NIA ने दी देशभर में आतंकी गतिवधियों की जानकारी, कहा- 14 राज्यों से अरेस्ट हुए IS के 127 संदिग्ध आतंकी

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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनएआई) ने भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल विभिन्न आतंकी संगठनों और उनसे जुड़े केसों के बारे में जानकारी दी। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल की मौजूदगी में विज्ञान भवन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एनआईए के आईजी आलोक मित्तल ने देशभर में चल रही आतंकी गतिविधियों के खुलासों की जानकारी दी।

श्रीलंक चर्च हमले के मास्टरमाइंड से प्रेरणा
मित्तल ने बताया कि तमिलनाडु और केरल के तीन केस में गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि वे जारान हसीन के विडियो और ऑडियो भाषण को सुनकर रैडिकलाइज हुए थे। जारान हसीन श्रीलंका में ईस्टर के मौके पर चर्च में हुए भयावह हमले का मास्टरमाइंड है। उन्होंने बताया कि सीरियाई आतंकी संगठन आईएसआईएस से जुड़े कुल 127 लोग अरेस्ट किए गए हैं। तमिलनाडु से 33, उत्तर प्रदेश से 19, केरल से 17, तेलंगाना से 14 समेत कुल 14 राज्यों से इन संदिग्ध आतंकवादियों की गिरफ्तारी हुई है।

जेएमबी नेटवर्क की बड़ी साजिश नाकाम
एनआईए ने म्यांमार से भागे रोहिंग्या मुसलमानों के आतंकवादी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) नेटवर्क की भारतविरोधी गतिविधियों का भी खुलासा किया। मित्तल ने बताया कि अक्टूबर 2014 में बर्धवान केस में जेएमबी से संबंधित पहला केस भारत में दर्ज किया गया था। तब पता चला था कि जेएमबी की बांग्लादेश की लीडरशिप 2007 से ही भारत आ रही थी।

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रॉकेट लॉन्चर बनाकर ट्रायल भी
उन्होंने कहा कि 2018 में बोधगया केस हुआ था, उसमें तीन आईईडी लगाए थे जिसमें ज्यादा नुकसान नहीं हुआ था क्योंकि दो बम फटे ही नहीं थे। जेएमबी का आतंकियों ने रोहिंग्या मुसलमानों के लिए बौद्ध मंदिरों को निशाना बनाने की प्लानिंग की थी। इन्होंने बेंगलुरु को अपना ठिकाना बनाया। योजना के मुताबिक, आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए संगठन ने आईईडी एवं रॉकेट लॉन्चर बनाए और उनका ट्रायल भी किया।

130 लोगों की लिस्ट जांच एजेसियों के पास
एनआईए के आईजी ने बताया, ‘खाखरागढ़ केस में 35 लोगों को और बोधगया केस में 9 लोगों को चार्जशीट किया गया। उनके अलावा 130 अन्य नाम आए, इनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं होने के कारण चार्जशीट तो नहीं किया जा सका, लेकिन ये चार्जशीटेड लोगों के साथ संपर्क में पाए गए।’

उन्होंने कहा कि एनआईए ने 130 लोगों की लिस्ट तैयार कर राज्यों और केंद्र की जांच एजेंसियों से शेयर की है। जेएमबी की लीडरशिप ने पूछताछ में बताया कि कर्नाटक की एक मीटिंग में जमाएत-ए-मुजाहिदीन (इंडिया) की स्थापना करने की लक्ष्य भी तय हुआ था। पहले पूरे दक्षिण भारत में और फिर पूरे देश में इसका विस्तार करने की योजना थी, लेकिन पकड़े गए तो योजना पर काम आगे नहीं बढ़ सका।

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पूर्वोत्तर राज्यों में आतंकी गतिविधियां
मित्तल ने पूर्वोत्तर राज्यों में आतंकी गतिविधियों के बारे में बताते हुए कहा, ‘नॉर्थ ईस्ट में सक्रिय उग्रवादी संगठनों के खिलाफ केस दर्ज किए हैं। इन्होंने सुरक्षा बलों के दस्तों और नेताओं पर हमले किए थे। सरकारी फंड भी उग्रवादी गतिविधियों में ट्रांसफर किए गए और सरकारी कर्मचारी/अधिकारी भी इस खेल में शामिल पाए गए। 10 सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ चार्जशीट दायर किए गए हैं।’

उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तर राज्यों के आतंकी संगठनों के बेस दूसरे देशों में हैं। इन्होंने म्यामांर में बेस के अलावा ट्रेनिंग कैंप भी बनाए और कई बार वारदात को अंजाम देने के बाद वहां भाग भी गए। उन्होंने कहा, ‘एनडीएफपी असम में 2014 में 2 बार नस्लीय हिंसा की जिनमें 100 लोग मारे गए थे। इस घटना में 9 केस दर्ज हुए जिनमें 4 केस में फैसला आ चुका है। कुछ दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई है।’

मिजोरम को बनाया ट्रांजिट पॉइंट
मित्तल ने कहा कि मिजोरम में तीन केस सामने आए। पकड़े गए लोगों ने बताया कि वे मिजोरम को ट्रांजिट पॉइंट की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। वे म्यांमार से हथियारों की तस्करी करते हैं और बांग्लादेश में चकम हिल ट्रैक्स के आर्म्ड ग्रुप्स तक पहुंते हैं। उन्होंने कहा कि ये आतंकवादी बांग्लादेशी गिरोहों तक हथियार पहुंचाने के दौरान रास्ते में पकड़े गए और उनसे हथियार बरामद हुए।

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उन्होंने बताया कि एनआई फेक करंसी मामले की नोडल एजेंसी है। एनआईए में फेक करंसी और टेरर फंडिंग की सेल बनी है। इस दिशा में भी जोर-शोर से काम चल रहा है।

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