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आज से आचार संहिता होगी लागू , लगने से क्या क्या बदलेगा…….

UB India News by UB India News
March 17, 2024
in खास खबर
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आज से आचार संहिता होगी लागू , लगने से क्या क्या बदलेगा…….

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चुनाव आयोग शनिवार को शाम 3 बजे लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान  कर दिया . माना जा रहा है कि पिछली बार की तरह इस बार भी 7 चरणों में लोकसभा चुनाव कराए जा सकते हैं. चुनाव आयोग ने 2019 में 10 मार्च को लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया था.  11 अप्रैल से 19 मई तक 7 चरणों में देशभर में मतदान हुआ था. नतीजे 23 मई को आए थे. चुनाव आयोग के तारीखों का ऐलान करते हुए देशभर में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी. आचार संहिता लागू होने के बाद सरकार के सामान्य कामकाज में महत्वपूर्ण बदलाव आ जाएगा.

कितने चरणों में हो सकते हैं चुनाव?

माना जा रहा है कि इस बार लोकसभा चुनाव 7-8 चरणों में हो सकते हैं. 2019 में चुनाव आयोग ने 7 चरणों में चुनाव कराए थे. जबकि 2014 में 7 अप्रैल 2014 से 12 मई 2014 के मध्य 9 चरणों में चुनाव हुए थे. जबकि नतीजे 16 मई को आए थे.

क्या होती है आदर्श आचार संहिता?

चुनाव आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए संवैधानिक अधिकार के तहत आदर्श आचार संहिता लागू करती है. इसके तहत राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए कुछ मानदंड तय किए जाते हैं. आचार संहिता का उद्देश्य सभी के लिए समान अवसर तैयार करना है.

आचार संहिता लागू होने के बाद क्या क्या बदल जाएगा?

आचार संहिता लागू होने के बाद सरकारी योजना की घोषणा या फिर शिलान्यास पर रोक रहेगी.

– लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा होने के बाद सरकारी अधिकारियों को छोड़कर कोई भी शिलान्यास या किसी भी प्रकार की परियोजनाओं या योजनाओं को शुरू नहीं कर सकता.

– आचार संहिता के दौरान चुनावी प्रक्रिया से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े सभी अधिकारियों/कर्मचारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग पर रोक रहेगी. केवल चुनाव आयोग की इजाजत पर अधिकारियों की ट्रांसफर पोस्टिंग हो सकती है.

– पार्टी की उपलब्धियों के विज्ञापन सरकारी खर्च पर नहीं दे सकते.

आदर्श आचार संहिता (MCC) क्या है?

देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग के बनाए गए नियमों को ही आचार संहिता कहते हैं। आदर्श आचार संहिता (MCC) के तहत, कुछ नियम हैं जिनका राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों को पालन करना अनिवार्य हैं। इसके उल्लंघन की स्थिति में चुनाव आयोग कड़ी कार्रवाई करता है।

आदर्श आचार संहिता लागू होने से क्या बदलेगा?

• आदर्श आचार संहिता लगने पर सरकार की कार्य क्षमता सीमित हो जाती है, जैसे कि सरकार, सरकारी घोषणा नहीं कर सकती है। इतना ही नहीं, मंत्रियों और अन्य अधिकारियों को किसी भी वित्तीय अनुदान की घोषणा करने या उसके वादे करने से मनाही होती है।

• किसी भी नेता या मंत्री को शिलान्यास करने, लोकार्पण करने या किसी भी प्रकार की परियोजनाओं या योजनाओं को शुरू करने से भी प्रतिबंधित कर दिया जाता

• आदर्श आचार संहिता लागू होते ही राज्यों और केंद्र सरकार के कर्मचारी चुनावी प्रक्रिया पूरी होने तक सरकार के नहीं, बल्कि चुनाव आयोग के कर्मचारी की तरह काम करते हैं।

• आचार संहिता लागू होने के बाद सार्वजनिक धन का इस्तेमाल किसी ऐसे आयोजन में नहीं किया जा सकता जिससे किसी विशेष दल को फ़ायदा पहुंचता हों।

• सरकारी गाड़ी, सरकारी विमान या सरकारी बंगला का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए नहीं किया जा सकता है।

• किसी भी पार्टी, प्रत्याशी या समर्थकों को रैली या जुलूस निकालने या चुनावी सभा करने की पूर्व अनुमति पुलिस से लेना अनिवार्य होता है।

• कोई भी राजनीतिक दल जाति या धर्म के आधार पर मतदाताओं से वोट नहीं मांग सकता है।

आचार संहिता के उल्लंघन पर चुनाव आयोग क्या कर सकता है?

यदि कोई प्रत्याशी या राजनीतिक दल आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करता है तो चुनाव आयोग नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है। ये चुनाव आयोग पर है कि वह उम्मीदवार को चुनाव लड़ने से रोक सकता है या नहीं। इतना ही नहीं चुनाव आयोग आचार संहिता का उल्लंघन करने पर आपराधिक मुकदमा भी दर्ज करा सकता है। आचार संहिता के उल्लंघन में जेल जाने तक के प्रावधान भी हैं।

2019 में कब हुआ था तारीखों का ऐलान

चुनाव आयोग ने पिछली बार 10 मार्च को लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया था. इस बार 16 मार्च यानी पिछले साल की तुलना में 6 दिन देरी से चुनाव तारीखों का ऐलान हो रहा है.

पिछली बार कितने चरण में चुनाव हुए थे

2019 में 11 अप्रैल से 19 मई तक 7 चरणों में देशभर में मतदान हुआ था. वहीं, 2014 में 7 अप्रैल 2014 से 12 मई 2014 के मध्य 9 चरणों में वोटिंग हुई थी.

 कब किस राज्य में चुनाव हुए थे?

पहला चरण- 11 अप्रैल को पहले चरण में 20 राज्यों की 91 सीटों पर मतदान हुआ था. 11 अप्रैल 2019 को आंध्र प्रदेश (सभी 25 सीटें), अरुणाचल प्रदेश (2), असम ( 5), बिहार (4), छत्तीसगढ़ (1 ), जम्मू-कश्मीर(2), महाराष्ट्र (7), मणिपुर (1) मेघालय (2), मिजोरम (1), नगालैंड (1), ओडिशा (4), सिक्किम (1), तेलंगाना(17), त्रिपुरा (1), उत्तर प्रदेश (8), उत्तराखंड (5), पश्चिम बंगाल (2), अंडमान एवं निकोबार(1), लक्षद्वीप(1) में मतदान हुआ था.

दूसरा चरण- 18 अप्रैल को 13 राज्यों की 97 सीट पर मतदान हुआ था. इस दिन असम (5), बिहार (5), छत्तीसगढ (3), जम्मू-कश्मीर (2), कर्नाटक (14), महाराष्ट्र (10), मणिपुर (1), ओडिशा (5), तमिलनाडु (39), त्रिपुरा (1), उत्तर प्रदेश (8), पश्चिम बंगाल (3), पुदुच्चेरी (1) में वोटिंग हुई थी.

तीसरा चरण- 23 अप्रैल को 14 राज्यों की 115 सीट पर मतदान हुआ था. इस दिन असम (4), बिहार (5), छत्तीसगढ़ (7), गुजरात (26), गोवा (2), जम्मू-कश्मीर (1)*, कर्नाटक (14), केरल (20), महाराष्ट्र (14), ओडिशा (6), उत्तर प्रदेश (10), पश्चिम बंगाल (5), दादर एवं नगर हवेली (1) , दमन एवं दीव (1) सीट पर मतदान हुआ था.

चौथा चरण- 29 अप्रैल को 9 राज्य की 71 सीटों पर मतदान हुआ था. इस दिन बिहार (5), जम्मू-कश्मीर (1)*, झारखंड (3), मध्य प्रदेश (6), महाराष्ट्र (17), ओडिशा (6), राजस्थान (13), उत्तर प्रदेश (13), पश्चिम बंगाल (8)में वोट डाले गए थे.

पांचवां चरण- 6 मई को 7 राज्यों की 51 सीट पर वोटिंग हुई थी.  इस दिन बिहार (5), जम्मू-कश्मीर (2)*, झारखंड (4), मध्य प्रदेश (7), राजस्थान (12), उत्तर प्रदेश (14), पश्चिम बंगाल (7) में मतदान हुआ था.

छठवां चरण- 12 मई को 7 राज्यों की 59 सीट पर मतदान हुआ था. इस दिन बिहार (8), हरियाणा (10), झारखंड (4), मध्य प्रदेश (8), उत्तर प्रदेश (14), पश्चिम बंगाल (8), दिल्ली (7) की सीटों पर मतदान हुआ था.

सातवां चरण- 19 मई को 8 राज्यों की 59 सीटों पर मतदान हुआ था. इस दिन बिहार (8), झारखंड (3), मध्य प्रदेश (8), पंजाब (13),पश्चिम बंगाल (9), चंडीगढ़ (1), उत्तर प्रदेश (13), हिमाचल प्रदेश (4) पर मतदान हुआ था.

7- 2019 में कितने वोटर थे?

2019 के लोकसभा चुनाव में 90 करोड़ वोटर थे. हालांकि, इनमें से 67.11 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट किया था. इनमें से 46.8 करोड़ पुरुष और 43.2 करोड़ महिला वोटर थीं. 2014 की तुलना में 2019 में 8.4 करोड़ मतदाता बढ़े थे. इनमें से 1.5 करोड़ मतदाता 18 से 19 साल का था. 2014 में 81 करोड़ वोटर थे.

8- 2019 में क्या नतीजे थे?

2019 लोकसभा चुनाव में NDA को 351, जबकि यूपीए को 90 सीटों पर जीत मिली थी. बीजेपी ने अकेले इस चुनाव में 303 सीटों पर जीत हासिल की थी. जबकि कांग्रेस को 52 सीटों पर जीत मिली थी. जबकि टीएमसी ने 22 सीटों पर जीत हासिल की थी. पिछले चुनाव में शिवसेना NDA में शामिल थी, तब पार्टी ने 18 सीटों पर जीत हासिल की थी. वहीं नीतीश की जदयू को 16 सीटों पर जीत मिली थी. तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके ने 23 सीटों पर जीत हासिल की थी.

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