पटना के नीट छात्रा मौत मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की जांच तेज हो गई है. सोमवार शाम CBI टीम एक बार फिर पटना के शंभू हॉस्टल पहुंची और उस कमरे की बारीकी से जांच की जिसमें छात्रा रहती थी. टीम के साथ हॉस्टल संचालिका नीलम अग्रवाल, वार्डन और हॉस्टल का गार्ड भी मौजूद था. भीड़ को देखते हुए हॉस्टल के बाहर और अंदर भारी संख्या में पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई थी.
सूत्रों के अनुसार CBI ने संचालिका और वार्डन से पूछा कि घटना के दिन वे मौजूद थे या नहीं, छात्रा के बेहोश होने की सूचना पहले किसे दी गई, अस्पताल कौन लेकर गया और पांच जनवरी को जब छात्रा जहानाबाद से हॉस्टल लौटी थी तो उसकी मानसिक स्थिति कैसी थी, क्या वह तनाव में थी और उसके कमरे में कौन-कौन गया था. गार्ड से पूछा गया कि उसने बंद कमरे का गेट कैसे खोला, अंदर क्या देखा और छात्रा को गोद में उठाकर किस तरह नीचे लाया.
DNA मिलान बनी सबसे बड़ी चुनौती
जांच एजेंसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती छात्रा के कपड़ों से मिले स्पर्म के DNA का आरोपी के DNA सैंपल से मिलान करना है. इस मिलान पर ही जांच की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी. CBI टीम अब तक जुटाए गए सबूतों और पूछताछ में मिली जानकारी का मिलान कर रही है.
दर्जन भर लोगों का पॉलीग्राफ टेस्ट संभव
सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसी सच उगलवाने के लिए करीब एक दर्जन लोगों का पॉलीग्राफ टेस्ट करा सकती है. इससे पहले CBI छात्रा के गांव जहानाबाद में परिजनों से लंबी पूछताछ कर चुकी है. गया में मामा-मामी से भी पूछताछ हो चुकी है. चित्रगुप्त नगर थाने के पुलिस पदाधिकारियों से भी जांच टीम बात कर चुकी है. जिन अस्पतालों में छात्रा का इलाज हुआ, वहां से भी हर जानकारी ली जा चुकी है.
क्या है पूरा मामला
छह जनवरी को छात्रा अपने हॉस्टल के कमरे में बेहोश पाई गई थी. अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. परिजन रेप और हत्या का आरोप लगा रहे हैं. CBI टीम पूरे घटनाक्रम की कड़ी-दर-कड़ी जांच कर रही है ताकि मौत की असली वजह सामने लाई जा सके.





