दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बीच फिर से टकराव की आशंका बढ़ गई है। शनिवार को उपराज्यपाल कार्यालय ने दिल्ली सरकार द्वारा उनकी मंजूरी के लिए भेजी गइ 47 फाइलों को बैरंग दिल्ली सरकार को लौटा दिया। शिक्षा और वक्फ बोर्ड़ से संबंधित फाइलें भी इन फाइलों में शामिल हैं‚ जिन पर मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर नहीं थे‚ बल्कि मुख्यमंत्री कार्यालय में पदस्थ अधिकारियों के हस्ताक्षर थे। ज्यादातर फाइलों पर मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी का नोट लगा है‚ जिसमें लिखा है कि मुख्यमंत्री ने इसे देख लिया है। उपराज्यपाल को इस स्थिति में इन फाइलों पर हस्ताक्षर करना औचित्यपूर्ण नहीं लगा। उपराज्यपाल कार्यालय के मुताबिक‚ शासन‚ प्रशासन और अत्यंत संवेदनशील मामलों में पारदर्शिता की बहाली जरूरी है। इन मुद्दों से जुड़़ी फाइलों की मंजूरी के बाद भ्रष्टाचार‚ गबन और असंवैधानिक जैसा कुछ होता है‚ तो हस्ताक्षरकर्ता अधिकारी को ही जिम्मेदार ठहराया जा सकेगा। मुख्यमंत्री खुद को पाक–साफ साबित होंगे। उपराज्यपाल सक्सेना ने कुछ दिन पहले २२ अगस्त को मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर कहा था कि उनके हस्ताक्षर के बिना कोईफाइल उपराज्यपाल कार्यालय नहीं भेजी जाए। उपराज्यपाल कार्यालय ने हैरत जताईहै कि चिट्ठी के बावजूद मुख्यमंत्री केजरीवाल ने फाइलों पर दस्तखत नहीं किए। राज्यपाल कार्यालय को लगता है कि दिल्ली सरकार जवाबदेही से बचने की कोशिश कर रही है। गौरतलब है कि १९९३‚ जब महानगर परिषद के स्थान पर दिल्ली को विधानसभा की शासन व्यवस्था मिली थी‚ के बाद से २०१३ तक उपराज्यपाल कार्यालय भेजी गइ फाइलों पर तत्कालीन मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर होते थे‚ लेकिन २०१४ के बाद से ऐसा नहीं हो रहा है। उपराज्यपाल कार्यालय द्वारा ४७ फाइलें लौटाए जाने से शंका है कि कहीं दो संवैधानिक प्राधिकारों के बीच खींचतान न शुरू हो जाए। ऐसा होना दिल्ली के आम नागरिक के लिए किसी भी दृष्टि से कल्याणकारी नहीं होगा। सरकार द्वारा जनकल्याण की योजनाओं और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के लिए जरूरी संसाधन तभी मुहैया कराए जा सकते हैं‚ जब उन्हें सक्षम प्राधिकार की मंजूरी मिली हो। कार्यक्रमों और योजनाओं के अच्छे से कार्यान्वयन ऐसे टकराव से निश्चित ही प्रभावित होंगे। जरूरी है कि टकराव टाला जाए नहीं तो जनाकांक्षाएं हठधर्मिता की भेंट चढ़ जाएंगी।
तीन पड़ाव, एक संदेश: हिंद-प्रशांत में बढ़ती कूटनीतिक ताकत………………
ऐसे समय में, जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता छोटे और मझोले देशों को नए रणनीतिक साझेदार तलाशने...







