ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद पाकिस्तान में आक्रोश फैल गया। विशेषकर कराची में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और अमेरिकी दूतावास के बाहर विरोध जताया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भीड़ ने दूतावास परिसर के बाहर नारेबाजी की और गुस्सा व्यक्त किया। हालात को काबू में रखने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई।
पाकिस्तान के कराची के माई कोलाची रोड पर अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के पास प्रदर्शन हिंसक हो गए। कानून प्रवर्तन कर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया, जिसके चलके कई लोगों के घायल हो गए।
ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद भारत के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। कश्मीर के अलावा, लखनऊ में भी शिया समुदाय के लोग सड़कों पर उतर आए। उत्तर प्रदेश में हाई अलर्ट जारी किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार सुबह बैठक में सभी जिलों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। इसके तहत लखनऊ समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी बढ़ा दी गई है।
लखनऊ में शिया समुदाय के लोग तीन दिन का मनाएंगे शोक
आयतुल्ला खामेनेईई की शहादत पर घोषित तीन दिवसीय शोक के तहत शिया समुदाय के लोग अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इस संबंध में मौलाना कल्बे जवाद ने तमाम उम्मते मुस्लिमा और इंसानियत परस्त लोगों से शोक में शामिल होने की अपील की है।
कश्मीर में भी सड़कों में उतरे लोग
वहीं कश्मीर के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए। अधिकारियों के अनुसार, खासतौर पर शिया आबादी वाले इलाकों में सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इस्राइल के खिलाफ नारे लगाए, ईरान के साथ एकजुटता व्यक्त की और हमले की निंदा की। प्रदर्शनों में खामेनेई की तस्वीरें और ईरान के समर्थन में बैनर दिखाए गए, साथ ही काले झंडे और पारंपरिक शोक गीत (नौहा) भी गाए गए।
‘खामोश न रहें’: खामेनेई की मौत के बाद भारत में ईरानी दूतावास की वैश्विक अपील
ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद भारत स्थित ईरानी दूतावास ने दुनिया भर की सरकारों से अमेरिकी-इस्राइली हमले की कड़ी निंदा करने और चुप न रहने की अपील की है। जारी बयान में दूतावास ने खामेनेई की मौत पर गहरा दुख और शोक व्यक्त किया। ईरान के सरकारी मीडिया ने रविवार तड़के पुष्टि की कि अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमले में उनकी मृत्यु हुई।
दूतावास ने कहा कि स्वतंत्र और न्यायप्रिय राष्ट्रों को इस खुले अपराध की स्पष्ट शब्दों में निंदा करनी चाहिए और आक्रामकता के सामने मौन नहीं रहना चाहिए। बयान में यह भी कहा गया कि अमेरिका और इजरायल को इस कार्रवाई के गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस बीच, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बदला लेने की चेतावनी देते हुए दावा किया है कि उसने पश्चिमी एशिया में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है।
ईरानी दूतावास ने अपने बयान में कहा कि ईरान की जनता दृढ़ता और संकल्प के साथ अपने मार्ग पर आगे बढ़ती रहेगी और देश के कामकाज में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आने दिया जाएगा। साथ ही, शहीदों का बलिदान देश की स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा के संकल्प को और मजबूत करेगा।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए (IRNA) के अनुसार, शनिवार को हुए अमेरिकी-इस्राइली हमलों में सशस्त्र बलों के प्रमुख अब्दुल रहीम मौसवी और रक्षा मंत्री अजीज नासिरजादेह की मौत हो गई है। इससे पहले ईरान ने सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामेनेई, उनके सुरक्षा सलाहकार अली शमखानी और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर-इन-चीफ मोहम्मद पाकपुर के मारे जाने की पुष्टि की थी। आईआरएनए ने यह भी बताया कि हमले में सशस्त्र बलों के अन्य कई वरिष्ठ कमांडरों की भी जान गई है। उनके नामों की आधिकारिक घोषणा बाद में की जाएगी। ईरानी सरकारी टेलीविजन ने रक्षा परिषद की बैठक को निशाना बनाकर किए गए हवाई हमले में ईरान के सेना प्रमुख और रक्षा मंत्री के मारे जाने की पुष्टि की है।जनरल अब्दुल रहीम मुसावी और रक्षा मंत्री जनरल अजीज नासिरजादेह की बैठक में ईरान के अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रमुख और सुरक्षा सलाहकार अली शमखानी के साथ जान चली गई, जिनकी मौत की घोषणा ईरान ने रविवार सुबह पहले ही कर दी थी।







