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मंदार से कांग्रेस की अमृत-खोज, लेकिन अमृत आसान नहीं!

UB India News by UB India News
January 7, 2023
in कांग्रेस, खास खबर, बांका, संपादकीय
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मंदार से कांग्रेस की अमृत-खोज, लेकिन अमृत आसान नहीं!
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कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह और अन्य राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के नेताओं ने मंदार पर्वत से बिहार में भारत जोड़ा यात्रा शुरू की। यह यात्रा 20 जिलों से गुजरेगी जिसमें 1200 किमी की दूरी तय होगी।

मंदार पर्वत का इतिहास बताएं कि यह वही पहाड़ है जिसका इस्तेमाल देवताओं और दानवों ने समुद्र मंथन में किया था। अब इसी मंदार से कांग्रेस ने अमृत-खोज शुरू की है, लेकिन अमृत आसान नहीं! इस यात्रा में देश की सबसे पुरानी पार्टी को क्या हासिल होगा….

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कुछ तो यह भी कहते हैं कि यहीं पर देवताओं और दानवों ने अमृत मंथन किया था। मंथन में जब अमृत निकला तो भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार लेकर छल से देवताओं के बीच अमृत का बंटवारा किया। लेकिन राहु नाम के दैत्य ने धोखे से देवताओं की कतार में शामिल होकर अमृत ले लिया। विष्णु को पता चला तो उन्होंने राहु पर सुदर्शन चक्र चला दिया। राहु का सिर धड़ से अलग हो गया। लेकिन दोनों जीवित रहे। सिर वाला भाग राहु और धड़ वाला केतु कहलाया।

करीब साल भर पहले CM नीतीश कुमार ने मंदार पर्वत पर रोपवे का उद्घाटन किया था।
करीब साल भर पहले CM नीतीश कुमार ने मंदार पर्वत पर रोपवे का उद्घाटन किया था।

14 चीजें जो अमृत मंथन में निकली थीं

अमृत मंथन में देवताओं-दानवों को 14 बेशकीमती चीजें प्राप्त हुई थीं। इसमें सबसे चर्चित था अमृत। वे 14 चीजें यही थीं 1. कालकूट, 2. कामधेनु गाय, 3. मन की गति से दौड़ने वाला उच्चैःश्रवा घोड़ा, 4. ऐरावत हाथी, 5. सभी इच्छा पूरी करने वाला कल्पवृक्ष, 6. माता लक्ष्मी, 7. चन्द्रमा, 8. शंख, 9. कौस्तुभ मणि, 10. अप्सरा, 11. वारुणी, 12. पारिजात का फूल, 13. भगवान, 14. अमर बना देने वाला अमृत।

भाजपा पर निशाना साधते रहे मल्लिकार्जुन खड़गे

अब कांग्रेस के ‘अमृत मंथन’ पर बात करें तो देश की राजनीति में कांग्रेस के लिए कौन सी पार्टी ‘राहु’ है और कौन पार्टी ‘केतु’ है, यह राजनीतिक कार्यकर्ता जानते हैं। कांग्रेस यहां वर्ष 2024 के लोक सभा चुनाव और 2025 के विधान सभा चुनाव के लिए अमृत लेने आई है।

यहां बता दें कि प्रदेश अध्यक्ष बनने से पहले बिहार कांग्रेस में इलेक्शन कॉर्डिनेशन कमिटी के चेयरमैन अखिलेश प्रसाद सिंह थे। राष्ट्रीय अध्यक्ष खड़गे मंदार आए तो अपने भाषण में ज्यादा समय उन्होंने पीएम नरेन्द्र मोदी को निशाने पर लेने में बिताया। उन्होंने लोगों से पूछा – दो करोड़ लोगों को नौकरी मिली क्या? कहा – यहां पर कोई कल कारखाना नहीं है कि युवकों को काम मिल सके। आज की सरकार नफरत का मार्ग दिखाती है।

उन्होंने महंगाई का सवाल उठाया कि वह आसमान छू रही है और लोगों की आर्थिक स्थिति दिनों दिन कमजोर होती जा रही है। कांग्रेस ने जम्हूरित को बचाने का काम किया है।

खड़गे ने मंदार में दिए अपने भाषण में ज्यादा समय पीएम नरेन्द्र मोदी को निशाने पर लेने में बिताया।
खड़गे ने मंदार में दिए अपने भाषण में ज्यादा समय पीएम नरेन्द्र मोदी को निशाने पर लेने में बिताया।

निशाना भाजपा पर लेकिन राजद-जदयू को दिखाते रहे ताकत

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तारिक अनवर, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा, विधायक दल के नेता अजीत शर्मा आदि ने मंदार में भाषण दिया। ज्यादातर नेताओं ने अपने भाषण में भाजपा पर निशाना साधा।

कांग्रेस की पूरी यात्रा और कार्यक्रम की रुपरेखा यही बताती रही कि कांग्रेस अपनी ताकत महागठबंधन के अपने साथियों को दिखाने में लगी है। हालांकि खड़गे ने प्रदेश के कांग्रेसियों सहित महागठबंधन की पार्टी के बीच यह कहकर बड़ा संदेश दिया कि बिहार में गठबंधन रहेगा और मजबूती से रहेगा।

बता दें कि महागठबंधन में ताकतवर पार्टियां आरजेडी, जेडीयू, कांग्रेस और माले हैं। बिहार विधान सभा चुनाव में कांग्रेस ने जिद करके 70 सीटें लीं और उसमें जीत महज 19 पर हासिल कर पाई। उसके बाद से राजद और कांग्रेस के बीच रिश्ते में खटास आ गई।

आरजेडी के कई नेताओं ने कहा भी था कि 70 सीटों पर चुनाव लड़ बेहतर परिणाम कांग्रेस देती तो तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री बनते। उपचुनावों के बाद आरजेडी ने कांग्रेस को तो जैसे अलग-थलग ही कर दिया था। बिना पूछे कांग्रेस की सीट पर भी उम्मीदवार दे दिया। नई सरकार नीतीश और तेजस्वी की बनी तो कांग्रेस से दो मंत्री बनाए गए।

कांग्रेस की पूरी यात्रा और कार्यक्रम की रुपरेखा यही बताती रही कि कांग्रेस अपनी ताकत महागठबंधन के अपने साथियों को दिखाने में लगी है।
कांग्रेस की पूरी यात्रा और कार्यक्रम की रुपरेखा यही बताती रही कि कांग्रेस अपनी ताकत महागठबंधन के अपने साथियों को दिखाने में लगी है।

यात्रा में अंग की अंगिका के हक की बात नहीं?

बिहार में कांग्रेस की यह यात्रा मंदार पर्वत से शुरू हुई। यह अंग का क्षेत्र है। अंग की भाषा अंगिका को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर कई बार आंदोलन हो चुका है। गौतम सुमन ने तो पटना में आमरण अनशन तक किया था। उनके अलावा फणीश्वर नाथ रेणु, लखन लाल पाठक, गजाधर अम्बष्ठ, लक्ष्मीनारायण सुधांशु, परमानंद पांडेय, नरेश पांडेय चकोर, डॉ. तेजनारायण कुशवाहा, सतीश चंद्र सिंहा, डॉ. रामजी सिंह, सुमन सुरो, कमला प्रसाद बेखबर, मधुकर गंगाधर, डॉ. अमरेन्द्र, रंजन आदि कई लेखकों ने किसी ने किसी तरह के अंगिका आंदोलन को आगे बढ़ाया। इनकी मांग जारी है।

विधान सभा में भी इसकी मांग उठी, लेकिन न तो राष्ट्रीय अध्यक्ष खड़गे ने अंगिका की चर्चा की, न प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने। अजीत शर्मा को भाषण देने के लिए नहीं बल्कि धन्यवाद ज्ञापन को कहा गया। जबकि अजीत शर्मा कांग्रेस विधायक दल के नेता हैं और भागलपुर के विधायक हैं।

अजीत शर्मा ने भाजपा के रोहित पांडेय को विधान सभा चुनाव में हराया। अजीत शर्मा को 65,502 वोट मिले, जबकि रोहित पांडे को 64,389 वोट। अजीत शर्मा भागलपुर से दो बार चुनाव जीत चुके हैं। यह कार्यकर्ताओं ने भी महसूस किया कि अजीत शर्मा को भाषण देने का मौका देना डॉ. मदन मोहन को भाषण का मौका देने से ज्यादा जरूरी था।

बड़ी संख्या में उमड़े मुसलमान

इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मुसलमानों का उमड़ना बताता है कि मुसलमानों का झुकाव फिर से कांग्रेस की तरफ हो रहा है। यह महागठबंधन की पार्टी राजद के लिए बड़ा संकेत है। सवाल यह है कि क्या मुसलमानों को यह लगने लगा है कि मोदीराज से मुक्ति लालू-तेजस्वी, नीतीश कुमार के साथ मिलकर नहीं कर पाएंगे बल्कि यह कांग्रेस ही कर सकती है! यह भी संभव है कि मुसलमान अब समझने लगे हैं कि उनके लालू प्रसाद या जदयू के साथ रहने से कांग्रेस कमजोर हुई है और भाजपा मजबूत। बता दें बिहार में 16 फीसदी वोट बैंक मुसलमानों का है।

कार्यकर्ताओं के जोश को वोट बैंक में बदलने की चुनौती

वरिष्ठ पत्रकार ध्रुव कुमार कहते हैं कि मंदार से शुरू यात्रा से फायदा यह होगा कि कांग्रेस को लाखों लोगों से मिलने का मौका मिलेगा। लेकिन यह वोट में कितना बदल पाएगा, यह कहना मुश्किल है। हां कार्यकर्ताओं की सुस्ती खत्म हो रही है और जोश आ रहा है। कांग्रेस में गुटबाजी बहुत है। ऐसी यात्रा से उसमें कमी आएगी। बिहार कांग्रेस का पुराना गढ़ रहा है। मिथिलांचल में तो अच्छा वोट बैंक रहा। यात्रा से पुराने कांग्रेसियों को जुड़ने का मौका मिल रहा है। बड़े नेता और कार्यकर्ता के बीच दूरी घट रही है।

कांग्रेस के सामने 2024 का लोकसभा और 2025 का विधानसभा चुनाव है। यह यात्रा कांग्रेस को तभी अमृत दे सकती है, जब उसके पास उस इलाके के स्थानीय सवाल भी हों। सिर्फ भाजपा हटाओ नारा से कांग्रेस मजबूत नहीं होगी। कांग्रेस ने जब विधान सभा चुनाव में 70 में 19 पर जीत हासिल की तो तर्क दिया कि हमें कमजोर सीटें मिली। लेकिन अब कांग्रेस के पास समय है और वह यात्रा वाले इलाके में चुनाव के लिए बेहतर पहलवान तैयार कर सकती है।

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बिहार कांग्रेस की बांका के मंदार से 5 जनवरी को शुरू हुई भारत यात्रा 20 जिलों से गुजरने वाली है। ये बिहार में 1200 किमी की दूरी तय करने वाली है। एक तरफ राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा पर हैं और दूसरी तरफ बिहार आकर राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंदार से यात्रा की शुरुआत की है। शुरुआत कर खड़गे लौट चुके हैं। बिहार यात्रा की कमान प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह के हाथ है।

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