बजट 2023 पेश होने के बाद अब संसद में घमासान देखने को मिल सकता है। आज कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने चीन के साथ बॉर्डर के हालात पर चर्चा के लिए लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। यही नहीं, अडानी एंटरप्राइजेज के खिलाफ हिंडनबर्ग रिपोर्ट पर भी चर्चा के लिए विपक्षी सांसद चर्चा करना चाहते हैं और दो सांसदों ने स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। CPI(M) राज्यसभा सांसद डॉ. वी शिवदासन ने भी रूल 267 के तहत हिंडनबर्ग रिपोर्ट पर चर्चा के लिए नोटिस दिया है। बजट की घोषणाओं को सुनकर भाजपा के नेता इसकी तारीफ कर रहे हैं, वहीं पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने इसे संवेदनहीन बजट बताया है और कहा कि इसने ज्यादा लोगों की उम्मीदों को ठेस पहुंचाई है।
प्रश्नकाल शुरू होते ही हंगामा। स्पीकर ओम बिरला ने विपक्षी सांसदों से कहा कि आप सदन की मर्यादा को लांघ रहे हैं। उन्होंने सभी सदस्यों को अपनी सीट पर जाने को कहा तो फिर शोर शराबा बढ़ गया। बिरला ने कहा कि प्रश्नकाल सदन का महत्वपूर्ण समय होता है। इसके बाद भी शोरशराबा नहीं थाम, तो लोकसभी का कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित हो गई।
संसद पहुंचने से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टॉप मंत्रियों के साथ बैठक की। समझा जाता है कि विपक्ष के हमले रोकने के लिए बनी रणनीति। उधर, विपक्षी दलों के नेताओं ने भी आज के लिए रणनीति बना ली थी।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि हमने LIC, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा बाजार मूल्य खोने वाली कंपनियों में निवेश के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए नियम 267 के तहत बिजनेस नोटिस दिया है। करोड़ों भारतीयों की कमाई आज खतरे में है।
कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने केंद्रीय बजट 2023 पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा आम लोगों को सुविधाएं देना सरकार का कर्तव्य है, लेकिन यह सरकार ‘जेब कटुआ’ सरकार बन गई है. यह सरकार हमारी जेब से 1000 रुपये लेती है और हमें 200 रुपये देती है. दिखाती है कि वह हमें दान दे रही है, जबकि यह हमारा अधिकार है.
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को केंद्रीय बजट को ‘निराशाजनक’ करार दिया और आरोप लगाया कि विशेष दर्जे और 20,000 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज जैसी मांगों पर ध्यान नहीं दिए जाने से राज्य की ‘उपेक्षा’ की गई. नीतीश कुमार, जो अपनी समाधान यात्रा के लिए उत्तर बिहार जिले सुपौल में थे, देर शाम पटना लौटने पर बजट पर एक लिखित बयान जारी किया.
सत्तारूढ़ भाजपा ने केंद्रीय बजट को एक ‘सर्व-समावेशी’ दस्तावेज के रूप में सराहा, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दूरदर्शी’ नेतृत्व में एक नया भारत बनाने की राह दिखाता है. जबकि विपक्ष ने इसे ‘जनविरोधी’ और ‘जुमला’ के रूप में खारिज कर दिया. विपक्षी दलों का मानना है कि बजट में नौकरियां पैदा करने और महंगाई पर काबू पाने के उपायों के बारे में कोई चर्चा नहीं है. आर्थिक रूप से विवेकपूर्ण रहने और जनता की उम्मीदों को भी पूरा करने की कठिन चुनौती के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में व्यक्तिगत आयकर छूट की सीमा बढ़ाने की घोषणा की, छोटी बचत पर छूट दी और पिछले एक दशक में पूंजीगत व्यय में सबसे बड़ी बढ़ोतरी का भी ऐलान किया.
बजट प्रस्तावों ने भाजपा और विपक्ष के बीच ‘अमृत काल’ बनाम ‘मित्र काल’ की बहस भी छेड़ दी. पीएम मोदी ने कहा कि यह बजट गरीबों और मध्यम वर्ग सहित एक आकांक्षी समाज के सपनों को पूरा करने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है. वहीं, राहुल गांधी का दावा है कि यह बजट केवल अमीरों की परवाह करता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय बजट को ‘ऐतिहासिक’ बताते हुए कहा कि मध्यम वर्ग को सशक्त करने के लिए सरकार ने बीते वर्षों में कई अहम फैसले लिए हैं, जिससे ईज ऑफ लिविंग सुनिश्चित हुआ है.






