अयोध्याजी के राम मंदिर में चढ़ावे में चोरी हुई है, इसमें तो अब कोई संदेह नहीं है। इस मामले में कुछ लोगों के इस्तीफे से इंसाफ नहीं होने वाला। यह आस्था से खिलवाड़ का मामला है और इसमें दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के साथ-साथ मंदिर की व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन की जरूरत भी महसूस की जा रही है।
चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और चंदा में मिले करोड़ों रुपये व कीमती आभूषणों के गायब होने के आरोपों के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले अयोध्या पुलिस ने मंदिर में चोरी, धन और कीमती सामान के कथित गबन से जुड़े मामले में आठ नामजद लोगों और कुछ अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की थी।
दरअसल, युगों-युगों से सनातनियों की आस्था के केंद्र रहे और जन-जन के रोम-रोम में बसने वाले प्रभु श्रीराम के मंदिर में चोरी की घटना ने भारत ही नहीं, बल्कि विश्व भर के करोड़ों राम भक्तों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है। जिस मंदिर की सुरक्षा चौबीसों घंटे अत्याधुनिक तकनीक द्वारा होती हो, जिसके चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी की निगरानी हो और जहां की सुरक्षा व्यवस्था के कई स्तर हों, वहां यदि करोड़ों रुपये मूल्य की दान-राशि व आभूषणों की चोरी की बात सामने आए, तो यह आश्चर्य का नहीं, बल्कि मंदिर प्रबंधन, प्रशासन और समाज, तीनों के लिए गंभीर आत्ममंथन का विषय है।
यदि जांच में यह सिद्ध होता है कि मंदिर की दान-राशि की जिम्मेदारी संभालने वाले कुछ लोग ही इस कृत्य में शामिल थे, तो यह न केवल निंदनीय होगा, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर गहरा आघात होगा। भगवान को श्रद्धापूर्वक अर्पित दान में बेईमानी आर्थिक अपराध ही नहीं है, यह धार्मिक व नैतिक विश्वास का भी घोर उल्लंघन है। दुखद बात यह है कि जो स्वयं को प्रभु श्रीराम का अनन्य भक्त बताते हैं, यदि उन्हीं के हाथों मंदिर की पवित्रता पर प्रश्नचिह्न लग जाए, तो यह स्थिति वाकई पीड़ादायक है।
यह घटना एक बड़ा संदेश देती है कि किसी भी धार्मिक संस्था का संचालन केवल विश्वास के आधार पर नहीं, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही व नियमित निगरानी के आधार पर होना चाहिए। मंदिर हो, मस्जिद हो, गुरुद्वारा हो या चर्च, जब कोई व्यक्ति अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए आस्था के केंद्र की गरिमा को ठेस पहुंचाता है, तो वह करोड़ों लोगों के विश्वास को भी तोड़ता है। इस अपराध का दाग इस्तीफों से नहीं, बल्कि सभी दोषियों को कड़ी सजा दिलाकर ही धोया जा सकता है।
जांच पर आंच न आए इसीलिए त्यागपत्र
राम मंदिर के चढ़ावे में गबन और चोरी के विवाद के कारण निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए ही चंपत राय ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र के महासचिव पद से इस्तीफा दिया है। ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने भी अपने पद से इस्तीफा सौंप दिया है। कुछ तत्वों द्वारा यह अफवाह उड़ाई जा रही है कि चंदा चोरी के ये ही मुख्य आरोपी हैं, जबकि इन दोनों के इस्तीफों को नैतिक आचरण के तौर पर लिया जाना चाहिए।
उत्तर प्रदेश सरकार के विशेष जांच दल की प्रारंभिक रिपोर्ट आने और आठ लोगों की गिरफ्तारी के बाद पारदर्शी जांच के लिए चंपत राय ने इस्तीफा दिया। ये दोनों कानून और संविधान का सम्मान करने वाले व्यक्ति हैं और जांच को निष्पक्ष रखने और कानून के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए ही उन्होंने यह निर्णय लिया है, क्योंकि जांच के दायरे में कुछ संदिग्ध लोगों की भूमिका सामने आई है। वैसे भी, चंपत राय बंसल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख नेता हैं। राम मंदिर आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। 1975 में आपातकाल के दौरान आरएसएस से जुड़े होने के कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। करीब 18 महीने वह जेल में रहे। इसके बाद उन्होंने अध्यापन छोड़ दिया और प्रचारक के रूप में संघ से जुड़ गए। साल 2002 में वह विहिप के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री के पद पर रहे। चंपत राय विहिप के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। उन्हें ‘अयोध्या का एनसाइक्लोपीडिया’ कहा जाता है, क्योंकि राम जन्मभूमि विवाद और ऐतिहासिक दस्तावेजों की उन्हें गहन जानकारी है। वह 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी विध्वंस के दौरान कारसेवकों के साथ सक्रिय रूप से मौजूद थे। महासचिव पद पर रहते हुए उन्होंने मंदिर निर्माण, वित्तीय प्रबंधन, और दान की देखरेख का काम संभाला।
इसी तरह, मूल रूप से अंबेडकर नगर के रहने वाले अनिल मिश्रा भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से लंबे समय से जुड़े रहे हैं और पेशे से एक होम्योपैथिक चिकित्सक हैं। 22 जनवरी, 2024 को रामलला प्राण प्रतिष्ठा समारोह के यह मुख्य यजमान थे। मिश्रा केंद्र सरकार द्वारा गठित इस प्रतिष्ठित ट्रस्ट के उन चुनिंदा चेहरों में शामिल हैं, जिन्हें मंदिर के भव्य निर्माण और प्रबंधन की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई। इस तथाकथित वित्तीय अनियमितता के सामने आने के बाद उन्होंने निष्पक्ष जांच के लिए ही इस्तीफा दिया है। इसलिए इन दोनों गणमान्य व्यक्तियों पर अनर्गल आरोप लगाना कतई उचित नहीं। जांच पूरी होने के बाद दोनों बेदाग निकलेंगे, ऐसी हमें आशा है।







