EVM को बलि का बकरा न बनाएं, बैलेट पेपर को वापस लाने का सवाल ही नहीं : चुनाव आयोग

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देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओपी रावत ने चुनावों के लिए बैलेट पेपर को वापस लाने की सभी संभावनाओं को खारिज करते हुए कहा कि ईवीएम को बलि का बकरा बनाया जा रहा है, क्योंकि मशीनें बोल नहीं सकतीं और राजनीतिक दलों को अपनी हार के लिए किसी न किसी को जिम्मदार ठहराने की जरूरत होती है. मर्चेट्स चेंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा आयोजित ‘निर्वाचन ईमानदारी और चुनावों में धन की भूमिका’ पर आयोजित एक इंटरएक्टिव सत्र में यहां रावत ने कहा, “प्रणाली की ईमानदारी के बारे में वास्तव में कुछ भी नहीं है, हालांकि जब भी इस मुद्दे पर सवाल उठते हैं, हम स्पष्टीकरण देते हैं.”

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने पिछली जुलाई को सर्वदलीय बैठक में घोषित किया था कि आगे से सभी चुनाव वोटर वेरिफियेबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) मशीनों के साथ ईवीएम का प्रयोग करके किए जाएंगे. उन्होंने कहा कि मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए ईवीएम के साथ वीवीपैट का प्रयोग भी किया जाएगा.

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रावत ने कहा कि राजनीतिक दलों द्वारा ईवीएम को आसानी से बलि का बकरा बना दिया जाता है, क्योंकि वह बोल नहीं सकती और राजनीतिक दलों को अपनी हार का ठीकरा फोड़ने के लिए किसी न किसी चीज की जरूरत होती है.

मतपत्र की ओर लौटने का सवाल नहीं
उन्होंने दावा किया कि भारत में मुक्त व निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया ने विश्व को प्रभावित किया है. रावत ने कहा कि वीवीपेट युक्त ईवीएम से ही चुनाव होंगे, मतपत्र की ओर फिर वापस लौटने का सवाल ही नहीं उठता है.

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि यह प्रशंसा योग्य बात है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के बावजूद, चुनाव आयोग कुछ ही घंटों में परिणाम देने में सक्षम है. उन्होंने कहा कि चुनावों में धन और ताकत के प्रयोग को समाप्त करने के लिए व्यापक कदम उठाए जा रहे हैं.

पहचान सुरक्षित रखी जायेगी
ओपी रावत ने कहा है कि निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़ी गड़बड़ियों और गलत तौर तरीकों को आयोग के मोबाइल एप के जरिये उजागर करने वालों की पहचान को सुरक्षित रखा जायेगा. हाल ही में आयोग द्वारा पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किए गए मोबाइल एप के जरिये कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान गड़बड़ियों की 780 शिकायतें मिली थीं. रावत ने बताया कि वीडियो फॉर्मेट में इन शिकायतों की जांच की जा रही है. उन्होंने बताया कि आयोग को वीडियो के जरिये ये शिकायतें भेजने वालों की पहचान उजागर न हो, इसके लिये हर संभव कदम उठायेंगे.

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