पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आज आर-पार की लड़ाई होने की आशंका बन गई है। प्रदर्शनकारी आज पीओके की कथित राजधानी मुजफ्फराबाद के लिए रैली निकाल रहे हैं और इस दौरान पाकिस्तान असेंबली से आजादी का ऐलान किया जा सकता है। पीओके के रावलकोट में जहां ये प्रदर्शन हो रहा है वहां से जो वीडियो रात में आई हैं उसमें हजारों लोगों को देखा जा रहा है। सैकड़ों बच्चे भी इस प्रदर्शन में शामिल हैं।
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) के लोग वहां की सरकार और सेना की बर्बरता से इतने परेशान हो चुके हैं कि तमाम दमन के बावजूद वे पीछे नहीं हट रहे हैं. आसिम मुनीर की सेना को ओर से दागी जा रही हर गोलियां, हर प्रताड़ना के साथ उनका आंदोलन कमजोर होने की जगह और मजबूत होता जा रहा है. PoJK में सरकार विरोधी प्रदर्शनों की अगुवाई कर रही जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने आज यानी बुधवार, 15 जुलाई को मुजफ्फराबाद तक एक ‘लॉन्ग मार्च’ बुलाया है. यह खबर न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से छापी है.
JAAC इस इलाके के अलग-अलग सामाजिक-राजनीतिक समूहों का एक गठबंधन है, जिसे पाकिस्तान सरकार ने बैन कर रखा है. अब JAAC अपने गिरफ्तार नेताओं और कार्यकर्ताओं की रिहाई, सुरक्षा बलों की क्रूर कार्रवाई को रोकने, इंटरनेट-मोबाइल नेटवर्क को बहाल करने और बिजली व खाने-पीने की चीजों जैसी बुनियादी सुविधाओं तक बेहतर पहुंच की मांग कर रहा है.
पाकिस्तान सरकार को दिए गए अल्टीमेटम की समय-सीमा खत्म होने के बाद इस लॉन्ग मार्च को बुलाया गया है. संभावना है कि इससे JAAC के नेतृत्व में चल रहा आंदोलन और तेज हो जाएगा. अगर समूह की मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो 15 जुलाई को अलग-अलग जिलों से लोगों के जत्थे मुजफ्फराबाद में इकट्ठा हो सकते हैं. इस रिपोर्ट के अनुसार सूत्रों ने कहा कि प्रस्तावित मार्च में रावलकोट, मीरपुर, कोटली, बाग और अन्य जिलों से बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है. साथ ही बड़े पैमाने पर दुकानें बंद रहेंगी और रोड ब्लॉक भी किया जा सकता है.
प्रदर्शनकारियों की मांग क्या है?
दरअसल 38-सूत्रीय चार्टर व्यापक अशांति के बाद पाकिस्तानी सरकार के साथ 2025 में हुए समझौते पर आधारित है. यह PoJK में शरणार्थियों के लिए आरक्षित विधानसभा सीटों को खत्म करने और गेहूं के आटे की कीमतें कम करने, बिजली की दरों में भारी कटौती और बेहतर सार्वजनिक सेवाओं जैसे उपायों की मांग करता है. PoJK असेंबली में 53 सीटें हैं, जिनमें से 45 सीटें सीधे चुनाव से और आठ सीटें नॉमिनेशन से भरी जाती हैं. चुनी जाने वाली 45 सीटों में से 12 सीटें जम्मू-कश्मीर से आए उन रिफ्यूजियों के लिए रिजर्व हैं जो पाकिस्तान में बस गए हैं- इनमें से छह सीटें कश्मीर घाटी और छह सीटें जम्मू इलाके के रिफ्यूजियों के लिए हैं.
भारत का स्टैंड
भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को इस्लामाबाद द्वारा अपने “जबरदस्ती” कब्जे वाले इलाकों में दशकों से किए जा रहे सिस्टमैटिक शोषण और प्रशासनिक दमन का सीधा नतीजा बताया है. भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि नई दिल्ली को उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय PoJK में हो रहे गंभीर अत्याचारों और गलत कामों के लिए पाकिस्तान को पूरी तरह जवाबदेह ठहराएगा.
परेशानी में पाकिस्तान सरकार और सेना
नाम न बताने की शर्त पर एक सुरक्षा विशेषज्ञ ने कहा कि इन प्रदर्शनों में PoJK में राजनीतिक अस्थिरता को और गहरा करने और पाकिस्तान के प्रशासनिक नियंत्रण के लिए और बड़ी चुनौती पेश करने की क्षमता है. साथ ही, अगर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया जाता है, तो इससे देश और दुनिया का ध्यान भी लगातार इस ओर खिंचा चला आएगा. JAAC ने चेतावनी दी है कि अगर राजनीतिक प्रतिनिधित्व और शासन में सुधार की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वह अपने मौजूदा 38-सूत्रीय चार्टर से आगे बढ़कर आंदोलन का विस्तार कर सकता है, जो एक व्यापक राजनीतिक आंदोलन का संकेत होगा.
क्या पाकिस्तान असेंबली से आजादी का ऐलान करेगी JAAC?
JAAC ने आज मुजफ्फराबाद कूच करने का ऐलान कर रखा था और इसीलिए रैली में हजारों लोगों को देखा जा रहा है। प्रदर्शनकारी अलग अलग क्षेत्रों से मुजफ्फराबाद के लिए मार्च शुरू कर चुके हैं। JAAC ने तीन दिन पहले पाकिस्तान सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था और कहा था कि अगर उसकी मांगे नहीं मानी जाती हैं तो पाकिस्तान असेंबली से आजादी की मांग की जाएगी। पाकिस्तान सरकार ने मांगों को नहीं माना है इसीलिए आज इस बात पर नजर होगी कि क्या JAAC पाकिस्तान असेंबली से आजादी की घोषणा करती है या नहीं?
इस बीच यूनाइटेड कश्मीर पीपल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किया है। इसमें PoK और दुनिया भर में बसे कश्मीरी समुदाय के नेताओं, पत्रकारों और सिविल सोसाइटी के लोगों को संबोधित किया गया। इसका मकसद कब्जे वाले इलाके में पाकिस्तानी अधिकारियों की तरफ से मानवाधिकारों के उल्लंघन, जारी घेराबंदी और शांतिपूर्ण नागरिकों पर की जा रही बेरहम कार्रवाई पर चर्चा की गई है।
UKPNP ने पाकिस्तानी अधिकारियों से मांग की है कि वे तत्काल बेरहम बल प्रयोग, मनमाने ढंग से गिरफ्तारी और लोगों को जबरन गायब करने का सिलसिला बंद करें। हिरासत में लिए गए सभी लोगों को रिहा करें और उन्हें कोर्ट के सामने पेश करें। इसके अलावा 5 जून के बाद मारे गए लोगों के शव बिना किसी शर्त के वापस सौंपना सुनिश्चित करें।
पीओके में ‘आर-पार’ की जंग का एलान
प्रदर्शनकारी नेताओं और पाकिस्तानी प्रशासन के बीच हुई उच्च स्तरीय वार्ता पूरी तरह से नाकाम हो गई है। इसके बाद प्रदर्शनकारी संगठन के नेताओं ने एलान किया है कि ‘अब बातचीत का समय खत्म हो चुका है अब सिर्फ प्रतिरोध होगा’। आंदोलनकारियों ने सरकार से किसी भी तरह के संवाद को बंद करके मुजफ्फराबाद विधानसभा की ओर बढ़ने का फैसला किया है।
भारी सुरक्षा बल और रेंजर्स की तैनाती
प्रदर्शनकारियों के मार्च को मुजफ्फराबाद पहुंचने से रोकने के लिए पाकिस्तानी हुकूमत ने पूरे क्षेत्र की किलेबंदी कर दी है। 17,500 से ज्यादा अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों और अर्धसैनिक बलों (पाकिस्तानी रेंजर्स) को मुजफ्फराबाद और उसके प्रवेश द्वारों पर तैनात किया गया है। मुजफ्फराबाद को जोड़ने वाले सभी मुख्य राजमार्गों और रास्तों को बड़े-बड़े बैरिकेड्स, कटीले तारों और कंटेनरों से ब्लॉक कर दिया गया है।
मार्च से ठीक पहले हिंसक झड़पें और मौतें
आज यानि 15 जुलाई को होने वाले मार्च से ठीक पहले कल (मंगलवार) पुंछ, रावलकोट और सुधनोती जिलों में भारी हिंसा हुई है। रावलकोट बस स्टैंड और सुधनोती में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पाकिस्तानी रेंजर्स ने आंसू गैस के गोले दागे और अंधाधुंध फायरिंग की। इसमें 8 से 9 प्रदर्शनकारियों के मारे जाने की खबर है। इसके बाद रैली में और भारी संख्या में लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है।
पाकिस्तान सरकार ने मुजफ्फराबाद पहुंचने वाले रास्तों और उसके करीबी इलाकों में मोबाइल इंटरनेट और टेलीफोन सेवाएं पूरी तरह ठप कर दी गई ताकि प्रदर्शनकारी एक-दूसरे से संपर्क न कर सकें। इसके बावजूद अवामी एक्शन कमेटी के कार्यकर्ताओं ने मुख्य रास्तों पर धरना देकर पाकिस्तान की मुख्य भूमि से जोड़ने वाले सभी रास्तों को ब्लॉक कर दिया है। बाजार और परिवहन पूरी तरह से ठप हैं।
इस बार के मार्च की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें स्थानीय महिलाओं और स्कूली बच्चों ने रिकॉर्ड संख्या में हिस्सा लिया है। सोशल मीडिया पर आ रहे वीडियो में महिलाएं और बच्चे हाथों में तख्तियां लेकर पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों, भारी टैक्स और आटे-बिजली की महंगाई के खिलाफ नारे लगाते हुए मुजफ्फराबाद की तरफ बढ़ रहे हैं।







