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क्या फैक्ट चेक के चक्कर में खुद फंस गए तेजस्वी यादव?

UB India News by UB India News
August 5, 2025
in खास खबर, पटना, बिहार
0
क्या फैक्ट चेक के चक्कर में खुद फंस गए तेजस्वी यादव?

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तीन पड़ाव, एक संदेश: हिंद-प्रशांत में बढ़ती कूटनीतिक ताकत………………

विश्वकप में अब शुरू होगा क्वार्टर फाइनल राउंड, अंतिम-आठ टीमों का एनालिसिस

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बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने शनिवार को पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि उनका नाम वोटर लिस्ट से गायब है. उन्होंने अपने फोन को स्क्रीन से जोड़कर EPIC नंबर RAB2916120 डालकर दिखाया, जिसके बाद ‘कोई रिकॉर्ड नहीं मिला’ का संदेश आया. इस पर तेजस्वी यादव ने कहा, मेरा नाम नहीं है तो मैं चुनाव कैसे लड़ूंगा? यह लोकतंत्र की हत्या है”. उन्होंने चुनाव आयोग पर बीजेपी के इशारे पर काम करने का भी आरोप लगा दिया. लेकिन, इसके बाद चुनाव आयोग ने तेजस्वी के दावे को ‘भ्रामक और तथ्यहीन’ करार दिया. आयोग ने स्पष्ट किया कि तेजस्वी का नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में सीरियल नंबर 416, बूथ 204 (वेटरनरी कॉलेज, पटना) पर दर्ज है और उनका EPIC नंबर RAB0456228 है. इसका उपयोग उन्होंने 2020 के चुनाव में भी किया था. चुनाव आयोग ने कहा कि तेजस्वी द्वारा बताया गया दूसरा EPIC नंबर RAB2916120 अस्तित्व में नहीं है. अब निर्वाचन आयोग ने इसकी जांच शुरू कर दी है और दो वोटर आईडी होने पर FIR की चेतावनी दी है. अब इसको लेकर राजनीति गर्म हो गई है.

जेडीयू-बीजेपी का पलटवार

राजद नेता तेजस्वी यादव के दावे के बाद सत्तारूढ़ जेडीयू और बीजेपी ने तीखा हमला बोला. उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने X पर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट का स्क्रीनशॉट साझा कर तेजस्वी का नाम और फोटो दिखाते हुए कहा, तेजस्वी यादव को सर्च करने की योग्यता नहीं. बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीया ने भी X पर लिखा, तेजस्वी का दावा फर्जी है. उनका नाम सूची में है. यह मतदाताओं को गुमराह करने की कोशिश है. जेडीयू नेता नीरज कुमार ने इसे ‘राजनीतिक धोखाधड़ी’ करार दिया.

सियासी घमासान और आरोप-प्रत्यारोप

तेजस्वी यादव के दावे ने बिहार में सियासी पारा चढ़ा दिया है. राजद प्रवक्ता चितरंजन गगन ने दावा किया कि चुनाव आयोग ने तेजस्वी का EPIC नंबर बिना सूचना बदला गया है. वहीं, विपक्ष ने विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया पर सवाल उठाए जिसमें 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए. तेजस्वी यादव ने कहा, हर विधानसभा से 25-30 हजार नाम हटाए गए. यह गरीबों और प्रवासियों को वोटिंग से वंचित करने की साजिश है. दूसरी ओर, बीजेपी ने इसे मतदाता सूची की शुद्धता के लिए जरूरी कदम बताया.
तेजस्वी का दावा और आयोग का खंडन अब सवाल खड़े कर रहा है. अगर दूसरा EPIC नंबर गलत है तो तेजस्वी यादव ने इसे प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्यों इस्तेमाल किया? क्या यह सियासी ड्रामा था या वास्तव में यह गलती है? यह तो चुनाव आयोग की जांच से यह साफ होगा, लेकिन फिलहाल तेजस्वी के दावे ने उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठा दिए हैं. बिहार विधानसभा चुनाव से पहले यह विवाद राजद के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकता है.

एनडीए ने तेजस्वी पर एफआईआर की मांग की.

बिहार की राजनीति में तेजस्वी यादव के दो वोटर आईडी कार्ड को लेकर सियासी संग्राम मच गया है. एनडीए ने तेजस्वी यादव पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है. तेजस्वी यादव ने एक दिन पहले ही चुनाव आयोग पर मतदाता सूची से अपना नाम गायब करने की बात कही थी. हालांकि, चुनाव आयोग ने उनके दावे को खारिज करते हुए कहा कि उनका नाम मतदाता सूची में मौजूद है. लेकिन अब उनके दो वोटर आईडी कार्ड की खबर ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है. भारत में दो वोटर आईडी कार्ड रखना रेप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1950 की धारा 31 के तहत अपराध माना जाता है. इसके अलावा, भारतीय न्याय संहिता और पुराने इंडियन पीनल कोड की धारा 171F इस तरह के चुनावी अपराधों के लिए सजा का प्रावधान करती है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि दो वोटर आईडी रखने या गलत जानकारी देकर मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने पर क्या तेजस्वी यादव फंस जाएंगे? क्या भारतीय कानून में दो वोटर आईडी कार्ड रखना गैरकानूनी है?
इलेक्शन कमीशन भारत में दो-दो जगहों पर या दो EPIC नंबर रखने पर या दोहरे पंजीकरण के दोषी पाए जाने पर मतदाता सूची से नाम हटा सकता है. गंभीर मामलों में वोटिंग अधिकार अस्थायी रूप से निलंबित भी कर सकता है. चुनाव आयोग ने अपने वेबसाइट पर इस संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि किसी के पास दो वोटर आईडी हैं तो उसे फॉर्म 7 भरकर एक कार्ड रद्द करना होगा. यह फॉर्म ऑनलाइन https://voters.eci.gov.in या स्थानीय निर्वाचन कार्यालय में उपलब्ध है.
चुनाव आयोग ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है. आयोग के एक बयान में कहा गया कि यदि दोहरे पंजीकरण का मामला सिद्ध होता है तो यह गंभीर चुनावी अपराध माना जाएगा. तेजस्वी ने सफाई दी कि दूसरा वोटर कार्ड पिछले 10 सालों से निष्क्रिय है, लेकिन आयोग ने इसे अवैध रूप से प्राप्त करने की संभावना से इनकार नहीं किया है. चुनाव आयोग के पूर्व मुख्य आयुक्त नवीन चावला ने इस मामले पर कहा, ‘दो वोटर आईडी रखना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि यह मतदाता सूची की शुचिता को भी प्रभावित करता है. बिहार में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का मकसद ऐसी अनियमितताओं को दूर करना है. तेजस्वी यादव के मामले में यदि दूसरा कार्ड अवैध पाया जाता है तो उनके खिलाफ धारा 171F के तहत कार्रवाई हो सकती है. हालांकि, आयोग को यह सुनिश्चित करना होगा कि जांच निष्पक्ष हो क्योंकि यह सियासी रूप से संवेदनशील है.’

बिहार में 65.64 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने के बाद पहले से ही सियासी माहौल गर्म है. तेजस्वी यादव का यह मामला राजद के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है. विपक्ष का दावा है कि SIR प्रक्रिया उनके वोट बैंक को निशाना बना रही है, और अब तेजस्वी का यह विवाद बीजेपी-जेडीयू गठबंधन को हमलावर होने का मौका दे रहा है. यदि तेजस्वी के खिलाफ कार्रवाई होती है तो यह 2020 के करीबी नतीजों औसत जीत का अंतर 16,825 वोट वाली सीटों पर महागठबंधन की रणनीति को प्रभावित कर सकता है. इस बीच तेजस्वी यादव के दो वोटर आईडी कार्ड का मामला बिहार चुनाव से पहले एक बड़ा सियासी मुद्दा बन गया है. आयोग ने स्पष्ट किया है कि वह संवैधानिक प्रावधानों आर्टिकल 326 और रेप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1950 के तहत कार्रवाई करेगा.
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने शनिवार को पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि उनका नाम वोटर लिस्ट से गायब है. उन्होंने अपने फोन को स्क्रीन से जोड़कर EPIC नंबर RAB2916120 डालकर दिखाया, जिसके बाद ‘कोई रिकॉर्ड नहीं मिला’ का संदेश आया. इस पर तेजस्वी यादव ने कहा, मेरा नाम नहीं है तो मैं चुनाव कैसे लड़ूंगा? यह लोकतंत्र की हत्या है”. उन्होंने चुनाव आयोग पर बीजेपी के इशारे पर काम करने का भी आरोप लगा दिया. लेकिन, इसके बाद चुनाव आयोग ने तेजस्वी के दावे को ‘भ्रामक और तथ्यहीन’ करार दिया. आयोग ने स्पष्ट किया कि तेजस्वी का नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में सीरियल नंबर 416, बूथ 204 (वेटरनरी कॉलेज, पटना) पर दर्ज है और उनका EPIC नंबर RAB0456228 है. इसका उपयोग उन्होंने 2020 के चुनाव में भी किया था. चुनाव आयोग ने कहा कि तेजस्वी द्वारा बताया गया दूसरा EPIC नंबर RAB2916120 अस्तित्व में नहीं है. अब निर्वाचन आयोग ने इसकी जांच शुरू कर दी है और दो वोटर आईडी होने पर FIR की चेतावनी दी है. अब इसको लेकर राजनीति गर्म हो गई है.

जेडीयू-बीजेपी का पलटवार

राजद नेता तेजस्वी यादव के दावे के बाद सत्तारूढ़ जेडीयू और बीजेपी ने तीखा हमला बोला. उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने X पर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट का स्क्रीनशॉट साझा कर तेजस्वी का नाम और फोटो दिखाते हुए कहा, तेजस्वी यादव को सर्च करने की योग्यता नहीं. बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीया ने भी X पर लिखा, तेजस्वी का दावा फर्जी है. उनका नाम सूची में है. यह मतदाताओं को गुमराह करने की कोशिश है. जेडीयू नेता नीरज कुमार ने इसे ‘राजनीतिक धोखाधड़ी’ करार दिया.

सियासी घमासान और आरोप-प्रत्यारोप

तेजस्वी यादव के दावे ने बिहार में सियासी पारा चढ़ा दिया है. राजद प्रवक्ता चितरंजन गगन ने दावा किया कि चुनाव आयोग ने तेजस्वी का EPIC नंबर बिना सूचना बदला गया है. वहीं, विपक्ष ने विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया पर सवाल उठाए जिसमें 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए. तेजस्वी यादव ने कहा, हर विधानसभा से 25-30 हजार नाम हटाए गए. यह गरीबों और प्रवासियों को वोटिंग से वंचित करने की साजिश है. दूसरी ओर, बीजेपी ने इसे मतदाता सूची की शुद्धता के लिए जरूरी कदम बताया.
तेजस्वी का दावा और आयोग का खंडन अब सवाल खड़े कर रहा है. अगर दूसरा EPIC नंबर गलत है तो तेजस्वी यादव ने इसे प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्यों इस्तेमाल किया? क्या यह सियासी ड्रामा था या वास्तव में यह गलती है? यह तो चुनाव आयोग की जांच से यह साफ होगा, लेकिन फिलहाल तेजस्वी के दावे ने उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठा दिए हैं. बिहार विधानसभा चुनाव से पहले यह विवाद राजद के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकता है.

एनडीए ने तेजस्वी पर एफआईआर की मांग की.

बिहार की राजनीति में तेजस्वी यादव के दो वोटर आईडी कार्ड को लेकर सियासी संग्राम मच गया है. एनडीए ने तेजस्वी यादव पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है. तेजस्वी यादव ने एक दिन पहले ही चुनाव आयोग पर मतदाता सूची से अपना नाम गायब करने की बात कही थी. हालांकि, चुनाव आयोग ने उनके दावे को खारिज करते हुए कहा कि उनका नाम मतदाता सूची में मौजूद है. लेकिन अब उनके दो वोटर आईडी कार्ड की खबर ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है. भारत में दो वोटर आईडी कार्ड रखना रेप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1950 की धारा 31 के तहत अपराध माना जाता है. इसके अलावा, भारतीय न्याय संहिता और पुराने इंडियन पीनल कोड की धारा 171F इस तरह के चुनावी अपराधों के लिए सजा का प्रावधान करती है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि दो वोटर आईडी रखने या गलत जानकारी देकर मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने पर क्या तेजस्वी यादव फंस जाएंगे? क्या भारतीय कानून में दो वोटर आईडी कार्ड रखना गैरकानूनी है?
इलेक्शन कमीशन भारत में दो-दो जगहों पर या दो EPIC नंबर रखने पर या दोहरे पंजीकरण के दोषी पाए जाने पर मतदाता सूची से नाम हटा सकता है. गंभीर मामलों में वोटिंग अधिकार अस्थायी रूप से निलंबित भी कर सकता है. चुनाव आयोग ने अपने वेबसाइट पर इस संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि किसी के पास दो वोटर आईडी हैं तो उसे फॉर्म 7 भरकर एक कार्ड रद्द करना होगा. यह फॉर्म ऑनलाइन https://voters.eci.gov.in या स्थानीय निर्वाचन कार्यालय में उपलब्ध है.
चुनाव आयोग ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है. आयोग के एक बयान में कहा गया कि यदि दोहरे पंजीकरण का मामला सिद्ध होता है तो यह गंभीर चुनावी अपराध माना जाएगा. तेजस्वी ने सफाई दी कि दूसरा वोटर कार्ड पिछले 10 सालों से निष्क्रिय है, लेकिन आयोग ने इसे अवैध रूप से प्राप्त करने की संभावना से इनकार नहीं किया है. चुनाव आयोग के पूर्व मुख्य आयुक्त नवीन चावला ने इस मामले पर कहा, ‘दो वोटर आईडी रखना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि यह मतदाता सूची की शुचिता को भी प्रभावित करता है. बिहार में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का मकसद ऐसी अनियमितताओं को दूर करना है. तेजस्वी यादव के मामले में यदि दूसरा कार्ड अवैध पाया जाता है तो उनके खिलाफ धारा 171F के तहत कार्रवाई हो सकती है. हालांकि, आयोग को यह सुनिश्चित करना होगा कि जांच निष्पक्ष हो क्योंकि यह सियासी रूप से संवेदनशील है.’

बिहार में 65.64 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने के बाद पहले से ही सियासी माहौल गर्म है. तेजस्वी यादव का यह मामला राजद के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है. विपक्ष का दावा है कि SIR प्रक्रिया उनके वोट बैंक को निशाना बना रही है, और अब तेजस्वी का यह विवाद बीजेपी-जेडीयू गठबंधन को हमलावर होने का मौका दे रहा है. यदि तेजस्वी के खिलाफ कार्रवाई होती है तो यह 2020 के करीबी नतीजों औसत जीत का अंतर 16,825 वोट वाली सीटों पर महागठबंधन की रणनीति को प्रभावित कर सकता है. इस बीच तेजस्वी यादव के दो वोटर आईडी कार्ड का मामला बिहार चुनाव से पहले एक बड़ा सियासी मुद्दा बन गया है. आयोग ने स्पष्ट किया है कि वह संवैधानिक प्रावधानों आर्टिकल 326 और रेप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1950 के तहत कार्रवाई करेगा.
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