शुभा मुद्गल – डॉ. नीतू कुमारी नवगीत के गायन के साथ बिहार दिवस समारोह का हुआ समापन

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गांधी मैदान में चल रहे तीन दिवसीय बिहार दिवस समारोह का शनिवार की रात पद्मश्री शुभा मुद्गल के गायन के साथ संपन्न हो गया। शुभा मुद्गल ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति देकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान उन्होंने अपने पुराने गीतों के साथ नये गानों का भी गायन किया। शुरूआत उन्होंने वैष्णव जन तो तेने कहिए.. से किया। इसके बाद भारतीय शास्त्रीय संगीत और पाश्चात्य संगीत की सांकेतिक बातचीत पेश की जिसमें तराना का इस्तेमाल किया गया। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने प्रकृति को समर्पित धरती के दरबार नौबत बाज रही है.. का गायन किया। फिर शुभा मुद्गल ने बांका नैना वाले तुने कैसा जादू डाला.. सीखो न सीखो न नैना की भाषा पिया, कह रही तुमसे ये खामोशियां.. का गायन कर खूब वाहवाही लूटी। इसके बाद जी लेने दो हर लम्हा, जिंदगी कुछ कह रही है कह लेने दो.. चले जईहो बजरिया हो राजा..मुनिया पिंजरे वाले न तेरे सदगुरू हैं व्यपारी.. दिन यूहीं जाए ढल, रात तो कटे न.. बाबुल जिया मोरा घबराए, बिन बोले रहा न जाए.. के गायन से गांधी मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। फिर उन्होंने जब जाऊं तो जाऊं कौन डगरिया रे, जाने सजना है कौन नगरिया.. रंगीला मारो ढ़ोलना-ढ़ोलना.. अबके सावन ऐसे बरसे.. का गायन किया तो दर्शक खुद को झूमने से नहीं रोक सके । गिटार पर आदित्य बलानी, तबले पर अनिश प्रधान, हारमोनियम पर सुधीर नायक, की-बोर्ड पर अनिल चावला, बेस गिटार पर गौरव बलानी और ड्रम पर श्रीजन महाजन ने संगत किया। दूसरी ओर रवीन्द्र भवन में आयोजित शास्त्रीय वादन में लक्ष्य मोहन और आयुष मोहन ने सितार वादन और सरोद वादन की जुगलबंदी से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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 गांधी मैदान में आयोजित बिहार दिवस समारोह सह चंपारण सत्याग्रह शताब्दी समापन समारोह के सांस्कृतिक पंडाल में लोक गायिका डॉ. नीतू कुमारी नवगीत ने पारंपरिक लोकगीतों के साथ-साथ गांधीजी के जीवन और विचारों पर आधारित लोकगीतों की प्रस्तुति दी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को सत्य और अहिंसा का महान पुजारी बताते हुए उन्होंने गाया – सत्य की राह दिखाई दियो रे लाठी वाले बापू, अहिंसा का अलख जगाए दियो रे, लाठी वाले बापू। इसी तरह पूरे विश्व में शांति के लिए बापू के विचारों की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए उन्होंने गाया-अमन की प्यासी इस धरती को दो बापू का अमर पैगाम, सत्य-अहिंसा के साये में पाएगी दुनिया आराम। उन्होंने बिहार की गौरवमयी गाथा का निरूपण करते हुए बिहार गौरव गान- इस धरा पर हमने जन्म लिया यही हमारा मान है, ऐ बिहार बिहार की धरती तुझ पर ही जीवन कुर्बान है, हर दिल में बसता प्यार यहां पर गंगा प्यार की बहती है कहना है गर्व से हम हैं बिहारी अपनी यही पहचान है गीत गाकर सबको भाव-विभोर किया। उन्होंने हमरा आम अमरईया बड़ा निक लागेला, पटना से वैद्य बुलाई द, फर गई ले नेमुआ और चैती गीत चैती मां से चुनरी रंगा दे हो रामा सहित अनेक लोकगीत पेश किए जिस पर लोग झूमते रहे । कार्यक्रम के दौरान मनोज कुमार सुमन ने नाल पर, राकेश कुमार ने हारमोनियम पर, सुजीत कुमार ने कैसियो पर, सुरजीत कुमार ने तबला पर और राजू ओम तिवारी ने पैड पर संगत किया।

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