बिहार में भी बैन हुई संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’, सीएम ने दिया निर्देश

0
144

पटना -पिछले कुछ समय से देश की चर्चित कथित एतिहासिक पृष्ट भूमि पर फिल्म पद्मावती का विरोध देश के कोने कोने से हो रहा , आज यह विरोध बिहार के गलियों चौराहों को पार करता बिहार विधानसभा तक पहुच गया . आज इसे एक और बड़ा झटका लगा है. जब बिहार के सीएम नितीश कुमार इस फिल्म के रिलीज होने पर बैन लगाया जा रहा है.आखिरकार इसे अब बिहार में इसे उस वक्त तक इन्तेजार करना होगा जब तक विवाद के संबंध में फिल्मकार सफाई नहीं दें देते या विवाद ख़त्म नहीं हो जता तब तक बिहार में फिल्म नहीं चलेगी .

मामला आज कुछ यु हुआ की बिहार के सुपौल स्थित छातापुर से भाजपा विधायक नीरज कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को फिल्म पद्मावती पर बैन लगाने से संबंधित का पत्र सौंपा. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने फिल्म ‘पद्मावती’ पर बैन लगाने के लिए स्वीकृति देते हुए अधिकारियों को कहा कि जब तक विवाद खत्म नहीं हो जाता, बिहार में फिल्म ‘पद्मावती’ का प्रदर्शन नहीं होगा. इसके बाद नीतीश कुमार ने अधिकारियों को बिहार में फिल्म पर बैन लगाने का निर्देश दे दिया. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कहा कि जब तक संजय लीला भंसाली और फिल्म से जुड़े लोग विवाद के संबंध में सफाई नहीं देंगे, बिहार में भी फिल्म नहीं चलेगी.

यह भी पढ़े  SC का आदेश- TISS की रिपोर्ट सार्वजनिक करे बिहार सरकार

वैसे आज यह तीसरा मौका है जब सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म पद्मावती को प्रतिबंधित करने के आग्रह को खारिज कर दिया है. इससे उन लोगों और राज्यों के मुख्यमंत्रियों को झटका लगा है जो फिल्म को रिलीज करने का विरोध कर रहे थे.

सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि यह तय करना राष्ट्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड का काम है कि कोई फिल्म रिलीज करने लायक है या नहीं. अदालत ने यह भी कहा है कि इस मुद्दे पर बयानबाजी नहीं होनी चाहिए. जजों ने कहा, “जब मामला अभी केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के सामने लंबित है तो फिर सार्वजनिक पदों पर बैठे लोग कैसे कह सकते हैं कि बोर्ड को फिल्म के लिए सर्टिफिकेट जारी करना चाहिए या नहीं.”

काव्य/किंवदंतियों के अनुसार कौन थी पद्मावती..

पद्मावती या पद्मिनी चित्तौड़ के राजा रत्नसिंह (रतनसेन) [1302-1303 ई०] की रानी थी। इस राजपूत रानी का ऐतिहासिक अस्तित्व तो प्रायः स्वीकार कर लिया गया है, परन्तु इनके नाम का ऐतिहासिक अस्तित्व संदिग्ध है। इतिहास ग्रंथों में अधिकतर ‘पद्मिनी’ नाम स्वीकार किया गया है, जबकि जायसी ने स्पष्ट रूप से ‘पद्मावती’ नाम स्वीकार किया है।
जायसी के अनुसार पद्मावती सिंहल द्वीप के राजा गंधर्वसेन की पुत्री थी और चित्तौड़ के राजा रतन सेन योगी के वेश में वहाँ जाकर अनेक वर्षों के प्रयत्न के पश्चात उसके साथ विवाह कर के उसे चित्तौड़ ले आया था। वह अद्वितीय सुन्दरी थी और रतनसेन के द्वारा निरादृत ज्योतिषी राघव चेतन के द्वारा उसके रूप का वर्णन सुनकर दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़गढ़ पर आक्रमण कर दिया था। 8 वर्षों के युद्ध के बाद भी अलाउद्दीन खिलजी चित्तौड़ पर विजय प्राप्त नहीं कर सका तो लौट गया और दूसरी बार आक्रमण करके उस ने छल से राजा रतनसेन को बंदी बनाया और उसे लौटाने की शर्त के रूप में पद्मावती को मांगा। तब पद्मावती की ओर से भी छल का सहारा लिया गया और गोरा-बादल की सहायता से अनेक वीरों के साथ वेश बदलकर पालकियों में पद्मावती की सखियों के रूप में जाकर राजा रतनसेन को मुक्त कराया गया। परंतु इस छल का पता चलते ही अलाउद्दीन खिलजी ने प्रबल आक्रमण किया, जिसमें दिल्ली गये प्रायः सारे राजपूत योद्धा मारे गये। राजा रतनसेन चित्तौड़ लौटा परंतु यहाँ आते ही उन्हें कुंभलनेर पर आक्रमण करना पड़ा और कुंभलनेर के शासक देवपाल के साथ युद्ध में देवपाल मारा गया परंतु राजा रतनसेन भी अत्यधिक घायल होकर चित्तौड़ लौटा और स्वर्ग सिधार गया। उधर पुनः अलाउद्दीन खिलजी का आक्रमण हुआ। रानी पद्मावती अन्य सोलह सौ स्त्रियों के साथ जौहर करके भस्म हो गयी तथा किले का द्वार खोल कर लड़ते हुए सारे राजपूत योद्धा मारे गये। अलाउद्दीन खिलजी को राख के सिवा और कुछ नहीं मिला।

यह भी पढ़े  समान वेतन मामले में SC ने पूछा-किसी को 24 तो किसी को 70 हजार क्यों?

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here