ADVERTISEMENT
Thursday, July 9, 2026
No Result
View All Result
  • Login
  • Register
No Result
View All Result
UB INDIA NEWS
No Result
View All Result

‘न्यायिक सक्रियता, न्यायिक आतंकवाद नहीं बननी चाहिए’……………….

UB India News by UB India News
August 22, 2025
in कानून, खास खबर, संपादकीय
0
सुप्रीम कोर्ट 22 जुलाई 2025 को राष्ट्रपति द्वारा संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत मांगे प्रेसिडेंशियल रेफरेंस पर करेगा सुनवाई
  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link

राष्ट्रपति और राज्यपालों के लिए विधेयक को मंजूरी देने की समय सीमा तय करने के मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायिक सक्रियता, न्यायिक आतंकवाद नहीं बनना चाहिए। गुरुवार को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ‘निर्वाचित लोगों को काफी अनुभव होता है और उसे कमतर नहीं आंका जाना चाहिए।’ इस पर सीजेआई जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि ‘हमने कभी भी निर्वाचित लोगों के बारे में कुछ नहीं कहा है। मैंने हमेशा कहा है कि न्यायिक सक्रियता, कभी भी न्यायिक आतंकवाद या न्यायिक रोमांच नहीं बनना चाहिए।’

‘अब जनप्रतिनिधि सीधे जनता के सवालों का जवाब देते हैं’
पीठ में सीजेआई जस्टिस गवई के अलावा जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिएस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस एएस चंदूरकर भी शामिल हैं। तुषार मेहता ने अपने सबमिशन में सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया, जिसमें राज्यपालों की शक्तियों पर बात की गई। इस मामले पर सुनवाई लगातार तीसरे दिन भी जारी रही। मेहता ने कहा कि ‘निर्वाचित लोग सीधे तौर पर जनता का सामना करते हैं। अब लोग जनप्रतिनिधियों से सवाल करते हैं। 20-25 साल पहले हालात अलग थे। अब मतदाता जागरूक हैं और उन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकता।’
मेहता ने कहा- राज्यपाल के पास विधेयक को मंजूरी न देने की शक्ति
मेहता ने कहा कि राज्यपाल के पास मंजूरी रोकने का पूरा अधिकार है, जो उन्हें संविधान के अनुच्छेद 200 से मिला हुआ है। बुधवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर कोई विधेयक दूसरी बार राज्यपाल की मंजूरी के लिए उनके पास भेजा जाए तो राज्यपाल उसे राष्ट्रपति के पास विचार करने के लिए नहीं भेज सकते।

क्या है पूरा मामला
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार बनाम राज्यपाल मामले में एक आदेश दिया था, जिसमें राज्यपालों और राष्ट्रपति को एक तय समय में उनके समक्ष पेश विधेयकों पर फैसला लेने को कहा गया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर काफी हंगामा हुआ। राष्ट्रपति ने भी इस पर आपत्ति जताई और कहा कि देश के संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, तो सुप्रीम कोर्ट किस आधार पर यह फैसला दे सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार बनाम राज्यपाल मामले में दिए अपने फैसले में कहा था कि राज्यपाल के पास कोई वीटो पावर नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल की ओर से भेजे गए विधेयक पर राष्ट्रपति को तीन महीने के भीतर फैसला लेना होगा। अगर तय समयसीमा में फैसला नहीं लिया जाता तो राष्ट्रपति को राज्य को इसकी वाजिब वजह बतानी होगी।

RELATED POSTS

तीन पड़ाव, एक संदेश: हिंद-प्रशांत में बढ़ती कूटनीतिक ताकत………………

विश्वकप में अब शुरू होगा क्वार्टर फाइनल राउंड, अंतिम-आठ टीमों का एनालिसिस

केंद्र ने राज्यपालों और राष्ट्रपति को निश्चित समय सीमा में विधेयक को मंजूरी देने की बात का विरोध किया है। सरकार का कहना है कि इस निर्देश से संवैधानिक अव्यवस्था पैदा होगी। पांच पृष्ठों के संदर्भ में, राष्ट्रपति मुर्मू ने सर्वोच्च न्यायालय से 14 प्रश्न पूछे और राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों पर विचार करने में अनुच्छेद 200 और 201 के तहत राज्यपाल और राष्ट्रपति की शक्तियों पर उसकी राय जानी है।

राष्ट्रपति और राज्यपालों के लिए विधेयक को मंजूरी देने की समय सीमा तय करने के मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायिक सक्रियता, न्यायिक आतंकवाद नहीं बनना चाहिए। गुरुवार को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ‘निर्वाचित लोगों को काफी अनुभव होता है और उसे कमतर नहीं आंका जाना चाहिए।’ इस पर सीजेआई जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि ‘हमने कभी भी निर्वाचित लोगों के बारे में कुछ नहीं कहा है। मैंने हमेशा कहा है कि न्यायिक सक्रियता, कभी भी न्यायिक आतंकवाद या न्यायिक रोमांच नहीं बनना चाहिए।’

‘अब जनप्रतिनिधि सीधे जनता के सवालों का जवाब देते हैं’
पीठ में सीजेआई जस्टिस गवई के अलावा जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिएस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस एएस चंदूरकर भी शामिल हैं। तुषार मेहता ने अपने सबमिशन में सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया, जिसमें राज्यपालों की शक्तियों पर बात की गई। इस मामले पर सुनवाई लगातार तीसरे दिन भी जारी रही। मेहता ने कहा कि ‘निर्वाचित लोग सीधे तौर पर जनता का सामना करते हैं। अब लोग जनप्रतिनिधियों से सवाल करते हैं। 20-25 साल पहले हालात अलग थे। अब मतदाता जागरूक हैं और उन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकता।’
मेहता ने कहा- राज्यपाल के पास विधेयक को मंजूरी न देने की शक्ति
मेहता ने कहा कि राज्यपाल के पास मंजूरी रोकने का पूरा अधिकार है, जो उन्हें संविधान के अनुच्छेद 200 से मिला हुआ है। बुधवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर कोई विधेयक दूसरी बार राज्यपाल की मंजूरी के लिए उनके पास भेजा जाए तो राज्यपाल उसे राष्ट्रपति के पास विचार करने के लिए नहीं भेज सकते।

क्या है पूरा मामला
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार बनाम राज्यपाल मामले में एक आदेश दिया था, जिसमें राज्यपालों और राष्ट्रपति को एक तय समय में उनके समक्ष पेश विधेयकों पर फैसला लेने को कहा गया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर काफी हंगामा हुआ। राष्ट्रपति ने भी इस पर आपत्ति जताई और कहा कि देश के संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, तो सुप्रीम कोर्ट किस आधार पर यह फैसला दे सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार बनाम राज्यपाल मामले में दिए अपने फैसले में कहा था कि राज्यपाल के पास कोई वीटो पावर नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल की ओर से भेजे गए विधेयक पर राष्ट्रपति को तीन महीने के भीतर फैसला लेना होगा। अगर तय समयसीमा में फैसला नहीं लिया जाता तो राष्ट्रपति को राज्य को इसकी वाजिब वजह बतानी होगी।

केंद्र ने राज्यपालों और राष्ट्रपति को निश्चित समय सीमा में विधेयक को मंजूरी देने की बात का विरोध किया है। सरकार का कहना है कि इस निर्देश से संवैधानिक अव्यवस्था पैदा होगी। पांच पृष्ठों के संदर्भ में, राष्ट्रपति मुर्मू ने सर्वोच्च न्यायालय से 14 प्रश्न पूछे और राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों पर विचार करने में अनुच्छेद 200 और 201 के तहत राज्यपाल और राष्ट्रपति की शक्तियों पर उसकी राय जानी है।

  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link
UB India News

UB India News

Related Posts

तीन पड़ाव, एक संदेश: हिंद-प्रशांत में बढ़ती कूटनीतिक ताकत………………

तीन पड़ाव, एक संदेश: हिंद-प्रशांत में बढ़ती कूटनीतिक ताकत………………

by UB India News
July 9, 2026
0

ऐसे समय में, जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता छोटे और मझोले देशों को नए रणनीतिक साझेदार तलाशने...

विश्वकप में अब शुरू होगा क्वार्टर फाइनल राउंड, अंतिम-आठ टीमों का एनालिसिस

विश्वकप में अब शुरू होगा क्वार्टर फाइनल राउंड, अंतिम-आठ टीमों का एनालिसिस

by UB India News
July 9, 2026
0

फीफा विश्व कप 2026 अब अपने निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। 48 टीमों के साथ शुरू हुए इस टूर्नामेंट...

यूसीसी के पक्ष में, समान नागरिक संहिता की जरूरत पर अदालत का जोर………

सुप्रीम कोर्ट करेगा फैसला ,धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम बनने वालों को OBC आरक्षण या नहीं?

by UB India News
July 9, 2026
0

इस्लाम धर्म अपनाने वाले लोगों को पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण का लाभ मिलेगा या नहीं, इस पर अब सुप्रीम कोर्ट...

नए अवसर से कहीं अधिक चुनौतियां…………

नए अवसर से कहीं अधिक चुनौतियां…………

by UB India News
July 9, 2026
0

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंडोनेशिया दौरा भारत की ‘ऐक्ट ईस्ट’ नीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक सक्रियता का महत्वपूर्ण...

क्या चंपत राय को उनका अहंकार ले डूबा?

धीरज धर्म मित्र अरु नारी, आपद काल परिखिअहिं चारि……………….

by UB India News
July 9, 2026
0

श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट विवाद में सबसे बड़े सवाल महासचिव चंपत राय व अनिल मिश्रा को लेकर उठे, अब दोनों का...

Next Post
कई योग्य और प्रतिभाशाली नेता है विपक्ष और कांग्रेस में ………………..

कई योग्य और प्रतिभाशाली नेता है विपक्ष और कांग्रेस में ....................

किसानों के मसीहा, दोस्‍तों का साथ और बेधड़क चाल…कैसे मोदी की चुप्‍पी में छुपी है डोनाल्‍ड ट्रंप की बौखलाहट?

अपने ही जाल में फंस गए डोनाल्ड ट्रंप!

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • front
  • Home
Contect Us - ubindianews@gmail.com

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
No Result
View All Result
  • front
  • Home

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Send this to a friend