रैपिड एक्शन मोड में नजर आ रहीं दिल्ली की नई मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बीचे 24 घंटों में कई बड़े और अहम फैसले लिए हैं. बात पूर्व मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों के व्यक्तिगत स्टाफ की सेवाओं को खत्म करने की हो, या फिर सभी अधिकारियों को उनके मूल विभाग में भेजने का निर्णय हो, रेखा सरकार ने साफ कर दिया है कि किसी भी तरह के सख्त निर्णय लेने में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी.
शुक्रवार दोपहर होते-होते पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों की पेशी मुख्यमंत्री के सामने हो गई. पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को मानसून से पहले दिल्ली के सड़कों की हालत सुधारने और नालों की सफाई का अल्टीमेटम दे दिया गया. चढ़ते दिन के साथ आयुष्मान भारत योजना को लेकर भी बड़ा फैसला हो गया. तय किया गया कि राजधानी में आयुष्मान भारत योजना लागू करने के साथ सभी मोहल्ला क्लीनिक को अपग्रेड किया जाएगा.
वादों को पूरा करने जुटीं सीएम रेखा
साथ ही, इन मोहल्ला क्लीनिक को आने वाले समय में अर्बन आयुष्मान आरोग्य मंदिर के नाम से जाना जाएगा. इसके अलावा, यमुना और उसकी सफाई को लेकर नई सरकार की नजर आ रही संवेदना भी यह बताने के लिए काफी है कि चुनाव से पहले किए गए किसी भी वादे को अमलीजामा पहनाने में दिल्ली की नई बीजेपी सरकार कोई देरी नहीं करना चाहती है. तो लाजमी है कि कल की तरह आज भी कुछ खास और बड़े निर्णय रेखा सरकार की तरफ से लिए जाएं.
केजरीवाल के फैसले पर फिलहाल चुप्पी
हालांकि, इस बीच मुख्यमंत्री रहते अरविंद केजरीवाल द्वारा लिए गए एक फैसले को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता अभी थोड़ा तसल्ली में नजर आ रही हैं. ऐसा हो नहीं सकता कि अरविंद केजरीवाल की तरफ से लिए गए इस फैसले की तरफ उनका ध्यान न गया हो, लेकिन इस मुद्दे पर फैसला लेना किसी के लिए भी आसान नहीं है. दरअसल, यह मुद्दा दिल्ली के मुख्यमंत्री ऑफिस में उनकी कुर्सी के पीछे लगी दो तस्वीरों से जुड़ा है.
सीएम दफ्तर में रहेगी किसकी फोटो
इसमें एक तस्वीर डॉ बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर की है और दूसरी तस्वीर शहीद सरदार भगत सिंह की है. इसमें एक दलित समाज के प्रेरणाश्रोत हैं, तो दूसरे देश के नौजवानों के लिए आदर्श. अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री बनने के बाद इन दोनों तस्वीरों को अपनी कुर्सी के पीछे की दीवार में लगवाया था. उनके मुख्यमंत्री बनने से पहले इस जगह पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की फोटो होती थी. देश के बाकी मुख्यमंत्रियों के दफ्तर को देखें तो वहां भी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की फोटो नजर आती है.
सब की निगाह सीएम की कुर्सी के पीछे टिकी
ऐसे में देखना यह है कि रेखा गुप्ता पुरानी परंपरा का पालन करती हैं या फिर अरविंद केजरीवाल के निर्णय को सही मान आगे बढ़ने का फैसला लेती है. कोई कुछ भी कहे, दिल्ली की नई मुख्यमंत्री के लिए पुरानी परंपरा और केजरीवाल के निर्णय में किसी एक को चुनना सांप के मुंह में छछूंदर जैसी स्थिति है, न ही उगलते बनती है और ना ही निगलते बनती है. अब इन तस्वीरों पर निर्णय को लेकर नकेवल आम आदमी पार्टी बल्कि दिल्ली की जनता भी नजर लगाए बैठी है.







