CBI के झगड़े में सरकार की हार, आलोक वर्मा नहीं ले पाएंगे बड़े फैसले

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CBI Vs CBI: मोदी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने आज सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के अधिकार वापस लेने के केन्द्र के फैसले को रद्द कर दिया है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ-साफ कहा कि आलोक वर्मा को नीतिगत फैसला नहीं ले सकते हैं. कोई नई जांच शुरू नहीं करवा सकते हैं. आलोक वर्मा का कार्यकाल जनवरी में खत्म होगा.

वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने फैसले के बाद कहा, ”आलोक वर्मा को बहाल कर दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नियुक्ति समिति (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विपक्षी दल के नेता और चीफ जस्टिस) एक सप्ताह के भीतर उनके नीतिगत कामों पर फैसला लें.”

सुप्रीम कोर्ट ने वर्मा और एनजीओ कॉमन काज की याचिका पर फैसला सुनाया है. आलोक वर्मा की याचिका में केंद्र के 23 अक्टूबर के फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत सरकार ने वर्मा को देश की प्रमुख एजेंसी के निदेशक पद के अधिकारों से वंचित कर दिया था.

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सरकार ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच भ्रष्टाचार के आरोप-प्रत्यारोपों को लेकर वर्मा और अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया था. सरकार ने उनकी जगह नागेश्वर राव अंतरिम चीफ नियुक्त किया था.

दोनों अधिकारियों ने एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाये थे। वर्मा ने केन्द्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के एक और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के दो सहित 23 अक्टूबर 2018 के कुल तीन आदेशों को निरस्त करने की मांग की है। उनका आरोप है कि ये आदेश क्षेत्राधिकार के बिना तथा संविधान के अनुच्छेदों 14, 19 और 21 का उल्लंघन करके जारी किये गये। केन्द्र ने इसके साथ ही 1986 बैच के ओडिशा कैडर के आईपीएस अधिकारी एवं ब्यूरो के संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को जांच एजेन्सी के निदेशक का अस्थाई कार्यभार सौंप दिया था।
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ ने पिछले साल छह दिसंबर को आलोक वर्मा की याचिका पर वर्मा, केन्द्र, केन्द्रीय सतर्कता आयोग और अन्य की दलीलों पर सुनवाई पूरी करते हुये निर्णय सुरक्षित रखा था। पीठ ने गैर सरकारी संगठन ‘कॉमन कॉज’ की याचिका पर भी सुनवाई की थी। इस संगठन ने न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल से राकेश अस्थाना सहित जांच ब्यूरो के तमाम अधिकारियों पर लगेभ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कराने का अनुरोध किया था।
वर्मा का सीबीआई निदेशक के रूप में दो साल का कार्यकाल 31 जनवरी को पूरा हो रहा है। उन्होंने केन्द्र के फैसले को चुनौती देने हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था। केन्द्र ने शीर्ष अदालत के सामने वर्मा को उनकी जिम्मेदारियों से हटाकर अवकाश पर भेजने के अपने फैसले को सही ठहराया था और कहा था कि उनके और अस्थाना के बीच टकराव की स्थिति है जिस वजह से देश की शीर्ष जांच एजेंसी ‘‘जनता की नजरों में हंसी’’ का पात्र बन रही है। अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने पीठ से कहा था केन्द्र के पास ‘‘हस्तक्षेप करने’’ तथा दोनों अधिकारियों से शक्तियां लेकर उन्हें छुट्टी पर भेजने का ‘‘अधिकार’’ है।

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