RTI कार्यकर्ता की हत्या के मामले में पुलिस ने किया बड़ा खुलासा

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वैशाली के गोरौल में 4 अप्रैल को हुई आरटीआई कार्यकर्ता जयंत की हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है. जयंत की हत्या के पीछे कोई और नहीं बल्कि गोरौल के प्रखंड प्रमुख मुन्ना राय के हाथ होने का खुलासा हुआ है. पुलिस ने इस मामले में गोरौल के प्रखंड प्रमुख मुन्ना राय समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है. चार लोगों में गोरौल एफसीआई गोदाम के दो ठेकेदार विकास और रंजीत कुमार के अलावा उदय कुमार शामिल है.

गिरफ्तारी के बाद इस बात का खुलासा हुआ कि जयंत आरटीआई के जरिए गोरौल के एफसीआई गोदाम में चल रहे अनाज घोटाले का पर्दाफाश करना चाहता था. प्रखंड प्रमुख मुन्ना राय को ये बात नागवार गुजर रही थी. आरोप है मुन्ना राय अनाज घोटाला करने के बदले गोदाम के ठेकेदारों से हर महीने एक लाख रुपये बतौर रंगदारी लिया करता था. जयंत इसी बात का खुलासा करना चाहता था ऐसे में मुन्ना राय ने उसे रास्ते हटाने का प्लान बना दिया.

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जयंत की हत्या के लिए दो शूटरों को तीन लाख की सुपारी दी गई थी जिसमें से 1 लाख 75 हजार रुपये दोनों को एडवांस दिए गए थे. वैशाली एसपी राकेश कुमार ने बताया कि हत्या की सुपारी दी जाने के बाद आलोक और रवि नाम के दो शूटरों ने घटना को अंजाम दिया और मौके से फरार हो गए. पुलिस अब दोनों शूटरों को तलाश कर रही है.

पुलिस ने हत्या की सुपारी के लिए दिए गए पचास हजार नकद, 3 मोबाइल और एक बाइक जब्त की है. एसपी के मुताबिक मुन्ना राय ने जयंत की हत्या कई कारणों से करवाई. पुलिस का कहना है कि जयंत ने भी प्रखंड प्रमुख मुन्ना राय को मारने की धमकी दी थी.

प्रखंड प्रमुख के चुनाव में भी जयंत ने मुन्ना राय का विरोध किया था. इसके अलावा जयंत ने मुन्ना राय की पत्नी जो पंचायत समीति सदस्य भी हैं उनपर फेसबुक के जरिये आपत्तिजनक टिप्पणी की थी जिसको लेकर भी मुन्ना राय, जयंत से नाराज था.

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