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर चर्चा की मांग की. विपक्षी दलों ने 20 जुलाई के प्रदर्शन में कथित पुलिस कार्रवाई को गंभीर मुद्दा बताया और गृह मंत्री अमित शाह से सदन में बयान देने की मांग की. इसके अलावा अयोध्या राम मंदिर दान विवाद समेत अन्य मुद्दे भी विपक्ष के एजेंडे में रहे. इन मांगों के कारण संसद के दोनों सदनों में कई मौकों पर कार्यवाही प्रभावित हुई.
FCRA संशोधन विधेयक JPC के पास भेजने का प्रस्ताव मंजूर
मानसून सत्र के आखिरी दिन से पहले बुधवार को लोकसभा ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (FCRA), 2026 को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने के प्रस्ताव को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी. इस विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा की जरूरत पर जोर दिया गया. लोकसभा की ओर से प्रस्ताव मंजूर होने के बाद अब विधेयक की जांच और उसके प्रावधानों पर विचार संयुक्त संसदीय समिति के स्तर पर किया जाएगा. यह फैसला मानसून सत्र के दौरान हुए विधायी कामकाज की महत्वपूर्ण कड़ियों में शामिल रहा.
19 बिल पास, सात विधेयक सिर्फ 36 मिनट में
हंगामे के बावजूद संसद के मानसून सत्र में सरकार का विधायी कामकाज भी जारी रहा. बुधवार को लोकसभा ने केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने से संबंधित विधेयक और एनसीडीसी संशोधन विधेयक को मंजूरी दी. पूरे सत्र में संसद ने कम से कम 19 विधेयक पारित किए. इनमें सात विधेयक ऐसे रहे जिन्हें सिर्फ 36 मिनट में बिना चर्चा के पारित किया गया. यही आंकड़ा अब संसद की कार्यवाही और विधेयकों पर पर्याप्त चर्चा को लेकर नई बहस खड़ी कर सकता है.
राहुल गांधी देश का मजाक बनाते हैं, दुनिया सोच रही कैसा शख्स है ये
संसद में गतिरोध और छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर चर्चा के लिए सरकार के प्रस्ताव को विपक्ष द्वारा स्वीकार न किए जाने को लेकर बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है. कंगना ने बुधवार को आरोप लगाया कि राहुल गांधी लगातार देश का मजाक उड़ाते हैं. उनके लिए हर चीज मजाक है. ANI से बातचीत में कंगना रनौत ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ‘सौ चुनाव हार चुकी है’ और ‘उनकी कोई हैसियत नहीं रह गई है.’
एक्टर से नेता बनीं कंगना ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की भूमिका की ओर इशारा करते हुए कहा कि भविष्य में उन्हें यह भूमिका भी नहीं मिलेगी और यह उनका आखिरी कार्यकाल होगा. उन्होंने राहुल गांधी पर संसद और देश का मजाक उड़ाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि राहुल छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर गृह मंत्री अमित शाह से बयान की मांग करते हैं और फिर कहते हैं, “हम उनकी बात नहीं सुनेंगे.”
कंगना रनौत ने राहुल गांधी पर आरोप लगाते हुए कहा, “मुझे लगता है कि वे देश का मजाक उड़ा रहे हैं. वे लगातार देश का मजाक बनाते हैं. यह पहली बार है, जब मैं संसद का ऐसा मजाक बनते देख रही हूं. एक तरफ तो वह कहते हैं, ‘हमें अमित शाह जी से जवाब चाहिए, यह पूछने के लिए कि उन्होंने छात्रों के साथ ऐसा-वैसा किया या नहीं’ और साथ ही यह भी कहते हैं, ‘हम उनकी बात सुनने के लिए यहां नहीं हैं.’
बीजेपी सांसद ने आगे कहा, “पूरी दुनिया देख रही है और सोच रही है कि यह किस तरह का इंसान है. जिस तरह से वह अपनी हताशा निकाल रहे हैं, संसद और इस तरह पूरे देश और उसके नागरिकों का अपमान कर रहे हैं, उसे देखकर विपक्ष के नेता के तौर पर उनकी भूमिका को देखते हुए मुझे यकीन हो गया है कि यह उनका आखिरी कार्यकाल होगा.”
कंगना रनौत ने कहा, “वे प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. एक ऐसे लोकतांत्रिक रूप से चुने गए नेता, जिन्हें लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए भारी जनादेश मिला है. राहुल को लगता है कि इस देश में उनके अलावा किसी और का अस्तित्व ही नहीं होना चाहिए.”
मंडी से सांसद कंगना रनौत ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के विदेशी मूल का भी जिक्र किया और कहा कि वे विपक्षी नेताओं को राहुल गांधी को अपना नेता मानने के लिए मजबूर कर रही हैं.