जापान के सहयोग से बिहार के दुग्ध उत्पादकों के चेहरे होंगे लाल ……..

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जापान अन्तर्राष्ट्रीय सहकारी संस्थान (JICA),राष्ट्रीय डेयरी संस्थान आणंद (NDDB),भारत सरकार GOI एवम कोम्फेड (COMFED),के 16 सदस्यीय टीम ने मिथिला दुग्ध संघ समस्तीपुर डेयरी का भ्रमण किया , इसके साथ साथ सल्खनी फिरोजपुर पतैली एवम सराय रंजन समिति का भी अवलोकन किया .

संघ के प्रबंध निदेशक डीके श्रीवास्तव जापान अन्तर्राष्ट्रीय सहकारी संस्थान के टीम लीडर ताकुमी कुनिताके का संस्थान परिसर में स्वागत करते हुए

भारत एक कृषि प्रधान देश होने के साथ साथ 1998 से विश्व के दूध उत्पादक देशों में पहले स्थान पर है । संयुक्त राष्ट्र और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) की एक रिपोर्ट की माने तो आने वाले 10 वर्षों में भारत दुग्ध उत्पादन में दुनिया का सबसे बड़ा देश होने के साथ-साथ आबादी में भी दुनिया का सबसे बड़ा देश होगा। ओईसीडी-एफएओ एग्रीकल्चरल आउटलुक 2017-2026 के अनुसार अगले एक दशक में विश्व की आबादी 7.3 अरब से बढ़कर 8.2 अरब से ज्यादा हो जाएगी। इस आबादी में 56% हिस्सा भारत और उप-सहारा अफ्रीकी इलाकों में होगा। अनुमान है कि 2026 तक भारत की जनसंख्या 1.3 अरब से बढ़कर 1.5 अरब हो जाएगी और यह आबादी के लिहाज से चीन से आगे निकल जाएगा। आबादी बढ़ने के कारण यह क्षेत्र दुनिया में सबसे ज्यादा मांग पैदा करने वाले भी होंगे। रिपोर्ट के अनुसार 2026 में भारत का दुग्ध उत्पादन 49% बढ़ जाएगा। भारत के बाद यूरोपीय संघ दूसरे स्थान पर होगा। रिपोर्ट कि माने तो क्षेत्रीय और वैश्विक आधार पर भारत में उत्पादन में वृद्धि सबसे अधिक होगी ।

इसी के अनुरूप भारत सरकार ने अन्य विभागों के साथ साथ किसानो की आर्थिक समृधि के लिए 1970 से चले आ रहे ऑपरेशन फ्लड कार्यक्रम को आगे बढाते हुए “सहकारिताओं के माध्‍यम से डेयरी व्‍यवसाय-राष्‍ट्रीय डेयरी अवसंरचना योजना”के माध्यम से अगले 5 वर्षो में इनकी आय को दोगुना करने का लक्ष्‍य रखा है . इसके लिए केंद्रीय पशुपालन, डेयरी और मत्स्यपालन विभाग एवं राष्ट्रीय डेयरी विकास ने कार्य योजना का परियोजना तैयार किया है। इस परियोजना के लिए जापान की अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जाइका) से कुल 20,057 करोड़ रुपये का कर्ज न्यूनतम व्याज दर पर लिया जा रहा हैं। इस परियोजना के तहत भारत के 1.28 लाख गांवों में 121.83 लाख अतिरिक्त दूध उत्पादकों को सहायता दी जाएगी, ग्राम स्तर पर 524.20 लाख किलोग्राम दूध को रोजाना ठंडा रखने की क्षमता तैयार की जाएगी और 76.5 लाख किलो प्रतिदिन क्षमता वाला दुग्ध एवं दुग्ध उत्पाद प्रसंस्करण ढांचा तैयार किया जाएगा। इसके अलावा 20-30 वर्षों पहले बनाए गए पुराने दूध व दूध उत्पाद संयंत्रों का नवीनीकरण व विस्तार भी किया जाएगा। इससे 1.60 लाख मौजूदा किसानों को लाभ होगा। पूरी योजना का संचालन राष्‍ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड यानी एनडीडीबी कर रहा है ..

इस परियोजना के लिए जाईका मिशन ने इसी वर्ष फरवरी और मार्च महीने में भारत का दौरा भी किया था । इसके बाद परियोजना को अंतिम रूप देने के लिए दिल्ली में जापान के तातुमी कुनीतके की अध्‍यक्षता वाले प्रतिनिधिमंडल ने मई महीने में उच्चस्तरीय बैठक कर अंतिम प्रारूप दिए थे . इसके बाद जाइका और एनडीडीबी के साथ राज्य स्तरीय टीम ने देश के अलग अलग इलाको में मूल्‍यांकन तथा उसके क्रियान्वयन प्रक्रिया को शुरू किया है ।

इसी क्रम में जापान अन्तर्राष्ट्रीय सहकारी संस्थान ,राष्ट्रीय डेयरी संस्थान आणंद ,भारत सरकार एवम बिहार राज्य दूध को-ओपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड कोम्फेड के 16 सदस्यीय टीम ने बिहार के सबसे प्रमुख मिथिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लि., समस्तीपुर ( मिथिला दुग्ध संघ समस्तीपुर डेयरी ) का भ्रमण किया . इस दौरान पूरी टीम ने सल्खनी , फिरोजपुर , पतैली एवम सराय रंजन समिति का भी अवलोकन किया . इस दौरान टीम के सदस्यों ने उन महिलाओं से भी बात चित की जो इस संस्था द्वरा संचालित समितियाँ चलाती है . महिला दुग्ध उत्पादकों से मिल कर टीम के सभी सदस्य प्रभावित हुए तथा उनका हौसला अफजाई भी किये . इसके साथ साथ टीम ने समस्तीपुर स्थित दुघ प्लांट का भी सूक्ष्मता से निरिक्षण किया . भ्रमण नरीक्षण के बाद संस्थान के प्रबंध निदेशक डीके श्रीवास्तव की अध्यक्षता में और संस्थान के अध्यक्ष तथा अन्य वरीय पदाधिकारियों की मौजूदगी में इस क्षेत्र के विकास के लिए टीम ने बैठक कर पूरी बात चित की कुछ सुझाव भी दिए . श्री श्रीवास्तव ने बताया की बैठक में मिथिला दुग्ध संघ ने एक विस्तृत प्रेज़न्टेशन प्रस्तुत किया है जिसके माध्यम से यह दर्शाया गया है की कैसे इस क्षेत्र को अवसंरचना योजना के तहत पूर्ण लाभ दिया जा सकता है .

श्री श्रीवास्तव ने बताया ” मिथिलांचल में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने और खासकर सुदूर गावों में निचले स्तर के किसानों को इससे अधिक से अधिक जोड़ने के लिए मिथिला दुग्ध संघ लगातार काम कर रहा है। हमारे
संस्थान की पूरी कोशिस रहती है की हर किसान की आर्थिक उन्नति में हम अधिक से अधिक सहयोग करते रहे . हमें पूर्ण उम्मीद है की “डेयरी अवसंरचना योजना” किसानो की आर्थिक प्रगति के साथ साथ सामाजिक स्तर में भी अमूल परिवर्तन लाएगी .

कल शुक्रवार को भ्रमण और निरिक्षण के दौरान जापान की टीम में टाकुमी कुनिताके टोकियो , डॉ शिगेमोची हिरोशिमा , मिसेज चिकाको टोकियो , सौरभ तालुकदार जयका इंडिया , अखिरो किमुरा प्रतिनिधि ज्याको इण्डिया के साथ सर्वेयर टीम में फुमिको इकेग्या केएमसी जापान , डॉ युकिओ इकेडा केएमसी जापान , तोमोयुकी ताजित्सू केएमसी जापान तथा देशाई प्रकाश प्रह्लाद राव बेंगलुरु ने पुरे परिसर के साथ प्लांट , मशीनरी , कार्य प्रणाली तथा समितियों का भ्रमण निरिक्षण किया . इससे पूर्व सभी प्रतिनिधियों का संस्थान दौरे पर संस्थान के मीटिंग हॉल में उनका मिथिला परम्परा की संस्कृति विरासत मिथिला पेंटिंग देकर  प्रबंध निदेशक डीके श्रीवास्तव और अध्यक्ष के द्वारा स्वागत किया गया …

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